बुधवार, 12 नवंबर 2025

लोग कहते है..

लोग कहते है कि मैं अच्छा हूँ..
मैं जब खुद से पूछता हूँ..
क्या मैं सच मे अच्छा हूँ..??
तो अंदर से एक जबाब आता है..
हां तुम अच्छे हो..
मगर अपने लिए नही,दूसरों के लिए..।

क्या सच में, मैं अच्छा हूँ..??
शायद नहीं..
दूसरों के नजर में अच्छा होना आसान है,
खुद के नजर में बुरा होना,सबसे बुरा है..।

दूसरों का क्या है..
जब तक स्वार्थ सधता रहेगा तबतक अच्छे बने रहेंगे,
जब तक मन,कर्म,वचन से ठेस न पहुँचाओ तबतक अच्छे बने रहोगे..।

मगर खुद के बारे में भी तो सोचो...
स्वयं को नुकसान पहुंचा कर कबतक खुद के नजरों में बुरा बने रहोगे..

इतिहास उसी का गुणगान करता है,
जो स्वयं के बारे में सोचता है,जो स्वयं के नजरों में अच्छे है..
चाहे वो राम हो,कृष्ण हो,या बुद्ध हो,या फिर वर्तमान में ही कोई सफल व्यक्तित्व हो..।

सफलता का एक ही ध्येय है..
खुद के प्रति स्वार्थी बने..।।
कड़वा है,मगर कटु सत्य है..।।

इसीलिये तो सफल लोगों की तादाद कम है,
नहीं...नही...खुशनुमा लोगों की तादाद कम है..।।






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