शनिवार, 12 अगस्त 2023

विक्रम साराभाई

चंद्रयान के बारे में शायद ही कोई भारतीय हो जिसे कुछ मालूम न हो,कुछ-न-कुछ हम चन्द्रयान के बारे में जानते ही होंगे,अगर जानते नही होंगे, तो कुछ-न-कुछ सुना तो जरूर ही होगा..।।



मगर क्या आपको पता है..की इसका सफर कैसे शुरू हुआ..??

आज ही के दिन भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान के नींव रखने वाले प्रणेता का जन्म हुआ था...आज हम जिस ISRO पे गुमान करते है..उसकी नीव ही नही बल्कि उसे सींचा भी ,जो आज पूरे भारतीय को गौरवान्वित कर रहा है..

उन्होंने सिर्फ ISRO ही नही बल्कि इस जैसे कई संस्थाओं की स्थापना की जो पूरे विश्व मे अपना लोहा मनवा रहा है,उनमें से ISRO के अलावा IIM अहमदाबाद भी है.. उन्होंने ही होमी भाभा का सपना पूरा किया और पहली बार 1969 मे न्यूक्लियर टेस्ट की नींव रखी.. उन्होंने ही भारतीय सेटेलाइट की परिकल्पना की थी जो आर्यभट्ट के रूप में तब्दील होकर आसमां को चीरते हुए भारत को अग्रणी देशों में लाकर खड़ा कर दिया...

शायद अब आपको उस शख्श का नाम पता चल गया होगा...

उनका नाम विक्रम साराभाई था..।।



विक्रम साराभाई का जन्म 12 अगस्त 1919 को एक गुजराती औद्योगिक परिवार में हुआ।

 बचपन से ही उन्हें पढ़ने के साथ-साथ प्रयोग करना पसंद था। वे 15 साल के थे जब उन्होंने अपने घर पर ही दो इंजीनियरों की मदद से एक ट्रेन इंजन का वर्किंग मॉडल बनाया। इतना बड़ा जिसपर एक बच्चा भी बैठकर 'घूम सके।

उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भारत में प्राप्त की। और उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय गए।लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध छिड़ने पर उन्हें वापस लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा।

भारत वापिस आकर उन्होंने डॉ. सी. वी. रमन के अधीन IIScबेंगलुरु से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। जहाँ उनकी मुलाकात डॉ. होमी भाभा से भी हुई। बाद में उन्होंने कैम्ब्रिज लौटकर Phd भी की।



 भारत के आजाद होने के बाद भारत लौट आये और उन्होंने-

●वर्ष 1947 में अहमदाबाद में अपने पारिवारिक घर पर भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL) की स्थापना की।

●वर्ष 1947 में ही अहमदाबाद टेक्सटाइल इंडस्ट्री रिसर्च एसोसिएशन (AITRA) की स्थापना की।

● वर्ष 1949 में अपनी पत्नी मृणालिनी साराभाई के साथ 'दर्पण एकेडमी ऑफ परफॉर्मिग आर्ट्स की स्थापना की।

●वर्ष 1961 में IIM अहमदाबाद की स्थापना में अहम भूमिका निभाई।

●वर्ष 1961 में भारत के पहले ऑपरेशन रिसर्च संस्थान (ORG) की स्थापना की।

●वर्ष 1962 में INCOSPAR की स्थापना की। यही संस्थान वर्ष 1969 में जाकर "ISRO" बना

●वर्ष 1963 में इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) की स्थापना की।

●वर्ष 1967 में भारतीय यूरेनियम निगम (UCIL) की स्थापना की।



इसके अतिरिक्त उन्होंने अपने जीवनकाल में कुल 38 संस्थानों की स्थापना में अपना योगदान दिया।

वर्ष 1966 में डॉ. होमी भाभा की अकाल मृत्यु के बाद उन्होंने 'एटॉमिक एनर्जी कमीशन का कार्यभार सँभाला। उन्होंने सबसे पहले NASA के साथ मिलकर भारत के 5000 गाँव में टीवी के सिग्नल पहुँचाना पर काम शुरू किया, वही आगे जाकर वर्ष 1975 में कृषि दर्शन प्रोग्राम' के रूप में प्रसारित हुआ।




वर्ष 1969 में सरकार के 'भारतीय न्यूक्लियर प्रोग्राम' का प्रस्ताव रखा। यहीं पर उन्होंने भारत के पहली न्यूक्लियर टेस्ट की नींव रखीउन्होंने ही पहली भारतीय सैटेलाइट की परिकल्पना भी की। वही आगे जाकर 'आर्यभट सैटेलाइट बनी।


वर्ष 1971 में वे ISRO के SLV सिस्टम को रिव्यू कर रहे थे। इसी विषय पर एक वैज्ञानिक से बात करने के कुछ देर बाद उनकी तबियत बिगड़ी। उस रात हार्ट अटैक से उनकी मृत्यु हो गई।

जिस वैज्ञानिक से वे बात कर रहे थे उनका नाम था 'एपीजे अब्दुल कलाम' । वे डॉ साराभाई को "भारतीय विज्ञान का महात्मा गाँधी कहते थे।



उन्होंने उस समय ये सब हासिल किया जब पूरे भारत को भर पेट भोजन नसीब नही होता था..

"कुछ हासिल करने के लिए सबसे ज्यादा संसाधन नही बल्कि हौंसलो की जरूरत होती है"....

शुक्रवार, 11 अगस्त 2023

मौन ही रहो तो बेहतर है

मौन ही रहो तो बेहतर है...

नही तो राज खुल जाएंगे..।

राज जो खुल जाएंगे..

तो फिर किधर को जाएंगे..।।



है कुछ क्षण रेत से बचे हुए..

 है कुछ क्षण रेत से बचे हुए,

इसे अगर सही से संभाल पाया,

तो फिर से इमारत बना पाऊंगा..।




है कुछ क्षण रेत से बचे हुए,

इसे अगर सही से इस्तेमाल कर पाया,

तो उन सपनों को फिर से साकार कर पाऊंगा,

जो हमने देखे है..।


है कुछ क्षण रेत से बचे हुए..

अगर इसे सवाँर पाऊ,

तो सिर्फ अपनी ही नही कइयों की जिंदगी सवाँर पाऊंगा..।


है कुछ क्षण रेत से बचे हुए..

अगर एक भी रेत को जाया होने नही दिया..

तो इन्ही बची हुई रेत से इमारत खड़ा कर पाऊंगा..

और उन इमारतों पे सिर्फ मेरा ही नही,

लाखों लोगों का आशियाना होगा..।।


क्या इन बचे हुए रेत को भी युही जाया होने दूँ..

अगर ये जाया हुआ, तो मैं जाया हो जाऊंगा..

क्योंकि मिट्टी के घर, एक बारिश में ही धूल जाते है..

और मुझे नही धुलना...

है कुछ क्षण रेत से बचे हुए..।।

शनिवार, 8 जुलाई 2023

क्या आपको पता है..??

क्या आपको पता है..??

पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति में सबसे अहम योगदान किसका था...??जिसका था उसका आज हालत दयनीय होती जा रही है....

पृथ्वी का निर्माण लगभग 500 करोड़ साल पहले हुआ..

और 50 करोड़ साल पृथ्वी पर समुन्द्र बनने में लग गए...

लगभग 380 करोड़ साल पहले जीवन का विकास प्रारंभ हुआ..

लगभग 250-300 करोड़ साल पहले प्रकाश-संश्लेषण की प्रक्रिया शुरू हुई...

और लंबे समय तक जीवन केवल समुन्द्र में ही संभव था...

और धीरे-धीरे महासागर ऑक्सीजन से परिपूर्ण हो गया और 200 करोड़ पूर्व तक वायुमंडल में ऑक्सीजन परिपूर्ण मात्रा में हो गई... जिस कारण धरातल पर भी जीवन संभव हो पाया..

और आज जिस समुन्द्र के कारण जीवन संभव हुआ,आज उसकी हालत दयनीय होती जा रही है..।।



शुक्रवार, 7 जुलाई 2023

कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है..

 कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है..



मगर खोना कौन चाहता है..

हम सब सिर्फ पाना चाहते है,ये जानते हुए की कुछ पाने के लिए कुछ खोना होता है..।।

ये प्रकृति का नियम है...

आपको तबतक कुछ नही मिलेगा,जबतक आप उसके बदले में कुछ दे न दो...।।

आप अपने जिंदगी के किसी पल को याद कीजिये और सोचिए कि आपको अपने जीवनकाल में क्या कुछ मुफ्त में मिला है...?

अगर आपको लगता है कि मिला है,तो आप फिर से सोचिए.. अगर कुछ नही तो कम से कम आपका समय तो लगा ही होगा....।।

क्या आपको पता है..सबसे कीमती चीज क्या है..??

समय है..।।

जो समय आपके हाथ से चला जाय तो फिर हम उसे किसी भी कीमत पर खरीद नही सकते..।मगर अफसोस इस समय की हम कद्र नही करते यू ही जाया किये जा रहे है..।।

कुछ पाने के लिए,कुछ खोना पड़ता है..।।

बड़े सपने,बड़े ख्वाब, को हकीकत में बदलने के लिए,कुछ बड़ा भी तो त्याग करना होगा..आपके पास त्यागने के लिए क्या है..??

सबके पास कुछ न कुछ त्यागने के लिए होता है,मगर कुछ ही लोग में दृढ़ता,संकल्प और आत्मविश्वास होता है,त्यागने की..। जो अपनी बुराइयों को त्याग देता है,वो परम ऊंचाइयों को पा लेता है...।।

त्याग इंसान को महान बनाता है..। 

मगर क्या कुछ भी त्यागना इतना आसान है क्या... ??

हम तो अपनी बुराइयों से भी चिपके होते है,ये जानते हुए भी की ये गलत है..क्योंकि हम कुछ भी खोना नही चाहते,चाहे वो बुरा ही क्यों न हो..।।

कुछ पाने के लिए,कुछ तो खोना ही पड़ेगा...।।

निर्णय आपको करना है..

आप क्या खो कर,क्या पाना चाहते है,या फिर क्या पाकर क्या खोना चाहते ही..।।


मंगलवार, 13 जून 2023

कमियां हरेक इंसान में है..

 कमियां हरेक इंसान में होती है..उसे स्वीकार करें.. क्योंकि..

कमियां मानव का स्वाभव ही नही बल्कि ये मानव के लिए अवसर है..

अपनी कमियों को दूर कर,खुद को परिपूर्ण करना..

शायद ही कोई इंसान है जो पूर्ण है..

पूर्ण वही है,

जिसने अपनी कमियों को पहचाना और उसे दूर कर खुद को पूर्ण किया..।

मनुष्य के लिए कठिन है कि वो अपनी कमियों को स्वीकार करें.. उससे भी कठिन है अपनी कमियों को पहचान कर उसे दूर करना..

जिसने ये कर लिया..

वही जिंदगी में सफल हुआ...।।

गुरुवार, 25 मई 2023

सफलता प्रकृति की नियति है..



 ये मायने नही रखता की आप कितनी बार गिरे,

मायने ये रखता है कि आप गिरने के बाद... क्या करते है..??

गिर के गिरे रहना, 

या फिर गिर के उठना,

या फिर गिर के उठकर फिर से चलना,

या फिर गिर के उठकर,फिर से चलकर,मंजिल पर पहुंचना...।।

ये आपको ही तय करना है कि, आपको क्या करना है..??

क्योंकि आपकी मंजिल, आपका नजरिया बदल देगा..

सफल हुए तो भी,असफल हुए तब भी...

मगर सफल होना जरूरी है..क्योंकि असफल लोगों के नजरियों का कोई मायने नही है..।

क्योंकि इतिहास ही नही बल्कि वर्तमान भी सफल लोगों को ही जानता/मानता है..।

आप स्वयं भी सफल व्यक्ति को ही जानते होंगे..।।

आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते है,जो असफल है..??

नही...बिल्कुल नही.. जानते होंगे..।।

तो...क्या सोचते है...🤔???

सफल होना है या नही...??

क्योंकि...

सफलता ही प्रकृति की नियति है..

क्या आप प्रकृति के नियति के खिलाफ जाएंगे...??