आपने कभी सोचा है...
लोग बुरे क्यों होते है..??
क्योंकि उनके साथ बुरा होता है..
एक बार नही,दो बार नही,तीन बार नही..बल्कि बार-बार बुरा होता है..
इसलिए शायद वो बुरे बन जाते हो...।
बुरे लोगों की परिभाषा क्या है..??
वैसे कोई परिभाषा नही है,मगर जो अपने आचरण से दूसरों को मानसिक,शारीरिक,सामाजिक और आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाए ऐसे लोगों को प्रायः बुरा माना जाता है..।
इस परिभाषा के अनुसार हमलोग भी कंही-न-कंही बुरे लोग ही है..।
हम भी जाने-अनजाने में,किसी-न-किसी को, हरेक रोज मानसिक,शारिरिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाते ही हैं,और कमाल देखिए इसका पता तक नही चलता..।
पता है इसकी शुरुआत कंहा से होती है..??
इसकी शुरुआत हमारे घर से ही होती है..
आज तो ये और बढ़ गया है..हरेक रोज किसी-न-किसी चीज के लिए हम झल्लाते है,और अपने बड़े पे नही बोल पाते है तो अपने छोटे पे गुस्सा निकालते है..ये हरेक घर की कहानी है..।
पापा ने बात कहा तो अपनी भड़ास अपने छोटे भाई-बहन पर उतार देते है..
अगर शादी हो गई है,तो परिवार की भड़ास पत्नी पे उतर जाती है,और पत्नी की पति पर उतर जाता है..।
घर से बाहर समाज मे जाए तो हरेक रोज, कोई हमपे फब्तियां कसता है,तो हम किसी और पर फब्तियां कसते है..और ये सिलसिला निरंतर चलता ही रहता है..।
इसी तरह नॉकरी,व्यवसाय में आगे बढ़ने के लिए एक-दूसरे का पाँव खींचने में हममें से कई लोग निरंतर लगे रहते है..।
तो कई लोग खुलेआम हुड़दंग मचाते और लड़ाई-पीट करते मिल जाएगा..।
और ये सिलसिला चलता ही रहता है..
कभी हम इनमें से किसी का हिस्सा बनते है,तो कभी कोई और इसका हिस्सा बनता है..।।
और इस तरह से बुराई का दौड़ चलता रहता है..।
क्या दुनिया इतनी बुरी है..??
बिल्कुल नही..।
बुराई काले बादल की तरह है,जो अच्छाई को ढके रहता है..
और एक वक्त के बाद,बादल छट जाते है,और अच्छाई की रोशनी चारों तरफ फैल जाती है..।।
हमसब जितने बुरे है,उससे कंही ज्यादा अच्छे है..,😊
मगर अफसोस हम अपनी अच्छाइयों को खुद पे हावी नही होने देते है..।
आप अपने आसपास देखे..आपको सबसे ज्यादा गुस्सा किस पे आता है,या फिर आपके आसपास ऐसा कौन है,जिसपे आपको गुस्सा आता है..??
शायद एक या दो चेहरे सामने आ गए होंगे..
आपने कभी सोचा है..आखिर क्यों,उनका व्यवहार ऐसा है..
उनके जिंदगी में झांकने की कोशिश कीजिये..
सच कहता हूं,अगली बार से वो बुरे नही लगेंगे..।।
हम सब अच्छे और बुरे का मिक्स्चर है..
परिस्थितियों के अनुसार हम कभी अच्छे तो कभी बुरे बन जाते है..।
बिल्कुल पेंडुलम की तरह..।
इसीलिए आप जैसे हो,वैसे ही रहो,बदलने की जरूरत नही है..
अगर बदलना हो,तो अपनी गंदी आदतों,और अपनी बुराइयों को बदलों..
जो आपको नुकसान पहुंचा रहा है,क्योंकि इन्हें सिर्फ आप ही देख सकते है।
अब आप बताइए..
क्या सच में लोग बुरे होते है..??
नहीं, हरेक चीज के लिए परिस्थितियाँ जिम्मेदार होता है,और हम दूसरों के परिस्थितियों से अनभिज्ञ होते है,इसलिये उन्हें बुरा मान बैठ लेते है..।।
कबीर दास जी कहते है-
"बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोई,
जब दिल झांका आपना, मुझसे बुरा न कोई ।।"