शुक्रवार, 13 दिसंबर 2024

बिहार की धरती बांझ हो चुकी है...

बिहार की धरती बांझ हो चुकी है.. फिर से एक हलधर की जरूरत है ..

जो पूरे बिहार को अच्छी तरह से कुरेदकर..

इसके बांझपन को नाश करें..

फिर से एक चाणक्य की जरूरत है..

जो बिहार की जड़ता खत्म कर..

एक नया कीर्तिमान रचें..

फिर से एक शेरशाह की जरूरत है..

फिर से एक जयप्रकाश नारायण की जरूरत है..

जो पूरे देश के युवाओं के जड़ता को तोड़कर

एक आंदोलन खड़ा कर..

सक्ता पे आसीन जर हो चुके नेताओं को उखाड़ के फेंके..

बिहार की धरती बांझ हो चुकी है..

फिर से एक हलधर की जरूरत है..

जो इसके बांझपन को मिटाये...


कंहा हो तुम..

अब तुम्हारी कमी खलती है..
कंहा हो तुम..
जंहा भी हो..
अब आ जाओ..
अब तुम्हारी कमी खलती है..।।

बुधवार, 11 दिसंबर 2024

हमारे भगवान..

आपने कभी ध्यान दिया है..
हम जैसे होते जा रहे है..
वैसे ही अपने भगवान को गढ़ते जा रहे है..

आपने आज से 5-6 साल पहले तक इतना उग्र,क्रोधी भगवान का स्वरूप सोशल मीडिया पे या वॉलपेपर के रूप में नही देखा होगा..
जैसा आजकल लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पे स्टेटस लगाते है या फिर शेयर करते है..।।



अगर आपके देखने का नजरिया थोड़ा अलग है तो..आप लोगों के इस तरह के कार्य से आप उन्हें पहचान सकते है कि वो किस तरह के लोग है...।।

आज कल जिस तरह से हम Hi-tech होते जा रहे है,और समाज से कटते जा रहे है,उसी तरह से भगवान को भी hitech बनाते जा रहे है और उन्हें एकाकी बनाते जा रहे है .

पहले के पुराने भगवान को देखे वो अकेले नही दिखेंगे..
अब के फोटो देखे वो अकेले ही दिखेंगे..

पहले के भगवान के फ़ोटो में उनका स्वरूप सौम्य, और मंद मुस्कान लिए होता था,और अब के मांसल शरीर के साथ क्रोध से आंख लाल लिए..

पहले के भगवान के फोटो में प्राकृतिक परिवेश दिखता है..
अब नही दिखता..क्योंकि हम प्रकृति को नष्ट करते जा रहे है..

पहले के देवियों के तस्वीरों में उनके वस्त्र और आभूषण शालीनता लिए हुआ था..अभी के वस्त्र और आभूषण तड़क-भड़क होता जा रहा है..।।



आखिर क्यों..??
क्योंकि हम खुद ऐसे होते जा रहे है..

हम जैसे होते है..उसी तरह का स्वरूप भी भगवान का गढ़ते है..।।





शनिवार, 7 दिसंबर 2024

सपने अगर अपने हो..

कभी सपनों को मरने मत देना..
क्योंकि सपने जरूर पूरे होते है..
अगर सपने अपने हो..
जिसे आपने देखा है..
वैसे सपने जरूर पूरे होते है..।।



कभी-कभी हम
जिंदगी के भागदौड़ में 
अपने सपनों को भूल जाते है..
इसीलिए वो सपने हकीकत में तब्दील नही हो पाते..
इसीलिए सपनों को संजो के रखे..
क्योंकि सपने अगर अपने हो तो जरूर पूरा होता है..।

अगर सपनें पूरे नही होते..
उसके लिए भी हम खुद ही जिम्मेदार है..
हर अपराध के लिए हम स्वयं ही कसूरवार है..।
ये आरोप प्रत्यारोप का समय नहीं..
बल्कि एकबार फिर से बिखरे हुए सपनों को समेटकर..
उसे पूरे करना का समय है..।।

अगर सपने अपने हो तो वो जरूर पूरे होते है..
अगर पूरे नही होते है..
तो एकबार फिर से सबकुछ दांव पे लगा कर पूरा करने का प्रयत्न करें..
क्योंकि सपने अगर अपने हो तो वो जरूर पूरा होते है..।

शुक्रवार, 6 दिसंबर 2024

हमारे हिस्से की लड़ाई..

कभी-कभी हमारे हिस्से की लड़ाई दूसरे भी लड़ रहे होते है..
और हमें पता नही चलता..
कभी सोचा है इसके बारे में..
उस और हमारा कभी ध्यान ही नही जाता..


हमें लगता है,
हमें खुद ही अपने हिस्से की लड़ाई लड़नी होती है..
मगर ऐसा नही है..
कुछ लोग और भी होते है,जो आपके हिस्से की लड़ाई लड़ रहे होते है..
या तो वो कभी दिखते है,या फिर नही दिखते..
या फिर हमें ताउम्र समझ मे ही नही आता..
और हम गलतफहमी पाल लाते है कि ये सब कुछ हमने ही किया है..।।
इसीलिये जब सफल हो..
तो अपने अंदर कृतिज्ञता का भाव जरूर रखें..
अगर हो सकें तो किसी जरूरतमंद के हवनकुंड(जीवन) मे अक्षत की आहुति कम-से-कम जरूर दे..
मगर अफसोस ये शौभाग्य सब को नही मिलता..
कुछ को अगर मिलता भी है तो वो उसका सदुपयोग नही कर पाते..
और कुछ लोग नए कीर्तिमान रच देते है..।।

कंहा से शुरुआत करू...
चलिए शुरू से ही शुरुआत करते है...
अगर हमारे पूर्वज खड़े होने के लिए असहनीय पीड़ा नही सहे होते तो शायद आज हम मानव समुदाय पे कोई और राज 
करता..जरा कल्पना कीजिये..
अगर हड़प्पा काल में हमारे पूर्वज उतना उन्नतशील नही होते तो आज हमें ये गुमान नही होता कि ये सबसे उन्नत और सबसे बड़ी सभ्यता थी..
अगर वैदिक काल मे हमारे ऋषियो ने वेद की ऋचा नही रची होती..तो आज हम गुमान नही करते..
अगर महाजनपद काल मे बिम्बिसार,घनानंद,अशोक,नही होता तो दुनिया का सबसे बड़ा मगध साम्राज्य नही बनता..
अगर गुप्त काल उन्नतशील नही होता तो विश्व की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी नालंदा नही होती..और वराहमिहिर, आर्यभट, कालिदास, धन्वंतरि इत्यादि जैसे विद्वान नही होते..।
अगर हमारे पूर्वज एकजुट हुए होते तो मध्यकाल में मुस्लिम आक्रांता हमपे राज नही करते..अगर वो दक्षिण भारत विजय कर लेते तो..तो स्थापत्यकला की ऊंचाइयों को छूने वाला मंदिर ना होता
अगर मुगलकाल सुदृढ़ नही होता तो कुछ ऐतिहासिक इमारत का निर्माण नही होता,अगर वो कमजोर ना होते तो अंग्रेज हमपे राज ना करते..
अगर हमारे क्रांतिकारी नेता अपना बलिदान नही देते तो आजादी की आवाज घर-घर मे बुलंद नही होता..अगर गांधी,नेहरू,बोस,पटेल,अंबेडकर, आजाद,भगत, बिस्मिल्लाह कितनों का नाम लू अगर ये ना होते तो भारत शायद ऐसा न होता..
अगर आज हम यंहा है..और मनुष्य या भारतीय होने पे नाज कर रहे है..
तो इसके पीछे लंबा संघर्ष चला है और ये चल रहा है...
●हम अभी जिस अवस्था मे है इसके पीछे भी लंबा संघर्ष चला है...
हम कल्पना भी नही कर सकते..
हमारे एकल सेल(स्पर्म) को करोड़ों सेल से संघर्ष करके
अंडाशय तक कि यात्रा करनी पड़ी है..
फिर 9 महीने तक हमारी माँ को संघर्ष करना पड़ा है..
फिर जन्म लेते ही..आपके साथ-साथ कइयों का संघर्ष चालू हो गया है..
और ये संघर्ष अभी भी चालू है..और अनवरत चालू रहेगा..


इसीलिए जब भी आप जीवन मे संघर्ष कर रहे हो..
तो जान लीजिए कुछ और लोग भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से आपके साथ संघर्ष कर रहे है..और आपको भी बेहतर दुनिया के लिए संघर्ष करना है..

इसीलिए उदास मत होइए..
बल्कि अपने संघर्ष को अपना कवच बना कर सफलता का पताका फहराइये..।।



सोमवार, 2 दिसंबर 2024

माफ करना जरूरी क्यों है

क्या आप किसी ने नाराज़ हैं, क्योंकि उसने आपके साथ कुछ बुरा किया था और क्या आपको लगता है कि वह माफ़ी का अधिकारी नहीं है?

कितनी हास्यास्पद बात है कि हममें से अधिकांश लोग ये मानते हैं कि यदि हम किसी को माफ़ नहीं करेंगे तो उसे कष्ट होगा, जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। यदि हम किसी को माफ़ नहीं करते तो कष्ट हमें ही होता है।



किसी के आपके साथ बुरा करने पर उसे माफ़ न करना आपको दुःख के एक लंबे रास्ते पर ले जाएगा और उस पूरी यात्रा में आपको पता भी नहीं चलेगा कि आपके दिमाग़ में कितने नकारात्मक विचार घूम रहे हैं, और आपको कमज़ोर, उलझा हुआ एवं निराश बनाते जा रहे हैं।

जब हम किसी को क्षमा नहीं करते तो हम उसके जैसे बनने लगते हैं। जितनी अधिक नफ़रत हम उससे करते हैं, उतना ही अधिक हम उसके जैसे बनते जाते हैं। हमें पता भी नहीं चलता कि कब हम ख़ुद को एक क्षुब्ध, असभ्य और हृदयहीन व्यक्ति के रूप में बदल लेते हैं।

अतः हमेशा याद रखें- माफ़ी वास्तव में, माफ़ कर देने वाले के लिए होती है!

(ये लेख स्नेह देसाई द्वारा लिखित है,जो "अहा जिंदगी" पत्रिका में प्रकाशित हुई थी..)


रविवार, 1 दिसंबर 2024

आप खुद से कितना प्यार करते है..

आपने आखरी बार आयने में खुद को कब देखा था..??
कैसा बेतुकी सवाल है..आपको लग रहा होगा..
मगर मैं, फिर पूछता हूँ आपने आखरी बार खुद को आयने में कब देखा था..??


शायद आपको याद नही हो,या फिर आप अभी भी मेरे सवाल को समझ नही पा रहें होंगे..
चलिए प्रश्न को आसान करते है..
आपने आयने के सामने खुद को देखकर कब मुस्कुराया था..??
और अपने खूबसूरती पे नाज किया था..
थोड़ा याद करें..।।
अगर नही याद आ रहा है तो आप गंभीर स्वास्थ्य समस्या से घिरे होंगे,या घिरने वाले है..
इसीलिए आज से ही आयने में खुद को देखकर मुस्कुराना शुरू कीजिए..

हाल ही में,
मैं लसेन्ट द्वारा प्रकाशित हेल्थ रिपोर्ट पढ़ रहा था..
(Global burdens disease study 1990-2021)

जो मैं यंहा बताने जा रहा हूँ...
आपको जानकर हैरानी होगी कि जितना भी क्रोनिक(खतरनाक) बीमारी है,वो महिला के अपेक्षा पुरुषों में ज्यादा होता है..
कुछ आंकड़ो से समझते है..

• समय से पहले मृत्यु, महिला के अपेक्षा पुरुषों की ज्यादा होती है।
वैश्विक स्तर पर COVID-19 से महिला के अपेक्षा पुरुषों की मृत्यु 45% ज्यादा हुआ..

इसी तरह हृदय (heart) से जुड़े रोगों से मरने वालों पुरुषों की संख्या महिला से 45% ज्यादा थी,जबकि ये यूरोपियन देशों में 49% तक देखा गया..।

वंही मानसिक समस्या से जुड़ा मामला, वैश्विक स्तर पर महिला से ज्यादा पुरुषों में 35% ज्यादा देखा गया।
(गरीब देश मे ये मामला ~50% तक ज्यादा है)

वंही डाइबिटीज के मामले में 1990 के दशक में 1 लाख पर पुरुषों की संख्या महिलाओ से 56 अधिक हुआ करता था,जो  2021 तक बढ़कर 147 हो गया है..।

इसी तरह कैंसर,किडनी,अर्थराइटिस, बैक पैन की समस्या भी महिला के अपेक्षा पुरुषों में ज्यादा है..।।

https://www.healthdata.org/news-events/newsroom/news-releases/lancet-public-health-global-study-reveals-stark-differences

इस रिपोर्ट में अलग-अलग कारण बताए गए है..
मगर आपके अनुसार ऐसा क्यों हो सकता है...
फिर से मैं,वहीं सवाल पूछता हूँ,आपने आखरी बार आयने के सामने कब मुशकुराया था..
सवाल मैं ही जबाब है..

महिलाओं के साथ अच्छी बात ये है कि वो सजने सवरने के लिए आयने के सामने खड़ी होती है,इस सिलसिले में कभी-कभी चेहरे पे मुस्कान आ जाती होगी,और सारा बोझ उत्तर जाता होगा..

मगर हम पुरुषों के साथ ऐसा नही होता,हम तो बाल भी इसलिए छोटा रखते है कि संवारने का झंझट न रहे..
यंही गलती कर जाते है..

कुछ समय निकालिये खुद से प्यार करने के लिए..
क्योंकि जब हम खुद से प्यार करने लगते है,तो सिर्फ बीमारियां ही नही हरेक समस्या खुद-ब-खुद दूर भागने लगती है..।।

विश्वास नही होता..
आयने के सामने जाइये और खुद को देखिए..

मैं जानता हूँ..
अभी भी आयने के सामने में खुद को देखने की जहमत बहुत लोग नही उठा पाएंगे..
आप उनमे से तो नही..
प्लीज उठिए और खुद को आयने में देखिए...
और एक बेहतर भविष्य का निर्माण कीजिये..।।




Yoga for digestive system