कुछ अच्छी तो कुछ बुरी होती है..।
मगर हम में से कई लोग अपनी बुरी प्रतिभा को अपने अच्छे प्रतिभा से दबा देते है,तो कई लोग अपने बुरे प्रतिभा से अपने अच्छे प्रतिभा का दमन कर देते है..।
उन्हीं में से एक प्रतिभा कमेंट करनी की है..
क्या कमेंट करना सही है..??
शायद ही हममें से कोई हो जिसे कमेंट करने की खुजली न हो..
जब से सोशल मीडिया आया है तब से तो ये खुजली और बढ़ गई है..।
कमेंट भी दो तरह के होते है-
एक अच्छे और एक बुरे..
मगर हममें से कुछ ही लोग होते है..जो अच्छे कमेंट करते है..।
क्या हमें कमेंट करने का अधिकार है..??
अगर हां,तो किसके ऊपर..।
आज सोशल मीडिया के दौर में ये जन्मजात अधिकार बन गया है..
हम किसी से,किसी के ऊपर बिना सोचे समझे कमेंट कर देते है..
बिना ये सोचे कि,क्या हमें कमेंट करना चाहिए..??
शायद ही हममें से कोई ये सोचता है..।
मगर इसका दुष्परिणाम आभासी दुनिया(सोशल मीडिया) में तो न के बराबर पड़ता है,मगर वास्तविक दुनिया मे इसका दुष्परिणाम पड़ता है..।।
जिसतरह हम बिना सोचे समझे सोशल मीडिया पे कमेंट कर देते है,उसी तकरह हम वास्तविक दुनिया मे भी कर देते है..।
जिसके कारण हमारे संबंध खराब होते है..।
क्या हमें कमेंट नही करना चाहिए..??
ये सवाल ही गलत है..क्या हमें जन्मजात अधिकार छोड़ना चाहिए..तो बिल्कुल नही..बल्कि उसका इस्तेमाल करना सीखना चाहिए..।।
आखिर कैसे इस्तेमाल करें..??
•कमेंट हमेशा अपने बराबरी वालों के ऊपर करें, और कमेंट हमेशा पॉजिटिव और उद्देश्यात्मक हो..
•जब तक आपसे कोई राय न मांगा जाय तबतक कमेंट न करें..
•अगर कमेंट करना उस व्यक्ति के हित मे हो तो जरूर करें..
कमेंट करते वक़्त उसमें ईष्या, द्वेष, घृणा का भाव नही झलकना चाहिए..।।
ये आसान नही नही है..😊
क्योंकि कमेंट करने की खुजली जन्मजात जो मिली हुई है..😊।

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