गुरुवार, 9 जुलाई 2026

हम चले थे जिसे ढूंढने..

हम चले थे जिन्हें ढूंढने..
उनका कोई पता नहीं है..
जो पता है भी,
उस पता पे,
उनका कोई पता नही है..।
हां उस पता पे उनके होने का,
कुछ अहसास तो है..।

हम जिसे खंगाल रहें थे..
वेद,पुराण ग्रंथों में,
उसमें,उनके होने का कोई प्रमाण नही है..
मगर उनका अहसास तो है..।

क्या वो है..??
ये सवालिया निशान ही..तो,
उनके होने का प्रमाण है..।
 
हमारी क्षमता ही सीमित है..
और वो असीमित है..
इसीलिए सिर्फ उनके होने का अहसास है..
जिस रोज हमारी क्षमता विस्तृत हो जाएगी..
उस रोज उनसे मुलाकात हो जाएगी..।।

हम चले थे जिन्हें ढूंढने..
उनका कोई पता नहीं है..
जो पता है भी,
उस पता पे,
उनका कोई पता नही है..।
हां उस पता पे उनके होने का,
कुछ अहसास तो है..।



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