गुरुवार, 30 जुलाई 2026

मुझे खुद को बदलना है..

मुझे खुद को बदलना है..
जब आइने में खुद को देखूं..
तो नजरें मिला सकूँ..
और मुस्कुरा सकूँ..।
मुझे खुद को बदलना है..
जब अपने अतीत में देखु..
तो वर्तमान पे गौरवान्वित महसूस कर सकूं..।
मुझे खुद को बदलना है..
जब भीड़ में किसी चाहने वालों से मिलूं..
तो उनसे नजरें फेरु नहीं,
बल्कि उनसे नजरें मिला सकूँ..
मुझ खुद को बदलने है..
जब आईने में खुद को देखूं..
तो नजरें मिला सकूँ..।


बुधवार, 29 जुलाई 2026

मैं..

मैं बहना चाहता हूं..
नदी की तरह..।
मैं उड़ना चाहता हूं..
बादल की तरह..।
मैं खिलना चाहता हूं..
सूर्य की रोशनी की तरह..।
मैं विलीन होना चाहता हूं..
शून्य की तरह..।
मैं,
मैं का भान खोना चाहता हूं..
इस प्रकृति की तरह..।

कंहा ढूंढू गुरु को..

कंहा ढूंढू गुरु को..
इस माया से ढकी अंधियारे में..
कभी इधर,तो कभी उधर..
यू ही भटक रहा हूँ मैं..।
कंहा ढूंढू मैं..
गुरु को..
मैं तो अभी उस योग्य भी नहीं..
की उन्हें ढूंढने का साहस करू..।
मुझमें अभी वो योग्यता भी नहीं..
की उनके थपकियों का चोट सह सकू..।
कंहा ढूंढू गुरु को..।
(जिस तरह कुम्हार मिट्टी के बर्तन को थपकी देकर आकार देता है,उसी तरह गुरु कुम्हार की तरह ही शिष्य को आकार देता है)

कंहा ढूंढू गुरु को..
जो व्यर्थ हो रहे जीवन को नई दिशा दे..
कंहा ढूंढू..
कहते है..
गुरु को ढूंढ नही सकते..
बल्कि गुरु स्वयं ही आपको ढूंढ लेते है..।

आखिर क्या करूँ..
की गुरु की कृपा हो..।
अपने अंदर की प्यास और जिजीविषा को जितना बढ़ा सकते है..
उतना बढ़ाये..
अपने कमियों से निजात पाए..
स्वयं को निश्छल और पवित्र बना ले..
गुरु का अंकुरण स्वयं ही होगा..।।

गुरु आपको देख रहे है..
आपका वाट जोह रहें है..
आज से नहीं,
सदियों से..
आप ही राह भटक चुके है..
आप आगे तो बढ़े..
गुरु स्वयं ही आपका हाथ थाम लेंगे..।।





मंगलवार, 28 जुलाई 2026

विरोध के लिए विरोध नही..

विरोध के लिए विरोध नही..
बल्कि अपने हक़ और सम्मान के लिए विरोध जरूरी है..
सिर्फ विरोध के लिए विरोध नही..
बल्कि समय की नजाकत को देखते हुए विरोध जरूरी है..।
विरोध के लिए विरोध नहीं..।
बल्कि अपने अधिकार के लिए विरोध जरूरी है।


एक बेचैनी है..

एक बेचैनी है..
एक छटपटाहट है..
जो हूँ..
उससे निजात पाने की..।

क्या करूँ,कैसे करू..
कुछ समझ नही आता..
मगर जो हूँ..
उससे निजात पाना है..।

क्योंकि अभी जो मैं हूँ..
उस लायक नही हूँ मैं..
मैं इससे और बेहतर होना चाहता हूं..
खुद को बदलना चाहता हूं..
और एक नए जिंदगी की शुरुआत करते है..।

एक बेचैनी है..
एक छटपटाहट है..
जो हूँ..
उससे निजात पाने की..।

थोड़ा नही,पूर्णतया निजात पाना चाहता हूं..।
और खुद को नए मुकाम पे ले जाना चाहता हूं..
और इस चाह को वास्तविकता में परिवर्तित करना चाहता हूं..।

आसान नही है,
स्वयं को बदलना..
मगर हरेक रोज स्वयं को 1%भी बदलना शुरू किया..
तो एक दिन स्वयं में बदलाव दिखना शुरू हो जाएगा..।

सबसे पहले अपने कमियों पे काम करते है..
अपने कमियों को पहचानते है..
और उसे दूर करते है..
ये आसान नही है..
मगर बिना इसे दूर किये हुए..
खुद को बदल नही सकते..।
क्योंकि आज जो मैं हूँ..
अपने कमियों और गलतियों के वजह से..
और कल जो मैं होऊंगा..
वो अपने कमियों और गलतियों को दूर करके ही..।

एक बेचैनी है..
एक छटपटाहट है..
जो हूँ..
उससे निजात पाने की..।

क्या करूँ,कैसे करू..
कुछ समझ नही आता..
मगर जो हूँ..
उससे निजात पाना है..।


गुरुवार, 23 जुलाई 2026

लड़ाई जारी है..

लड़ाई जारी था..

लड़ाई जारी है..

और लड़ाई जारी रहेगा..

​जब-जब सत्ताशीन अहंकारी और सत्ता के नशे में चूर होंगे..

तब-तब लोग सड़कों पे उतरेंगे..

और उनकी औकाद बतायेंगे..

​तुम जनता से हो, और

जनता के लिए हो..।

 


बुधवार, 22 जुलाई 2026

दूरियां..

मैंने तो बहुत कोशिस की तुम्हारे पास जाने को..
मगर तुम्हीं दूरियां बनाती गई..
मैं तब भी नजदीकियां बढ़ाता गया..
मगर तुमने इतनी दूरियां बना ली..
की अब तुम्हारे करीब आने का मन नही करता..।
क्योंकि तुम्हारा मन चाहता ही नही..
की मैं तुम्हारे करीब आऊ..।



कौन अच्छा,कौन बुरा..

मैं कैसे किसी में बुराइयां देखूं..
जब मुझमे ही ढेर सारी कमियां है..।
यंहा बुरा कौन..
और अच्छा कौन है..??
सब परिस्थितियों के मारे है..
जो आज बुरे है..
हो सकता है,
वो कल अच्छे हो जाये..।
और जो, आज अच्छे है,
हो सकता है,
वो कल बुरे हो जाये..।।



मंगलवार, 21 जुलाई 2026

मित्र..

मैं ऋणी हूँ तुम्हार मित्र..
और उऋण भी नही होना चाहता..।
क्योंकि अगर फिर जन्म हो..
तो तुम्हारा ऋण चुकाने के बहाने..
तुमसे अगले जन्म में भी,
फिर से मुलाकात हो..।
मैं ऋणी हूँ तुम्हारा मित्र..।



सोमवार, 20 जुलाई 2026

शतरंज..

मेरी जिंदगी में ♟️शतरंज♟️ की बहुत अहमियत है..
जब भी हताश और निराश होता हूँ..
तो ♟️शतरंज♟️ खेलता हूँ..।

जब जीतता हूँ..
तो कुछ नही सीखता..।
मगर जब हारता हूँ..
तो बहुत कुछ सीखता हूँ..।।

चलिये एक चाल चलते है..
और जिंदगी के हताशाओं और निराशाओं को,
पीछे छोड़ते है..।।



रविवार, 19 जुलाई 2026

कमियां

मुझमें भी अभी है..
ढेर सारी कमियां..
क्योंकि..
मुझे दूसरों में दिखती है कमियां..।
क्या करूँ..
कैसे दूर करू..
अपनी कमियां..।
शायद दूसरों की खूबियां स्वीकार कर..
और उनके कमियों को दरकिनार कर..।

और अपनी गलतियां स्वीकार कर,और उसे सुधार कर..।
शायद अपने गलतियों को दूर किया जा सकता है..।







मूवी : श्रीकांत..

72 वाँ राष्ट्रीय अवार्ड के लिए बेस्ट मूवी के लिए "श्रीकांत" मूवी को चुना गया..।




ये मूवी श्रीकांत बोल्ला के जीवन पर आधारित है,जो बचपन से ही अंधे थे..।

मगर उन्होंने जिंदगी में वो मुकाम हासिल किया जो भारत की 95% से ज्यादा आबादी उस मुकाम को हासिल नही कर सकते..।


- अभी भी साइंस स्ट्रीम लेकर कितने लोग पढ़ते है..

- भारत के कितने लोगों को MIT(विश्व की सबसे अग्रणी इंजीनियरिंग संस्थान) में पढ़ने का मौका मिलता हूं..।

- भारत के कितने लोग सफल एंटरप्रेन्योर(उद्यमी) बनते है..।


उन्होंने वो सब हासिल किया जो वो पाना चाहते थे..उसके लिए उन्होंने मेहनत किया..और उन्हें अच्छे लोगों का साथ मिलता रहा..।


हममें से अक्सरहाँ लोग कुछ करना तो चाहते है..मगर करते नही..अगर करते है,तो उसे मुकाम तक नही पहुंचा पाते..।।


इसी फ़िल्म में A.P.J अब्दुल कलाम सर् की एक लाइन है..

"अच्छा करो,अच्छे लोग खुद-व-खुद मिलते रहेंगे.."।


इस फ़िल्म के बारे में कहें तो फ़िल्म का मुख्य पात्र अपने परिस्थितियों का रोना कभी नही रोता..शायद इसिलिय वो सफल हुए..

मगर हम आप अपने परिस्थितियों का अक्सरहाँ रोना रोते है..मगर उस परिस्थितियों का समाधान नही ढूंढते..।


एक बार ये मूवी अवश्य देखें..

क्योंकि ये मूवी एक समय पे खुद से रु-ब-रु करवाती है..हमारे आपके दोनों पहलुओं को दिखाता है..।


"सफल वही होते है,जो सफल होना चाहते है.."

शनिवार, 18 जुलाई 2026

आप अपनी ऊर्जा कंहा खर्च करते है..।

आपने कभी गौर किया है..
आप अपनी ऊर्जा कंहा खर्च करते है..??
जंहा खर्च करते है..
वंहा से आपको क्या मिलता है..?



थोड़ा रुकिए,और जरा सोचिए..
सोचिए नहीं, मनन कीजिये..
आप अपनी ऊर्जा कंहा खर्च करते है..
जंहा खर्च करते है..
वंहा से आपको क्या मिलता है..
अगर कुछ मिलता है..
तो वो आपके जिंदगी में क्या बदलाव ला रहा है..
क्या वो ऊर्जा आपके जिंदगी को नया आयाम दे रहा है..?
या फिर आपको धरातल में ही ले जा रहा है..?
जरा सोचिए..।


समय ऊर्जा है..
और ऊर्जा जिंदगी है..।
आप अपना समय जैसे इस्तेमाल करेंगे..
जिंदगी वैसी ही होगी..।

शुक्रवार, 17 जुलाई 2026

दादी माँ..

आपका न होना बैचैन करता है मुझे..
आपका न होना बेघर लगता है मुझे..
आपका न होना..
ये सोच के दिल सहमता है मेरा..।
कंहा चली गई आप..।

मेरे आने के खबर सुनते ही..
कई दफा आपका फोन आ जाना न-गवारा गुजरता था मुझे..।
मेरे इंतजार में,
मेरा वाट जोहना अजीब लगता था मुझे..।
घर पे दस्तक देते ही..
आपके मुस्कान का दीदार करना..
और आपके चरणों का स्पर्श करना..
अलग अनुभूति देता था मुझे..।।

ये पहली दफा होगा,
जब घर पहुंचते ही,
आपका दीदार नही होगा..
आपके मुस्कुराते चेहरे से दो-चार नही होगा.।


आपके बेगैर उस घर में..
पहली दफा कैसे रह पाऊंगा मैं..।
मेरे सूखे बालों में तेल कौन लगाएगा अब,
वो मेरी गोल्ड बिस्कुट जबरदस्ती कौन खिलायेगा अब..
घर से बाहर दूर जाते वक्त चुपचाप कौन,मेरे हाथों में पैसा थमायेगा अब..।।
यही सब सोच के जी घबराता है..
ज्यों-ज्यों घर के करीब पहुंच रहा हूँ..
आपके न होने का अहसास और बढ़ता जा रहा है..।
आपके बेगैर उस घर में कैसा रह पाऊंगा मैं..
दादी माँ..।।



बुधवार, 15 जुलाई 2026

ये मायने नही रखता..

ये मायने नही रखता की..
वो कितना प्यार करता है..।
मायने ये रखता है कि..
आप कितना प्यार करते है..।
क्या आप इतना प्यार करते है कि..
उसके हर गुनाह को माफ़ कर सके..
अगर हां..
तो आप सच में प्यार करते है..।

मगर ये संभव कंहा..।
इसिलिय तो..
प्यार करने वालों की तादाद घटती जा रही है..
प्यार का मिशाल बनने वालों की तादाद घटती जा रही है..।
अब कंहा मिलता है हीर-रांझा,
और कंहा दिखता है लैला-मजनू की जोड़ी..।
अगर कोई दिख भी जाये..
तो वो सिर्फ आकर्षण है..
जब तक आकर्षण रहेगा तबतक साथ रहेंगे..
जब आकर्षण खत्म होगा..
तो शायद साथ रहकर भी साथ नही रह पाएंगें..।।




कैसे हो..

तुम्हारा हाल पूछने का मन करता है..
मगर ड़र लगता है..
कंही तुम्हारा जबाब न आये,तो..
मेरे हाल का..
क्या हाल होगा..?

यही सोचकर..
तुम्हारा हाल पूछने का मन नही करता..।
मगर फिर भी..
तुम्हारा हाल पूछने का मन करता है..।।
कैसे हो..??



इंडियन वुमन..

स्त्री क्यों असहाय होती है..?
स्त्री असहाय नहीं..
बल्कि हमारी सोच ही निकृष्ट होती है..।

बहन कैसे अपना सबकुछ छोड़ कर..
यानि अपना नाम तक...छोड़ कर
दूसरे का घर बसाने चली जाती है..?
किसी की बीवी बन कर उसके दुनियां को सजाने लगती है..
फिर दादी-नानी बनकर पूरा कुनबा संभालने लगती है..।
आखिर फिर भी वो असहाय क्यों है..??


सोमवार, 13 जुलाई 2026

मौन

मौन हमें..

मृत बना देता है..

या फिर मृत्यु से परे पहुंचा देता है..।

मगर आप मौन क्यों है..??

ये मायने रखता है..।

क्या आप मौन वर्तमान परिस्थितियों के कारण है..?

या फिर मौन का प्रस्फुटन स्वयं ही हुआ है..?


अगर मौन का प्रस्फुटन स्वयं ही हुआ है, 

तो..

आपका मौन खुशबू की तरह पूरे फिजा में फैल कर,

सबको आनंदित करेगा..।


अगर आप मौन अपने विपरित परिस्थितियों के कारण है,

तो..आपका मौन सिर्फ आपको ही नही,

बल्कि आपके आसपास वाले को भी अमावास की रात की तरह भयावह बना देगा.।।



शुक्रवार, 10 जुलाई 2026

आप स्वयं जिम्मेदार है..

आप स्वयं जिम्मेदार है..
अपने हरेक परिस्थितियों के लिए..।
अगर आप स्वयं को बर्बाद कर सकते है तो...
आप स्वयं को आबाद भी कर सकते है..।।
आपके पास हमेशा एक मौका होता है..
स्वयं को बदलने का..
बस आपको तैयार रहना होता है..
क्या आप तैयार है..??
दुनिया आपका इंतजार कर रहा है..
आप वो नही है..
जो आप दिख रहे है..
आप वो है..
जो आप नही दिख रहे..।

स्वयं को बदलिए..
स्वयं के लिए..
स्वयं से आत्मसाक्षात्कार के लिए..।
कबतक स्वयं को स्वयं से धोखा देते रहेंगे..
कंही ऐसा न हो कि..
स्वयं से ही स्वयं को नफरत हो जाये..।।
आपके पास अभी भी समय है..
स्वयं को बदलने का..।।



गुरुवार, 9 जुलाई 2026

हम चले थे जिसे ढूंढने..

हम चले थे जिन्हें ढूंढने..
उनका कोई पता नहीं है..
जो पता है भी,
उस पता पे,
उनका कोई पता नही है..।
हां उस पता पे उनके होने का,
कुछ अहसास तो है..।

हम जिसे खंगाल रहें थे..
वेद,पुराण ग्रंथों में,
उसमें,उनके होने का कोई प्रमाण नही है..
मगर उनका अहसास तो है..।

क्या वो है..??
ये सवालिया निशान ही..तो,
उनके होने का प्रमाण है..।
 
हमारी क्षमता ही सीमित है..
और वो असीमित है..
इसीलिए सिर्फ उनके होने का अहसास है..
जिस रोज हमारी क्षमता विस्तृत हो जाएगी..
उस रोज उनसे मुलाकात हो जाएगी..।।

हम चले थे जिन्हें ढूंढने..
उनका कोई पता नहीं है..
जो पता है भी,
उस पता पे,
उनका कोई पता नही है..।
हां उस पता पे उनके होने का,
कुछ अहसास तो है..।



बुधवार, 8 जुलाई 2026

तुम सागर हो..

तुम सागर हो..
मैं बारिश की बूंद हूँ..
मैं तुझसे ही निकलकर..
तुझमें ही हर बार मिल जाता हूँ..।
तुम सागर हो..
मैं बारिश की बूंद हूँ..।

बिना तेरे मेरा क्या अस्तित्व है..
मगर जब-जब मैं,
संघनित होता हूँ..
अपना अस्तित्व ही भूल जाता हूँ..।
लील जाता हूँ..
कई नदियों,तालाबों और मैदानों को..
और फिर तुममें ही..
समाहित हो जाता हूँ..।
तुम सागर हो..
मैं बारिश की बूंद हूँ..।



मंगलवार, 7 जुलाई 2026

दूरियां..

कभी-कभी दूरियां बनाना भी बेहतर है..
जिससे उन्हें, हमारी कमियां का अहसास हो..।
क्या सच में,
उन्हें हमारी कमियां का अहसास भी होगा..
अगर होगा..
तो वो ढूंढते-ढूंढते जरूर आएंगे..।

चलो एक बार देखते है..
उनसे दूरियां बनाके..
और ये अहसास करके..
क्या उनके भी जिंदगी में..
मेरी कुछ अहमियत है भी,या नही..।

सोमवार, 6 जुलाई 2026

फ़िल्म "सतलुज"..

कहते है फ़िल्म समाज का आइना होता है..
सब फ़िल्म तो नही मगर कुछ फिल्में जरूर होते है,उन्ही में से एक फ़िल्म है "सतलुज''...।

इसे बने 3 साल हो गए थे मगर CBFC ने 121 कट लगाए और फ़िल्म का नाम(पंजाब 95) बदलने को कहा..
मगर मेकर और दिलजीत दोसांझ नही माने..
और इसे 3जुलाई 2026 को Zee_5 OTT पे रिलीज किया और 6 जुलाई को किसी कारणवश हटा दिया गया..।

ये फ़िल्म 90 के दशक के पंजाब के हालात दिखा रहे है,कैसे उस समय के हालात थे,ये फ़िल्म बैंक कर्मचारी और मानवाधिकार कार्यकर्ता "जसवंत सिंह खालरा' जी के ऊपर है..उन्होंने किस तरह सरकार और प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाया और इस मामले को दुनिया के सामने लाया..मगर अफसोस वो दोनों कंही गुम गए..।
ये फ़िल्म उन्हीं के दास्तां को बयां कर रही है..।




ये फ़िल्म प्रशासन और सरकार की वो क्रूरता को दिखाता है जिसे आम आदमी कभी बयां नही कर पाता,क्योंकि जिसके साथ क्रूरता होता है,वो कुछ बयां करने के लिए बचता ही नही..।।

सरकार और प्रशासन ने अपनी क्रूरता को छुपाने के लिए #सतलुज फ़िल्म को OTT से हटा दिया है..।।

लोग बदलते है..पद,प्रतिष्ठा नही..आज की सरकार भी वही कर रही है..जो 90के दशक में कर रही है..।।

पंजाब की भोगौलिक स्थिति ही ऐसी है,जिस कारण उसे सदियों से आक्रांताओं का सामना करना पड़ा है..पंजाब और पंजाब के लोग वो पहरेदार है,जो अपने लहू बहाकर सदियों से भारत की पहरेदारी कर रहे है..
मगर उन्हें मिला क्या..??

जब सारा देश आजादी का जश्न मना रहा था..
तब पंजाब खून से लतपथ लाशों में अपनों को ढूंढ रहा था..।
फिर कभी..।।

शनिवार, 4 जुलाई 2026

तुमसे भी बेहतर..

तुमसे भी बेहतर हैं,
कई इस जंहा में..
तुम्हीं गलतफहमी पाले हुए हो..
मुझसे बेहतर कौन है..
इस जंहा में..?

कोई बेहतर नही है..
इस जंहा में,
सब में,
कुछ-न-कुछ कमियां है ही..
इस जंहा में..

कुछ लोग अपने कमियों को दरकिनार कर..
और अपने खूबियों को निखार कर..
आगे निकल जाते है..
तो..
कुछ लोग अपने कमियों का रोना रोकर..
ताउम्र वंही के वंही रह जाते है..।

तुमसे भी बेहतर हैं,
कई इस जंहा में..
तुम्हीं गलतफहमी पाले हुए हो..
मुझसे बेहतर कौन है..
इस जंहा में..।



कंहा है आशियाना मेरा .


कंहा है..
आशियाना मेरा..
जंहा कल था..
वंहा आज कुछ और है..
कंहा है आशियाना मेरा..।

मैं यू ही ढूंढ रहा हूँ..
उस आशियाने को..
जो मेरा कभी, था ही नही..।

क्या मैं उतनी दूरी तय कर..
आशियाना बनाने आया हूँ...??
या फिर उस मुकम्मल..
आशियाने को पाने आया हूँ..
जिसे पाकर..
किसी आशियाने की चाह न रह जाये..।


शुक्रवार, 3 जुलाई 2026

जिंदगी के दौड़ में..

मैं जिंदगी के दौर में बहुत पीछे रह गया हूँ..
मगर मुझे उम्मीद अभी भी है..।
कोई मोड़ तो आएगा..
जो मुझे सबसे आगे ले जाकर खड़ा कर जाएगा..।

मगर वो मोड़ कब आएगा..
इसका कोई पता नही..
मगर वो मोड़ जरूर आएगा..।

बस मुझे सजग और सतर्क रहना है..
कंही वो मोड़ गलती से छूट न जाये..
नही तो..
मैं जिंदगी के दौड़ में पीछे ही रह जाऊंगा..।।



बुधवार, 1 जुलाई 2026

मुस्कुराइए..😊

क्या आपको मालूम है..
आप दिन में कितने बार हंसते या मुस्कुराते है..??
एक बार..दो बार..
या फिर एक बार भी नही..🤔

अगर आप एक बार भी नही हंसते या मुस्कुराते है..
तो ये चिंतनीय है..
क्योंकि आप अपने शरीर के अंगों के लिए बोझ बन रहे है..
और अपने अंगों को बोझिल कर रहे है..।

क्योंकि जब आप एक बार भी नही मुस्कुराते है..
तब आप अपने मांसपेशियों को तनाव में डाल रहे होते है,जिसके कारण शरीर मे थकान महससू होती है..।
वंही जब हम हंसते है तो हमारी ब्लड वेसल्स फैलती है,जिस कारण ब्लड सर्कुलेशन के साथ हमारा हृदय स्वस्थ रहता है..
वंही जब हम नही हंसते/मुस्कुराते है..तो हमारी ब्लड वेसेल्स सिकुड़ती जाती है,साथ ही स्ट्रेस हॉर्मोन(कार्टिसोल और अड्रेनिल)बढ़ता जाता है जिस कारण दिल की बीमारियों को हम न्योता देते है..।
T-cells(एंटीबॉडी) का निर्माण जब हम हंसते या मुस्कुराते है तो हमारे अंदर एंटीबॉडी का निर्माण होता है,जो हमारे इम्मयून तंत्र को मजबूत करता है..।अगर आप नही हंसते या मुस्कुराते है तो आपको सर्दी-खांसी या अन्य संक्रमण बीमारियों से सामना करना पड़ सकता है..।।
फेफड़ो की कार्यक्षमता- जब हम जोर से हंसते है तो हमारे फेफड़े की क्षमता बढ़ती है और ऑक्सीजन गहन करने की क्षमता बढ़ जाती है,जिस कारण हरेक कोशिका तक ऑक्सीजन आसानी से पहुंच जाता है..अगर नही हसेंगे तो क्या होगा..जरा सोचिए..।
●मानसिक स्वास्थ्य- जब हम हंसते या मुस्कुराते है तो डोपामिन और सेरोटोनिन हॉर्मोन का स्त्राव होता है,जिससे मष्तिष्क को ये सिग्नल मिलता है कि सब ठीक है..अगर न मुस्कुराए तो शरीर को क्या सिग्नल जाएगा..जरा सोचिए..।।

मुस्कुराइए..
क्योंकि हमारा जन्म ही मुस्कुराने के लिए हुआ है..
क्योंकि इस ब्रह्मांड में जो कुछ भी है..
वो किसी न किसी रूप में मुस्कुरा ही रहे है..।
इसिलिय मुस्कुराइए..
क्योंकि उदास होने के लिए कई कारण मिल जाएंगे
मगर मुस्कुराने के लिए कोई कारण नही चाहिए..
इसिलिय मुस्कुराइए..
क्योंकि हमारा जन्म ही मुस्कुराने के लिए हुआ है..😊


सफलता ही शाश्वत है..

एक बार सफल होना चाहता हूं..
इतना सफल..
की जिन लोगों ने मुझसे मुँह फेरा है..
एक बार उन्हें फिर से..
मुँह फेरने के लिए विवश करू..।

सफलता ही शाश्वत सत्य है..
क्योंकि हम यंहा सफल होने के लिए ही आये है..
मगर हम दूसरों चीजों में उलझ कर असफल हो गए है..।।

सबसे सफल प्राणी इस ब्रह्मांड में मनुष्य ही है..
मगर सबसे बड़ा असफल संख्या मनुष्यों का ही है..।

जबकि हरेक पेड़-पौधे या जीव जंतु अपने सफलता के पराकाष्ठा पे पहुंच ही जाते है..
जो नही पहुंच पाते वो अपना अस्तित्व गवां देते..।
मगर मनुष्यों में सामुदायिक भावना के कारण असफल लोग भी सफल लोगों के सहारे जी लेते है..।



आखिर कबतक..