लीन हो जाओ..
स्वयं में ऐसे..
जैसे स्वयं का भान न हो।
तब ही शिव का ज्ञान,
और शिव का भान संभव है..।
शिव तो शिव है..
शिव तो हर जगह विद्यमान है..
शिव को जानने के लिए,
खुद को भी सब जगह विद्यमान कर..।
शिव कहते है..
लीन हो जाओ..
स्वयं में ऐसे..
जैसे स्वयं का भान न हो।

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