कंही किसी राह पर..।
क्या कर रहा हूं..
किधर जा रहा हूँ.
कुछ पता नही..।
मैं खो गया हूँ,
कंही किसी राह पर..।
कल बेवजह गवाया..
आज बेवजह गवा रहा हूँ..
कल भी बेवजह गवाऊंगा...।
कब तक खुद के साथ..
समय को गवांता रहूंगा..।
एकदिन कंही ऐसा न हो जाये..
न समय बचे,
न मैं बचु..
और फिर से उस दुष्चक्र को पूरा करने..
फिर से मैं धरती पर आ जाऊ..।
क्यों न इस ही जन्म जागकर..
उस दुष्चक्र से छुटकारा पा जाऊ..।।
मैं खो गया हूँ..
कंही किसी राह पर..।।

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