सोमवार, 2 मार्च 2026

होलिका दहन मनाने का तात्पर्य..

हमसब ये जानते है कि होलिका दहन🔥 क्यों मनाते है..।
बचपन से ही प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप की बहन होलिका की कहानी सुनते आए है..।
मगर हमनें सीखा क्या..??
शायद कुछ भी तो नही..।
बस उस प्रतीक और उस कहानी को साल-दर-साल रिपीट करते आ रहे है..।


क्या आपने सोचा है🤔..
होलिका का जलना किस चीज का प्रतीक है..??
प्रह्लाद का न जलना किस चीज का प्रतीक है..??

क्या आपने सोचा है🤔...
होली साल के अंतिम महीनों में क्यों मनाया जाता है..??
है न अजीब बात..
ये तो तीसरा महीना है..।
नही जी फाल्गुन साल का आखरी महीना है..
और हम इस आखरी महीना में होलिका दहन इसलिए मनाते है..हमने जाने अनजाने में जो भी गलतियां की है,जितनी भी बुराइयां है उसे होलिका दहन में दहन कर दे..और अगले दिन सभी सगे-संबंधी,दोस्त-मित्र से जो भी गिले सिकवे है,उसे रंग-अबीर-गुलाल से रंग कर पानी से धो दे..
और नई साल की शुरुआत पूरे पवित्रता से करें..।

यही तो होलिका दहन का उद्देश्य था..
मगर हम भूल गए है..
सिर्फ होलिका दहन कर रहें है..मगर अपनी कमियों,बुराइयों को दहन नही कर रहे है..।
इस होलिका दहन अपने कमियों,अपने बुराइयों का दहन करें..??

क्या आपको अपने कमियों के बारे में पता है..??
क्या आप अपने कमियों को दहन करने के लिए तैयार है..??

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें