मंगलवार, 30 सितंबर 2025

दुर्गा पूजा और कन्या भोज

अभी नवरात्रा चल रहा है,और आज अष्टमी है और महागौरी का पूजन है..
 "श्वेत वृषे समारुढा स्वेताम्बरधरा शुचिः
  महागौरी शुभं दद्दानमहादेवप्रमोददा ।

नवरात्र(दुर्गापूजा) से अनेक यादें बचपन की जुड़ी हुई है..
इनमें से एक यादें जो ज्यादा पुरानी नही है,मगर आज छोटे-छोटे कन्याओं को भोजन करके आते हुए देखते हुए सहसा वो सवाल मन में जागा,जो उस समय जागा..।(नवरात्र में कन्याओं को भोजन कराया जाता है,नवदुर्गा का स्वरूप मान के)

चलिए वो वृतांत सुनाता हूँ..
5-6 छोटी-छोटी लड़कियां(इन सब की उम्र 5-10 के बीच मे था) एक जगह खड़ी थी..
इनमें से जो सबसे बड़ी थी..वो सहसा एक छोटी लड़की से बोलती है- तू भी आ गई..वो छोटी लड़की जबाब देती है,ऑन्टी ने सबको बोला था आने को..।
बड़ी वाली लड़की उधेड़बुन में थी और सभी एक जगह ठिठक सी गई थी..।
फिर कुछ सोचने के बाद बड़ी वाली लड़की ने कहा अच्छा ठीक है चलो..और सबको हिदायत दी कि, इसके बारे में कोई नही बताएगा..(क्या नही बताएगा..??)

कुछ घन्टों के बाद वापस में भी घर की और आ रहा था,और ये लोग भी कन्या भोज खाकर वापस आ रही थी..
सभी खुश थे,सभी के हाथ मे कुछ-न-कुछ था,किसी के हाथ मे खिलौने तो किसी के हाथ मे कॉपियां.. सबके चेहरे पे खुशी था..।
मगर एक सवाल मेरे जेहन में था की..
आखिर कोई, क्या नही बताएगा..??
मैं इस सवाल को जानने का इच्छुक नही था..
मगर ये सब जिस और जा रहे थे,उस और में भी जा रहा था..
(अजीब है ना..हमारे गाँव मे हरेक कोई हरेक चेहरा को पहचानता है,अगर कोई नया चेहरा दिखे ,तो हम एक-दूसरे से पूछते है..आखिर ये कौन है..?? मगर शहरों में आपके बगल में कौन रहता है..हम ये नही जानते..??)
अचानक उस समूह में से एक छोटी लड़की दौड़ी...और माँ कहकर चिल्लाई..और माँ ने मुस्कुराते हुए गले से लगा लिया..
मेरे जेहन में जो कुछ घंटे पहले सवाल था,उसका जबाब मिल गया था..
आखिर क्यों बड़ी वाली लड़की ने उस छोटी लड़की से सवाल किया था..की तुम भी आ गई..??
दरसल वो छोटी लड़की मुस्लिम थी..😊

मेरे सवाल का जबाब भी मिला,और न जाने एक आत्मिक आनंद की अनुभूति महसूस हुई..।।

भारत का हरेक नागरिक पहले भारतीय है..
और हरेक भारतीय सनातनी है..।
चाहे हमारा जाति और धर्म कुछ और क्यों न हो..।

मैं कंहा था..मैं कंहा हूँ

मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..??
मेरे क्या सपने थे..अब कोई सपने नही..
पहले क्या होंसला था,अब कोई हौंसला नही..
पहले क्या-क्या इच्छायें था,अब कोई नही..।।

मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..
जिंदगी के दौड़ में आगे बढ़ने के बजाय..
जैसे में पीछे ही आ रहा हूँ,या फिर थम सा गया हूँ..।।
अगर खुद से पुछु..
क्या है मेरी उपलब्धियां..??
तो जबाब देना बड़ा आसान है..
क्योंकि कोई उपलब्धियां ही नही है..।।

मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..
सच कहूं तो.. 
पहले भी मैं कंही नही था..
मगर मेरे कुछ सपने थे,कुछ आंकाक्षायें थे..
अब कुछ भी नही..
एक दुष्चक्र में फंसा हुआ हूँ..
उसी में चक्कर काट रहा हूँ..

मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..??


सोमवार, 29 सितंबर 2025

विश्व हृदय दिवस..

आज कौन सा दिवस है..??
हमें क्या..विश्व के 95% से ज्यादा आबादी को पता नही होगा..की आज कौन सा दिवस है..??
मगर हरेक लोग के घर में,कोई न कोई इस रोग से जुड़े होंगे..

हां आज "विश्व हृदय❤️दिवस" है..और हम हरेक साल 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाते है..इसकी शुरुआत 2000 में 'वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन'(WHF) द्वारा किया गया..लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए..।


हरेक साल विश्व मे ~6.4 करोड़ लोग हृदय 🖤रोग के शिकार होते है..और हर मिनेट विश्व मे 38 लोग इसके शिकार होते है जिस कारण हर तीसरा मौत इसके कारण होता है..।

आखिर हृदय❤️ संबंधित बीमारी क्यों होता है..??
हाई ब्लड प्रेशर,खराब डाइट,लंबे समय तक बैठना,स्मोकिंग,लंबे समय तक तनाव, डाइबिटीज & मोटापा, कम नींद लेना..ये प्रमुख कारण है..।

इसका ❤️ख्याल कैसे रखें..
हेल्थी डाइट, व्यायाम, स्ट्रेस मैनेजमेंट और भरपूर नींद, वजन कंट्रोल, नो स्मोकिंग..

❤️हमारे दिल से 96 हज़ार किलोमीटर लंबी ब्लड वेसल्स जुड़ी होती है..ये पूरे शरीर से खून इकट्ठा करता है और ऑक्ससीजेनेटेड खून पूरे शरीर तक पहुचाता है.. एक इंसान की ब्लड वेसल्स से पृथ्वी को 2 बार लपेट सकते है..


खेल,क्रिकेट,मीडिया और राजनीति...

क्या आपको पता है..भारत का राष्ट्रीय खेल कौन सा है..?? शायद पता होगा..बचपन में कभी न कभी..तो जरूर पढ़ा होगा..मगर ज्यों-ज्यों होश संभाला होगा त्यों-त्यों उसे भूल गए होंगे..??

अगर आपसे खेल का नाम पुछु तो आप, कम-से-कम 10-20 खेल का नाम तो जरूर बता पाएंगे..

अगर उनमें से कितना खेल खेलना आता है,ये पुछु..तो आप कम-से-कम 1-2 गेम का नाम जरूर बता देंगे..

अगर कोई खेल खेलने के लिए कहा जाए.. तो आप किसी आउटडोर गेम में से,आप सर्वप्रथम क्रिकेट को चुनेंगे...(ये बात महिला खिलाड़ी पे भी लागू होता है,बस उसे खेलने का मौका मिले तो वो सर्वप्रथम क्रिकेट ही चुनेंगे)

आखिर क्यों..क्रिकेट को चुना जाएगा..??

क्योंकि क्रिकेट पे कुल खेल बजट का 80% खर्च किया जाता है,मीडिया का 95% कवरेज सिर्फ क्रिकेट पे होता है..और 100% राजनीति भी सिर्फ क्रिकेट पे होता है..

क्रिकेट को इसलिय चुना जाएगा..

क्योंकि यंहा पैसा,शोहरत,राजनीति सबकुछ है..मगर अन्य खेल में तीनों में से कोई चीज नही है... भारत मे 90% मैदान सिर्फ और सिर्फ क्रिकेट के लिए रिजर्व है..अन्य खेल के लिए मैदान तक नही है..तो अन्य संसाधनों की बात तो छोड़िए..

मीडिया का अन्य खेल से बेरुखी...क्रिकेट से इनको इतना लगाव है कि खिलाड़ी किस ब्रांड की घड़ी और चढ़ी पहनते है,यंहा तक कि खबर रखते है..मगर किसी अंतरराष्ट्रीय खेल का इवेंट भारत में हो रहा है,इसका खबर तक नही रखते..

आज हरेक के जुबान पर एशिया कप(2025)..का नाम है...क्या आपको पता है... भारत ने एशिया कप(2025) में साउथ कोरिया को फाइनल में हराया..??


आपको लग रहा होगा कि मैं क्या बात कर रहा हूँ..हां मैं सही कह रहा हूँ..हॉकी एशिया कप में भारत ने दक्षिण कोरिया को हराया..4-1 से..।

पता है ये इवेंट कंहा हुआ था..??बिहार के राजगीर में...।एक बात और पता है...?? इस इवेंट में पाकिस्तान ने भाग नही लिया था...क्या..हां पाकिस्तान ने बायकॉट किया था..ये कहकर की भारत ने पाकिस्तान पर हमला किया है,इसलिय हम भारत मे सुरक्षित महसूस नही करेंगे..।।

मगर अफसोस न इसपे राजनीति हुई और न ही मीडिया की कवरेज और न ही लोगों तक खबर पहुंची..

भारत की 90% आबादी को तो ये भी पता नही होगा..की हरमनप्रीत सिंह कौन है..??

मगर भारत के 90% लोगों को वैभव सूर्यवंशी की उम्र,हार्दिक पांड्या का हेयर का रंग तक पता होगा...आखिर क्यों..??

जब हम कल फाइनल क्रिकेट मैच देख रहे थे..


उसी दिन दिल्ली में "विश्व पैरा एथलेटिक्स" में शैलेश और वरुण ने  हाई जम्प में गोल्ड और कांस्य पदक जीता..।।


एक पैरा एथलेटिक्स की जिंदगी अपने आप मे सराहनीय है,ऊपर से जब आप खेलते हो,और पदक जीतते हो तब आप और प्रसंशानीय हो जाते है..आपका जीवन उन लाखों निराश लोगों के जिंदगी में प्रेरणा का काम कर सकता है..मगर इनकी सारी उपलब्धियां स्वयं तक ही रह जाती है..क्योंकि मीडिया को TRP से मतलब है..ऐसे खबर से नही जो जिंदगी को बदल सके..बल्कि ऐसे खबरों से है.. जो आपके जिंदगी में आक्रोश,नीरसता और घृणा पैदा करें...

आपने न्यूज़ देखा है..कभी गौर से देखियेगा..वो क्या दिखाते है..सच कहता हूँ, आप न्यूज़ चैनल उस नजरिये से तो नही देखेंगे,जिस नजरिये से कल तक देख रहे है..।।

अन्य खेल में भारत के लोगों की अभिरुचि क्यों नही है..??

ऐसा नही है कि अभिरुचि नही है..बल्कि वो चीज उन तक पहुंच ही नही पाता..पैसा,मीडिया,TRP, राजनीति सबकुछ क्रिकेट के पास है..जबतक इसे अभिकेंद्रित नही किया जाएगा तबतक भारत मे अन्य खेलों का उत्थान नही हो पायेगा..।।



शनिवार, 27 सितंबर 2025

अधूरे सपने..

अधूरे सपनों के साथ जीना,कितना दूभर है..
ये कौन जानता है..??
ये वही जानता है..
जो अधूरे सपनों के साथ जी रहा है..
हरपल कुरेदता है स्वयं को,
हरपल कोसता है स्वयं को..
काश थोड़ा और मेहनत कर लेता,
या फिर एक और मौका मिल जाता..
तो शायद कहानी कुछ और होता..।।


अधूरे सपनों के साथ जीना,कितना दूभर है..
ये कौन जानता है..??
ये वही जानता है..
जो अधूरे सपनों के साथ जी रहा है..।।

गुरुवार, 25 सितंबर 2025

सर्किल ऑफ हैबिट..

प्रकृति और हमारे जिंदगी में सर्किल(वृत,चक्र) का महत्वपूर्ण योगदान है..
हमारे आसपास जितने भी चीज है,उसमें से अधिकांश चीजें सर्किल के रूप में ही है,या फिर उसका स्वरूप कैसा भी हो उसका अंत एक सर्किल में ही होता है..।।

मगर हम आज सर्किल पे बात नही, बल्कि आदतों का चक्र(circle of habit) पर बात करेंगे..।।
हममें से हरेक लोग आदतों से घिरे हुए है,अच्छी और बुरी दोनों आदतों से..।

कुछ आदतें जिंदगी का हिस्सा बन जाते है...खासकर अच्छी आदतें..ये आदतें स्वयं को तो परेशान नही करता,मगर हो सकता है,इन आदतों के वजह से दूसरे परेशान हो😊..।
जैसे सुबह उठना, प्राथना करना,स्वछता, स्वध्याय,अनुशासन इत्यादि..
ये आदतें स्वयं को अच्छा लगता है,इसलिय ये बोझ नही लगता..।।

वंही कुछ आदतें बोझ बन जाती है..??
आखिर क्यों..??
क्योंकि उन आदतों को हम स्वयं भी गलत मानते है..
इसलिय ये आदत बोझ बन जाती है..।
जैसे :-धुम्रपान,मद्यपान,आलस्य,क्रोध इत्यादि..।

हममें से 99.9% लोग जानते है,कि ये गलत है..और इनमें से अधिकांश लोग स्वयं या परिवार के कारण इन आदतों को छोड़ना चाहते है..
अधिकांश लोग कभी-न-कभी इसे छोड़ना चाहते है,मगर इसे कम ही लोग छोड़ पाते है..
आखिर क्यों..??
क्योंकि हममें से 99% आदतों के सर्किल में फंसे हुए है..
और उन्हें पता ही नही है कि कंहा से निकलने है..??

तो फिर क्या करें..??

सबसे पहले हमें अपने सर्किल के बिंदु(point) को पहचानना होगा..की मेरे आदतों का सर्किल कितना बड़ा है..
हमारे आदत जितने पुराने होंगे उतना ही बड़ा सर्किल होगा..

इसके लिए हमें अपने अतीत में जाना होगा..क्योंकि वो बिंदु का पता अतीत से ही चलेगा जंहा से सर्किल बनना शुरू हुआ था..
और खुद से सवाल पूछना होगा..आखिर इसकी शुरुआत हमने क्यों,और किस परिस्थितियों में किया था..??

क्या अब भी वो परिस्थिति है,या उस जैसी परिस्थिति है..।
अगर हां, तो आप उसी बिंदु पे है,जंहा से आपने इन आदतों की शुरुआत किया था..आपके पास सुनहरा मौका है,इन आदतों के चक्र से निकलने का..।

अगर उस जैसी परिस्थितियां अभी नही है,तो आप उस चक्र से अभी निकल तो जाएंगे,मगर कुछ दिनों के बाद आप फिर से उस चक्र के परिधि में आ जाएंगे..और ये चक्र निरंतर चलता रहेगा, और दिन-प्रतिदिन बड़ा होता जायेगा..।।

हममें से कुछ लोग होते है,जो अपने दृढनिश्चय और आत्मविश्वास के बूते इस सर्किल से निर्णय लेते ही निकल जाते है..
इसके लिए इतनी शक्ति चाहिए होती है,जितना पृथ्वी के कक्ष से किसी वस्तु को बाहर जाने के लिए..।
जो वस्तु(उपग्रह) पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल से निकल नही पाते है,उसका क्या हश्र होता है..कभी-कभी हम में से कुछ मनुष्य का भी यही हश्र होता है..।।

इसलिए अपने आदतों के चक्र से छुटकारा पाने के लिए हमें उन जैसे परिस्थितियों को ढूंढ़ना होगा,जिन परिस्थितियों में हमने इसकी शुरुआत किया था..
अन्यथा इस चक्र से निकलना बड़ा दूभर है..।।

बुधवार, 24 सितंबर 2025

रेलवे स्टेशन और बुक स्टॉल..

आपने आखरी बार रेल से कब सफर किया था..??

आपने आखरी बार रेल में किताब या अखबार कब पढ़ा था..??

आपने आखरी बार रेलवे स्टेशन पर बुक स्टॉल कब देखा था..??

आपने आखरी बार रेलवे स्टेशन के बुक स्टॉल से बुक कब खरीदा था..??

मैं पूरी उम्मीद के साथ कह सकता हूँ कि,आपको बिल्कुल याद नही होगा कि ,आपने कब रेल सफर के दौरान बुक पढ़ा या बुक स्टॉल देखा..।।

इसमें कोई ताज्जुब की बात नही है,क्योंकि दिनप्रतिदिन हमारी पढ़ने की क्षमता कम होता जा रहा है..इसलिय आप अफसोस न करें कि आपने रेल सफर मोबाइल देख के बिताया..।।

मगर अफसोस हमारे किताब पढ़ने की दूरियां के वजह से रेलवे स्टेशन का बुक स्टॉल गायब होता जा रहा है..
मुझे फोन बूथ की याद आती है..जो अब लुप्त हो चुका है..
कंही ऐसा ना हो कि बुक स्टॉल भी रेलवे स्टेशन से गायब हो जाये..।।
पहले कोई भी व्यक्ति सफर के दौरन कुछ-न-कुछ पढ़ने के लिए खरीदता ही था,भले ही वो पढ़े ना,पेज ही पलटे मगर खरीदता जरूर था..
मगर आज..हममें से कितने लोग है जो रेलवे सफर के दौरान बुक/पत्रिका खरीदते है..शायद न के बराबर..।।
इसलिय तो भारत के 60% स्टेशन से बुक स्टॉल गायब हो चुके है..।।

अगर आप जब भी सफर करें तो एक बुक या पत्रिका जरूर खरीदे,शायद आपके खरीदने से वो बुक स्टॉल एक दिन और बंद होने से बच जाए..।।

पता है बुक पढ़ने के क्या-क्या फायदे है..??

Yoga for digestive system