बिहार की राजनीति में जब भी 'सुशासन' (Good Governance) शब्द का जिक्र होगा, तो नीतीश कुमार का नाम सबसे ऊपर आएगा।
दशकों तक बिहार की कमान संभालने के बाद, उनका कार्यकाल केवल सत्ता का खेल नहीं, बल्कि एक पिछड़े राज्य को मुख्यधारा में लाने का संघर्ष रहा है।
क्या यह वास्तव में एक अध्याय का अंत है?
शायद हाँ, क्योंकि नीतीश कुमार ने बिहार को उस 'जंगलराज' की छवि से बाहर निकाला जिसने राज्य को वर्षों पीछे धकेल दिया था।आज वो मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा सदस्य बनने के लिए नामंकन भर रहें है..।
आइए नजर डालते हैं उनके उन महत्वपूर्ण योगदानों पर जिन्होंने बिहार की तस्वीर बदली।
◆ कानून व्यवस्था: 'जंगलराज' से 'सुशासन' तक
नीतीश कुमार के सत्ता संभालते ही उनकी सबसे पहली प्राथमिकता बिहार की चरमराई कानून व्यवस्था को सुधारना था। उन्होंने अपराधियों में कानून का डर पैदा किया और स्पीडी ट्रायल के जरिए बाहुबलियों को सलाखों के पीछे भेजा।
- परिणाम: शाम ढलने के बाद घरों से निकलने में डरने वाले बिहार में लोग अब बेखौफ सड़कों पर नजर आने लगे।
◆ महिला सशक्तिकरण: 'साइकिल' से बदली सोच
नीतीश कुमार ने समझा कि बिहार तब तक प्रगति नहीं कर सकता जब तक उसकी आधी आबादी पीछे है। उनकी 'मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना'🚲 ने ग्रामीण बिहार की शिक्षा व्यवस्था में क्रांति ला दी।
- पंचायती राज में आरक्षण: बिहार देश का पहला ऐसा राज्य बना जिसने पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 50% आरक्षण दिया।
- शराबबंदी: सामाजिक सुधार की दिशा में उन्होंने कड़ा कदम उठाते हुए शराबबंदी लागू की, जिसका उद्देश्य घरेलू हिंसा को कम करना और गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारना था।
◆ बुनियादी ढांचा: सड़कों और पुलों का जाल
आज बिहार के किसी भी कोने से राजधानी पटना पहुँचने में लगने वाला समय काफी कम हो गया है। नीतीश सरकार ने सड़कों और पुलों के निर्माण को अपनी प्राथमिकता बनाया।
- हर घर बिजली: 'सात निश्चय' योजना के तहत बिहार के लगभग हर गाँव और घर तक बिजली पहुँचाई गई, जो एक समय में नामुमकिन सा लगता था।(आज इसी योजना के तर्ज पर पूरे भारत मे हरेक घर तक बिजली पहुचाई जा रही है)
◆ शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार
नीतीश कुमार के कार्यकाल में बड़ी संख्या में शिक्षकों की भर्ती हुई और स्कूल छोड़ने वाले बच्चों (Drop-out rate) की संख्या में भारी गिरावट आई। स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) की हालत सुधारी गई और मुफ्त दवाओं के वितरण की व्यवस्था की गई।(बिहार भारत के सबसे अग्रणी राज्यों में से है जो सर्वाधिक मुफ्त दवा का वितरण करता है)
क्या रही चुनौतियां..?
उनकी उपलब्धियों के बीच कुछ मोर्चों पर आलोचनाएं भी हुईं:
- पलायन: रोजगार के अवसरों की कमी के कारण आज भी बिहार का युवा दूसरे राज्यों की ओर रुख करता है।
- भ्रष्टाचार: निचले स्तर पर प्रशासनिक भ्रष्टाचार पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पाई।
- राजनीतिक अस्थिरता: बार-बार गठबंधन बदलने की उनकी छवि ने उनकी विश्वसनीयता पर सवाल भी उठाए।
नीतीश कुमार का दौर बिहार के लिए बुनियादी बदलावों का दौर था। उन्होंने बिहार को 'सड़क, बिजली और पानी' जैसे मूलभूत मुद्दों पर आत्मनिर्भर बनाया। इतिहास उन्हें एक ऐसे मुख्यमंत्री के रूप में याद रखेगा जिसने एक बीमारू राज्य को विकास की पटरी पर खड़ा किया।
भले ही वो अब राज्यसभा के सदस्य बन गए है, लेकिन बिहार के आधुनिक इतिहास में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।

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