क्या आपको पता है..भारत का राष्ट्रीय खेल कौन सा है..?? शायद पता होगा..बचपन में कभी न कभी..तो जरूर पढ़ा होगा..मगर ज्यों-ज्यों होश संभाला होगा त्यों-त्यों उसे भूल गए होंगे..??
अगर आपसे खेल का नाम पुछु तो आप, कम-से-कम 10-20 खेल का नाम तो जरूर बता पाएंगे..
अगर उनमें से कितना खेल खेलना आता है,ये पुछु..तो आप कम-से-कम 1-2 गेम का नाम जरूर बता देंगे..
अगर कोई खेल खेलने के लिए कहा जाए.. तो आप किसी आउटडोर गेम में से,आप सर्वप्रथम क्रिकेट को चुनेंगे...(ये बात महिला खिलाड़ी पे भी लागू होता है,बस उसे खेलने का मौका मिले तो वो सर्वप्रथम क्रिकेट ही चुनेंगे)
आखिर क्यों..क्रिकेट को चुना जाएगा..??
क्योंकि क्रिकेट पे कुल खेल बजट का 80% खर्च किया जाता है,मीडिया का 95% कवरेज सिर्फ क्रिकेट पे होता है..और 100% राजनीति भी सिर्फ क्रिकेट पे होता है..
क्रिकेट को इसलिय चुना जाएगा..
क्योंकि यंहा पैसा,शोहरत,राजनीति सबकुछ है..मगर अन्य खेल में तीनों में से कोई चीज नही है... भारत मे 90% मैदान सिर्फ और सिर्फ क्रिकेट के लिए रिजर्व है..अन्य खेल के लिए मैदान तक नही है..तो अन्य संसाधनों की बात तो छोड़िए..
मीडिया का अन्य खेल से बेरुखी...क्रिकेट से इनको इतना लगाव है कि खिलाड़ी किस ब्रांड की घड़ी और चढ़ी पहनते है,यंहा तक कि खबर रखते है..मगर किसी अंतरराष्ट्रीय खेल का इवेंट भारत में हो रहा है,इसका खबर तक नही रखते..
आज हरेक के जुबान पर एशिया कप(2025)..का नाम है...क्या आपको पता है... भारत ने एशिया कप(2025) में साउथ कोरिया को फाइनल में हराया..??
आपको लग रहा होगा कि मैं क्या बात कर रहा हूँ..हां मैं सही कह रहा हूँ..हॉकी एशिया कप में भारत ने दक्षिण कोरिया को हराया..4-1 से..।
पता है ये इवेंट कंहा हुआ था..??बिहार के राजगीर में...।एक बात और पता है...?? इस इवेंट में पाकिस्तान ने भाग नही लिया था...क्या..हां पाकिस्तान ने बायकॉट किया था..ये कहकर की भारत ने पाकिस्तान पर हमला किया है,इसलिय हम भारत मे सुरक्षित महसूस नही करेंगे..।।
मगर अफसोस न इसपे राजनीति हुई और न ही मीडिया की कवरेज और न ही लोगों तक खबर पहुंची..
भारत की 90% आबादी को तो ये भी पता नही होगा..की हरमनप्रीत सिंह कौन है..??
मगर भारत के 90% लोगों को वैभव सूर्यवंशी की उम्र,हार्दिक पांड्या का हेयर का रंग तक पता होगा...आखिर क्यों..??
जब हम कल फाइनल क्रिकेट मैच देख रहे थे..
उसी दिन दिल्ली में "विश्व पैरा एथलेटिक्स" में शैलेश और वरुण ने हाई जम्प में गोल्ड और कांस्य पदक जीता..।।
एक पैरा एथलेटिक्स की जिंदगी अपने आप मे सराहनीय है,ऊपर से जब आप खेलते हो,और पदक जीतते हो तब आप और प्रसंशानीय हो जाते है..आपका जीवन उन लाखों निराश लोगों के जिंदगी में प्रेरणा का काम कर सकता है..मगर इनकी सारी उपलब्धियां स्वयं तक ही रह जाती है..क्योंकि मीडिया को TRP से मतलब है..ऐसे खबर से नही जो जिंदगी को बदल सके..बल्कि ऐसे खबरों से है.. जो आपके जिंदगी में आक्रोश,नीरसता और घृणा पैदा करें...
आपने न्यूज़ देखा है..कभी गौर से देखियेगा..वो क्या दिखाते है..सच कहता हूँ, आप न्यूज़ चैनल उस नजरिये से तो नही देखेंगे,जिस नजरिये से कल तक देख रहे है..।।
अन्य खेल में भारत के लोगों की अभिरुचि क्यों नही है..??
ऐसा नही है कि अभिरुचि नही है..बल्कि वो चीज उन तक पहुंच ही नही पाता..पैसा,मीडिया,TRP, राजनीति सबकुछ क्रिकेट के पास है..जबतक इसे अभिकेंद्रित नही किया जाएगा तबतक भारत मे अन्य खेलों का उत्थान नही हो पायेगा..।।



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