बुधवार, 1 जुलाई 2026

मुस्कुराइए..😊

क्या आपको मालूम है..
आप दिन में कितने बार हंसते या मुस्कुराते है..??
एक बार..दो बार..
या फिर एक बार भी नही..🤔

अगर आप एक बार भी नही हंसते या मुस्कुराते है..
तो ये चिंतनीय है..
क्योंकि आप अपने शरीर के अंगों के लिए बोझ बन रहे है..
और अपने अंगों को बोझिल कर रहे है..।

क्योंकि जब आप एक बार भी नही मुस्कुराते है..
तब आप अपने मांसपेशियों को तनाव में डाल रहे होते है,जिसके कारण शरीर मे थकान महससू होती है..।
वंही जब हम हंसते है तो हमारी ब्लड वेसल्स फैलती है,जिस कारण ब्लड सर्कुलेशन के साथ हमारा हृदय स्वस्थ रहता है..
वंही जब हम नही हंसते/मुस्कुराते है..तो हमारी ब्लड वेसेल्स सिकुड़ती जाती है,साथ ही स्ट्रेस हॉर्मोन(कार्टिसोल और अड्रेनिल)बढ़ता जाता है जिस कारण दिल की बीमारियों को हम न्योता देते है..।
T-cells(एंटीबॉडी) का निर्माण जब हम हंसते या मुस्कुराते है तो हमारे अंदर एंटीबॉडी का निर्माण होता है,जो हमारे इम्मयून तंत्र को मजबूत करता है..।अगर आप नही हंसते या मुस्कुराते है तो आपको सर्दी-खांसी या अन्य संक्रमण बीमारियों से सामना करना पड़ सकता है..।।
फेफड़ो की कार्यक्षमता- जब हम जोर से हंसते है तो हमारे फेफड़े की क्षमता बढ़ती है और ऑक्सीजन गहन करने की क्षमता बढ़ जाती है,जिस कारण हरेक कोशिका तक ऑक्सीजन आसानी से पहुंच जाता है..अगर नही हसेंगे तो क्या होगा..जरा सोचिए..।
●मानसिक स्वास्थ्य- जब हम हंसते या मुस्कुराते है तो डोपामिन और सेरोटोनिन हॉर्मोन का स्त्राव होता है,जिससे मष्तिष्क को ये सिग्नल मिलता है कि सब ठीक है..अगर न मुस्कुराए तो शरीर को क्या सिग्नल जाएगा..जरा सोचिए..।।

मुस्कुराइए..
क्योंकि हमारा जन्म ही मुस्कुराने के लिए हुआ है..
क्योंकि इस ब्रह्मांड में जो कुछ भी है..
वो किसी न किसी रूप में मुस्कुरा ही रहे है..।
इसिलिय मुस्कुराइए..
क्योंकि उदास होने के लिए कई कारण मिल जाएंगे
मगर मुस्कुराने के लिए कोई कारण नही चाहिए..
इसिलिय मुस्कुराइए..
क्योंकि हमारा जन्म ही मुस्कुराने के लिए हुआ है..😊


सफलता ही शाश्वत है..

एक बार सफल होना चाहता हूं..
इतना सफल..
की जिन लोगों ने मुझसे मुँह फेरा है..
एक बार उन्हें फिर से..
मुँह फेरने के लिए विवश करू..।

सफलता ही शाश्वत सत्य है..
क्योंकि हम यंहा सफल होने के लिए ही आये है..
मगर हम दूसरों चीजों में उलझ कर असफल हो गए है..।।

सबसे सफल प्राणी इस ब्रह्मांड में मनुष्य ही है..
मगर सबसे बड़ा असफल संख्या मनुष्यों का ही है..।
जबकि हरेक पेड़-पौधे या जीव जंतु अपने सफलता के पराकाष्ठा पे पहुंच ही पाते..
जो नही पहुंच पाते वो अपना अस्तित्व गवां देते..।
मगर मनुष्यों में सामुदायिक भावना के कारण असफल लोग भी सफल लोगों के सहारे जी लेते है..।

मुस्कुराइए..😊