सब फ़िल्म तो नही मगर कुछ फिल्में जरूर होते है,उन्ही में से एक फ़िल्म है "सतलुज''...।
इसे बने 3 साल हो गए थे मगर CBFC ने 121 कट लगाए और फ़िल्म का नाम(पंजाब 95) बदलने को कहा..
मगर मेकर और दिलजीत दोसांझ नही माने..
और इसे 3जुलाई 2026 को Zee_5 OTT पे रिलीज किया और 6 जुलाई को किसी कारणवश हटा दिया गया..।
मगर मेकर और दिलजीत दोसांझ नही माने..
और इसे 3जुलाई 2026 को Zee_5 OTT पे रिलीज किया और 6 जुलाई को किसी कारणवश हटा दिया गया..।
ये फ़िल्म 90 के दशक के पंजाब के हालात दिखा रहे है,कैसे उस समय के हालात थे,ये फ़िल्म बैंक कर्मचारी और मानवाधिकार कार्यकर्ता "जसवंत सिंह खालरा' जी के ऊपर है..उन्होंने किस तरह सरकार और प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाया और इस मामले को दुनिया के सामने लाया..मगर अफसोस वो दोनों कंही गुम गए..।
ये फ़िल्म उन्हीं के दास्तां को बयां कर रही है..।
ये फ़िल्म प्रशासन और सरकार की वो क्रूरता को दिखाता है जिसे आम आदमी कभी बयां नही कर पाता,क्योंकि जिसके साथ क्रूरता होता है,वो कुछ बयां करने के लिए बचता ही नही..।।
सरकार और प्रशासन ने अपनी क्रूरता को छुपाने के लिए #सतलुज फ़िल्म को OTT से हटा दिया है..।।
लोग बदलते है..पद,प्रतिष्ठा नही..आज की सरकार भी वही कर रही है..जो 90के दशक में कर रही है..।।
पंजाब की भोगौलिक स्थिति ही ऐसी है,जिस कारण उसे सदियों से आक्रांताओं का सामना करना पड़ा है..पंजाब और पंजाब के लोग वो पहरेदार है,जो अपने लहू बहाकर सदियों से भारत की पहरेदारी कर रहे है..
मगर उन्हें मिला क्या..??
जब सारा देश आजादी का जश्न मना रहा था..
तब पंजाब खून से लतपथ लाशों में अपनों को ढूंढ रहा था..।
फिर कभी..।।

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