गुरुवार, 1 जनवरी 2026

बप्पा..


मत मुस्कुराओ आप इस तरह..
नही तो डूब जाऊंगा मैं.
आपकी मुस्कुराहटों में..।
फिर आगे क्या होगा..
ये सोच के दिल घबराता है..।
क्योंकि फिर मैं..
मैं नही रह जाऊंगा..
सिर्फ मैं ही रह जायेगा..।।

मत मुस्कुराओ आप इस तरह..
क्योंकि आपकी मुस्कान..
बिना बोले ही वो सब बोल देते है..
जो मैं खुद से नही बोल पाता..।

जब से आप मेरी जिंदगी में आये हो..
तब से जिंदगी बदलने लगी है बप्पा..

खुद को कैसे बेहतर बनाये..??

हममें से हरेक लोग अपने जिंदगी को बेहतर बनाना चाहते है..
और हम सब वो सब करते है,जिससे जिंदगी बेहतर हो.।
मगर अफसोस सबकुछ पाकर भी जिंदगी बेहतर नही लगती आखिर क्यों..??

दरसल इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में हम जिंदगी को बेहतर नही बना रहे होते, बल्कि अपने धन-दौलत,पद,प्रतिष्ठा और मान-सम्मान को बढ़ाने में लगे होते है..।
ये सब पाकर भी जिंदगी नीरस रहती है..।
क्योंकि ये सब पाने के चक्कर में हम उन चीजों को भूल जाते है,जो वास्तविकता में जिंदगी को बेहतर बनाती है..।।

चलिए आज से अपने जिंदगी में कुछ बदलाव लाकर जिंदगी को बेहतर बनाते है..।

खुद को स्वीकार करें..(आप जैसे है,जिन स्थितियों में है,उसे स्वीकार करें, क्योंकि आपके लिए आपसे बेहतर कोई और नही है..अपने कमजोरियों के बारे में न सोचें,बल्कि अपने ताकत के बारे में सोचे।)

दूसरों को स्वीकार करें.. जबतक हम दूसरों को स्वीकार नही करेंगे,तबतक वो हमें स्वीकार नही करेंगे(विचार,अभिव्यक्ति,दृष्टिकोण इत्यादि)।

आप जिस वातावरण में,जिस समाज में रह रहें है,उसके अनुसार अपनी प्रतिक्रिया दे..।(हम अक्सरहाँ आवेश में आकर वो बोल जाते है,जो हमें नही बोलना चाहिए।)

अपनी सबसे बड़ी आवश्यकताओं और इच्छाओं का पता लगाएं।(ये कैसे पता चलेगा..अपने क्रोध और गुस्सा का कारण पता करें.. पता चल जाएगा।)

हरेक इंसान/वस्तुओं में कमियों के बजाय अच्छाइयां ढूंढे..।

वर्तमान में जीयें.. अफसोस हम या तो अतीत में या फिर भविष्य में ही जीते है..।अगर हम अपने वर्तमान को सजग होकर जियेंगे तो हमारा हरेक क्षण आंनदित होगा..(ये कैसे होगा..??सांसो के प्रति सजग होकर)।

दूसरों के प्रति खुले हृदय से व्यवहार करें..(अपने भावनाओं को छुपाये नही)

प्रत्येक व्यक्ति में असीमित शक्ति का भंडार है,उसका उपयोग कर अपना जिंदगी बेहतरीन करें।(हम अपने मष्तिष्क का 10% भी इस्तेमाल नही करते,और अपनी जिंदगी का 50% ही जीते है।)

अपने शत्रु और कठिन परिस्थितियों को अपना गुरु समझें..क्योंकि इनके प्रति सजग रहकर हम अपने जिंदगी को बेहतर बना सकते है..।

अगर जिंदगी बेहतर बनाने के लिए मुझे इसमें से कोई एक चीज चुनना होगा तो मैं- "खुद को स्वीकार करना चुनूँगा.."।

क्योंकि जिंदगी बेहतरीन होती है,खुद को स्वीकारना से..जबतक हम खुद को  स्वीकार नही कर सकते,तबतक हम दूसरों से सिर्फ छलावा ही करते है,और खुद को पीड़ा देते है..।।
इसलिए खुद को स्वीकार करें.. आप जैसे है,जिन परिस्थितियों में है,उसे स्वीकार करें.. क्योंकि जब तक स्वीकृति नही होगी तब तक जिंदगी में सुधार कंहा से होगी..।।

इसलिए 2026 को बेहतर बनाने के लिए खुद को स्वीकार करें..😊।।

बुधवार, 31 दिसंबर 2025

गलतियां..

कुछ गलतियां हम अतीत में करते है..
और उसे भूल जाते है..
शायद ये गलतियां..
गलती से गलत हो जाती है..।
और भविष्य में कभी उन गलतियों से मुलाकात होती है..
तो हम मुस्कुराते हुए,
और खुद पर हंसते हुए..
उन गलतियों को सुधारते है..।

कुछ गलतियां गलती से गलत हो जाती है..।


मुझे लगा मेरे पाँव..

मुझे लगा मेरे पाँव जमीं पर है..
मगर जब मैंने अपने आस-पास देखा..
तो यंहा सब शून्य में झूल रहे है..।
चाहे चाँद हो या हो सितारे..
यंहा सब शून्य से ही संचालित हो रहे है..।
मुझे लगा मेरे पाँव जमीं पर है..।


बहुत सोचा,बहुत जाना..
तब पता चला.. 
मेरे पाँव जमीं पर क्यों है..??
क्योंकि मेरा खुद का अस्तित्व ही नही है..
मैं इसलिए हूँ, क्योंकि ये पृथ्वी है..।
जिस रोज मैं का भान हो जाएगा..
मैं भी..
मैं हो जाऊंगा..।
और इस शून्य का हिस्सा हो जाऊंगा..
तब मेरे भी पाँव जमीं पर नही होंगे..।

मुझे लगा मेरे पाँव जमीं पर है..

2025 को कैसे याद रखें..

2025 कैसे बीत गया पता ही नही चला...
अगर ये सवाल आपके मन मे भी उठ रहा है..तो..
ये अच्छा संकेत नही है..क्योंकि
आपने ये साल भी यू ही जाया कर लिया..।


अगर हम हरेक पल को,हरेक दिन को अच्छी तरह से जियें तो वो दिन भी साल के बराबर हो जाता है..इसीलिए आनेवाले हरेक पल को जाया नही होने देंगे ये दृढनिश्चय लेकर अगले वर्ष की सुबह की शुरुआत करेंगे..।।

2025 को हम-आप कैसे याद रख सकते है..??
असान है..आसान सवाल पूछकर...
इस साल के आखरी दिन फिर से हम 2025 को जी सकते है..।

चलिए कुछ सवाल खुद से पूछते है...।

आपने इस साल सबसे ज्यादा खुशी और बेफिक्री कब महसूस की..?
 (समय लीजिये..और आंख बंद कर उन लम्हों को याद कर कुछ पल जीयें)

किस चीज ने सबसे ज्यादा ऊर्जा दी और किस चीज ने उसे खत्म किया..?

कौन सी चीज इस साल असंभव लग रहा था,लेकिन आपने कर दिखाया..?

कौन सी ऐसी आदत है,जिसे लगातार करते रहे तो जीवन में अच्छे और बुरे बदलाव आएंगे..।(किन आदतों को छोड़ना चाहेंगे और किन आदतों को आगे भी लेकर चलेंगे)

ऐसी कौन सी चीज नियंत्रित करने की कोशिश की,जो वास्तव में आपके नियंत्रण से बाहर था।(जो चीज हमारे नियंत्रण में नही है,उसे नियंत्रण करने की कोशिश भी नही करना चाहिए,नही तो जिंदगी में तनाव बढ़ता है।)

क्या किसी को माफ करना या किसी से माफी मांगना जरूरी है..??
(मनोवैज्ञानिक के अनुसार किसी के प्रति गुस्सा,नाराजगी पकड़े रहने से मानसिक और भावनात्मक ऊर्जा खत्म होती है।माफ करने से या फिर माफी मांगने से जिंदगी हल्की और संत्युष्ट महसूस करती है।)अगर किसी से माफी मांगना बाकी रह गया हो,या फिर माफ करना तो जल्दी कीजिये..।

और आखरी बात..जो रिश्ते अनमोल है,उन्हें 2025 में कितनी बार फोन किया..??
अगले साल उन्हें और ज्यादा कॉल कैसे कर सकते है..।।
(इस मामले में मेरी स्थिति भी दयनीय है😢,मैं 2026 में अपने चाहने वालों को कम से कम सप्ताह में एक दिन तो जरूर कॉल करूँगा।)

ये कुछ सवाल खुद से पूछकर 2025 को अलविदा कह सकते है..
और पूरे जोश और उल्लास के साथ 2026 का स्वागत कर सकते है..।।

क्योंकि प्रकृति की नियति ही है आगे बढ़ना..इसलिए अपने अतीत को भूलकर अपने अतीत से सीखकर अपने भविष्य का स्वागत करें..।।

मंगलवार, 30 दिसंबर 2025

सबको अपनी कहानी..

सबको अपनी कहानी खुद लिखनी होती है.
मुझे भी अपनी कहानी खुद लिखनी है..।
भले ही वक़्त अभी साथ न दे..
भले ही अभी कलम साथ न दे..
या फिर भले ही किस्मत अभी साथ ना दे..।
कहानी तो मन-मस्तिष्क में रच चुकी है..
बस उसे धरातल पल कलम और कागज से उकेरना है..।
सबको अपनी कहानी खुद लिखनी होती है.
मुझे भी अपनी कहानी खुद लिखनी है..।


चाहे बार-बार जिंदगी में रुकावट क्यों न आये..
किसी-न-किसी बार रुकावट को पार कर ही जाऊंगा..।
पार करने को मनुष्य से अब रह ही, क्या गया है..
चाहे हिमालय की चोटी हो,या हो समुन्द्र की गहराई..
या फिर पृथ्वी से दूर चंद्र और मंगल ही क्यों न हो..
अब कोई अछूता न रहा है...।
बस जरूरत है एक दृढनिश्चय इच्छा शक्ति की..
और कठिन परिश्रम की..।
कहानी खुद-खुद बन जाएगी..
और वक़्त,कलम,कागज एकसाथ आकर.. 
नई कहानियां बुन देंगी..।
सबको अपनी कहानी खुद लिखनी होती है.
मुझे भी अपनी कहानी खुद लिखनी है..।



रविवार, 28 दिसंबर 2025

फर्क ये नही पड़ता...

फर्क ये नही पड़ता है, कि,आप है कौन..?
फर्क ये पड़ता है कि,आप है कौन..

फर्क ये नही पड़ता कि आप कंहा से आये..
फर्क ये पड़ता है कि आप है कंहा..

फर्क ये नही पड़ता कि आपने कैसी जिंदगी जिया..
फर्क ये पड़ता है कि आप कैसी जिंदगी जी रहे है..।

फर्क ये नही पड़ता कि,आप कितनी दफा गिरे..
फर्क ये पड़ता है कि आप गिर के उठे की नही..

फर्क ये नही पड़ता कि लोग क्या सोच रहे है..
फर्क ये पड़ता है कि अब लोग क्या सोच रहे है..।

फर्क ये नही पड़ता कि,आप क्या सोच रहे है..
फर्क ये पड़ता है कि आप सच मे सोच रहे है..।

फर्क ये नही पड़ता कि,दुनिया कैसी है..
फर्क ये पड़ता है कि, दुनिया ऐसी है.।

फर्क ये नही पड़ता है कि,आप है कौन..
फर्क ये पड़ता है कि,आप है कौन..।