मुझे लगा मेरे पाँव जमीं पर है..
मगर जब मैंने अपने आस-पास देखा..
तो यंहा सब शून्य में झूल रहे है..।
चाहे चाँद हो या हो सितारे..
यंहा सब शून्य से ही संचालित हो रहे है..।
मुझे लगा मेरे पाँव जमीं पर है..।
बहुत सोचा,बहुत जाना..
तब पता चला..
मेरे पाँव जमीं पर क्यों है..??
क्योंकि मेरा खुद का अस्तित्व ही नही है..
मैं इसलिए हूँ, क्योंकि ये पृथ्वी है..।
जिस रोज मैं का भान हो जाएगा..
मैं भी..
मैं हो जाऊंगा..।
और इस शून्य का हिस्सा हो जाऊंगा..
तब मेरे भी पाँव जमीं पर नही होंगे..।
मुझे लगा मेरे पाँव जमीं पर है..

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