हमसब जन्म से ही अच्छे होते है..
मगर ज्यों-ज्यों बड़े होते है,त्यों-त्यों परिवार,मित्र और समाज के संगत में आकर बुरे हो जाते है..।
मगर वर्तमान में सबसे बड़ा योगदान हमारे स्मार्टफोन का है..
हमें वो इस तरह से बुरा बना रहें है कि हमें भी नही पता चल पाता कि हम बुरे हो गए है..हम इतने बुरे हो जाते है कि हमारे सोचने समझने की शक्ति भी क्षीण हो जाती है..।हमारा अपना कोई मंतव्य नही होता,हम उनके मंतव्य को मानने लगते है जिनके प्रभाव में हम होते है..।।
आपको जानकर हैरानी होगी कि हम दिन-प्रतिदिन और बुरे होते जा रहे है..
ये हम नहीं बल्कि आंकड़े बताते है..और आंकड़े कभी गलत नही होते,बस उसको इस्तेमाल करने वाले गलत होते है..।
चलिये उन तथ्यों और शोध की तरफ चलते है -
◆ मिशिगन विश्विद्यालय के अध्ययन के अनुसार पिछले 30 वर्षों में युवाओं में सहानुभूति(Empathy) में 40% की गिरावट आई है..हम आप रोज एक-दो घटना से दो चार होते है,और अपना मुंह फेर लेते है..।
इसका सबसे बड़ा कारण डिजिटल लगाव है,हम घर के सदस्यों से भी मोबाइल पे चैट के द्वारा ही बात करते है..(अगर किसी से बात करना हो तो प्लीज कॉल करके ही बात कर ले,वीडिय कॉल और बेहतर होगा)
◆ नार्सिसस्टिक पर्सनालिटी इन्वेंटरी(NPI) के डेटा के अनुसार 1980 के दशक के तुलना में आज युवाओं में आत्ममुग्धता 30% से अधिक बढ़ गई है..।आत्ममुग्धता बुरा नही है,मगर जब इसके कारण दूसरों की हानि हो तो ये बुरा हो जाता है..।
आज आत्ममुग्धता(Narcissisism) बढ़ने का सबसे बड़ा कारण सोशल मीडिया,सेल्फी संस्कृति है..हम हमेशा दूसरों से बेहतर दिखने के होड़ में लगे हुए है..मगर बेहतर कर नही रहे है..😊
◆पहले अपराध करने के बाद अपराधी का पता चल जाता था,मगर आज ऑनलाइन गुमनामी के कारण बिना किसी से डरे अपराध कर रहें है..
आप जिसे बहुत अच्छा मान रहें है,हो सकता है वो सोशल मीडिया पे बहुत बड़ा अपराधी हो..।
◆ WHO के 2024-25 रिपोर्ट के अनुसार 100 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी मानसिक विकार के साथ जी रहे है..।वंही युवाओं में अकेलापन की दर 21% है..जो समाज मे आपसी सहयोग की कमी को दर्शाता है..।
◆ प्यू रिसर्च सेन्टर(2025-26) के रिपोर्ट के अनुसार विकसित देशों के 60% से अधिक लोग मानते है कि नैतिकता में गिरावट आई है..।
वंही भारत मे सामाजिक असमानता के कारण अविश्वास की खाई बढ़ती जा रही है..।
आंकड़े ये नही बताते है कि हम बुरे हो गए है..
बल्कि हम तो अच्छे ही है,
बस और अच्छे होने की जरूरत है..।
बिल्कुल उस छोटे पौधे की तरह जिसमें अभी सिर्फ एक-दो फूल ही खिले है..उसे और सींचेंगे उसमें और फूल खिलेंगे और एक समय आएगा जब सींचना नही पड़ेगा और फूल खुद-ब-खुद आएंगे..।।
आप अच्छे है..
बस और अच्छे बने..।


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