शनिवार, 27 सितंबर 2025

अधूरे सपने..

अधूरे सपनों के साथ जीना,कितना दूभर है..
ये कौन जानता है..??
ये वही जानता है..
जो अधूरे सपनों के साथ जी रहा है..
हरपल कुरेदता है स्वयं को,
हरपल कोसता है स्वयं को..
काश थोड़ा और मेहनत कर लेता,
या फिर एक और मौका मिल जाता..
तो शायद कहानी कुछ और होता..।।


अधूरे सपनों के साथ जीना,कितना दूभर है..
ये कौन जानता है..??
ये वही जानता है..
जो अधूरे सपनों के साथ जी रहा है..।।

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हे कृष्ण..