मेरे क्या सपने थे..अब कोई सपने नही..
पहले क्या होंसला था,अब कोई हौंसला नही..
पहले क्या-क्या इच्छायें था,अब कोई नही..।।
मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..
जिंदगी के दौड़ में आगे बढ़ने के बजाय..
जैसे में पीछे ही आ रहा हूँ,या फिर थम सा गया हूँ..।।
अगर खुद से पुछु..
क्या है मेरी उपलब्धियां..??
तो जबाब देना बड़ा आसान है..
क्योंकि कोई उपलब्धियां ही नही है..।।
मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..
सच कहूं तो..
पहले भी मैं कंही नही था..
मगर मेरे कुछ सपने थे,कुछ आंकाक्षायें थे..
अब कुछ भी नही..
एक दुष्चक्र में फंसा हुआ हूँ..
उसी में चक्कर काट रहा हूँ..
मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..??

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