गुरुवार, 30 अक्टूबर 2025

मृत्यु..

मृत्यु यू ही नही स्पर्श करती है..जबतक की जीने की जिजीविषा खत्म न हो जाये..

जब जीने की जिजीविषा खत्म हो जाये,तब लाख प्रयत्न कर ले कोई,तब कोई जी नही सकता..।

अगर जीना है,तो जीने की जिजीविषा बनाये रखना होगा।

आखिर ऐसा क्या होता है,जब जीने की जिजीविषा खत्म हो जाता है..??

शायद मोह माया का अंत हो जाता है,अपनों से स्नेह का डोर टूट जाता है..शायद इसीलिए मृत्यु शरीर को स्पर्श कर पाती है..अन्यथा मृत्यु यू ही स्पर्श नही करती क्योंकि मृत्यु हरेक बंधनों को तोड़कर एक नई दुनिया मे ले जाती है,जंहा कोई बंधन नही है..।

मृत्यु एक नई दुनिया का दरवाजा खोलता है,जंहा किसी तरह का बंधन नही है,वंहा असीम ऊर्जा से संचालित ऊर्जावान शरीर है,जो मृत्यु लोक में जब चाहे तब झांक सकता है..।।

मृत्यु अंत नही बल्कि एक नई शुरुआत है..



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