शनिवार, 3 अक्टूबर 2026

दादी माँ और पितृपक्ष का महीना...

पितृपक्ष का महीना मेरे लिए खास है..क्योंकि इस महीने से कई यादें जुड़े हुए है..खासकर दादी माँ से..।
ये महीना खास इसलिय है कि,इस महीने में दही-चूड़ा कुछ ज्यादा ही खाने को मिलता था,वो भी दादी माँ के हाथों से..।
दादी माँ चाहती थी कितना खिला दु इन बच्चों को..
शायद हम जितना खाते थे,उतना उन्हें आनंद आता था..।।

पितृपक्ष शुरू होने से पहले धान का चूड़ा कुटाया जाता था,उस चुड़े की सोंधी खुश्बू अभी भी नाक में आ रहा है..जबतक में गाँव मे था तबतक में ही चूड़ा कुटवाता था,उसके बाद पापा कुटवाया करते थे..मगर इस बार दादीमाँ है ही नही..😢।
उसके बाद तिथ के हिसाब से ब्राह्मण खिलाया जाता था..ब्राह्मण को निमंत्रण देने का कार्य पहले बाबा ही करते थे,जब बाबा अस्वस्थ हो गए तो पापा निमंत्रण दिया करते थे..उसके बाद ब्राह्मण को बीजो(बुलाने) के लिए मैं जाता था..उसके बाद जब ब्राह्मण आते तो उन्हें खिलाने का काम अक्सरहाँ दादी माँ ही करती थी..और दादी माँ साथ ही गाँव-घर की बात करती थी उन ब्राह्मणों से..।जब ब्राह्मण खा कर चले जाते तब सब बच्चों को दादी माँ बैठा कर खिलाती..उसके बाद घर के अन्य लोग खाते..।

इस पवित्र महीने में जितिया पावन(इसमें माता अपने संतान की दीर्घायु के लिए उपवास कडती है) आता है..।
मेरे बाबा एक फकरा कहा करते थे-
 "जितिया पावन बड़ भारी
  धिया-पुता के ठोक सुतेनउ,
  अपने खेनु भयर थारी.."
दरसल जितिया पावन शुरू होने से पहले ब्रह्ममुहूर्त में ही खाना होता है,खासकर जो उपवास करने वाली महिलाएं होती है उन्हें खाना होता है,तो अकेले महिलाएं खाएंगी,तो कैसा लगेगा इसलिए जो बच्चे होते है उन्हें भी सुबह में उठाया जाता है,और चुरा दही खिलाया जाता था..।
जबतक में गाँव मे रहा या फिर इस अवसर पर गाँव पहुंच गया तो दादी माँ सब बच्चों को उठाकर खिलाती ही थी..जबतक सब उठ न जाये,सबके पत्ते पर चुरा दही पड़ न जाये तबतक दादी माँ खुद नही खाती थी..।
जब में मुम्बई चला आया तब भी दादी माँ फोन पर कहा करती की कायल जितिया छैय चुरा-दही खा लेब..।
इसबार ये कहने के लिए दादी माँ नहीं है...।



शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026

स्वप्न -कथा..

एक खूबसूरत सपना आज सुबह में देखा,जिसमें से आधा शायद भूल भी गया..
सपने का पहला दृश्य..
कोई फंक्शन हो रहा है,थोड़ी चहल पहल ज्यादा है..
सपने में एक सुंदर लेडी थी जिसने वाइट शर्ट पहना था,जो उसे औरों से बिल्कुल अलग और खूबसूरत बना रहा था..उसके गोद मे एक क्विइट सा बच्चा था,जो किसी के गोद मे नही जा रहा था,मैं उस लेडी के करीब गया और अपना हाथ फैलाया बेबी को लेने के लिए,वो सीधे मेरे गोद मे आ गया सबको आश्चर्य हुआ कि,ये कैसे हुआ..।उसे गोद मे लेने के बाद मानों हृदय शीतल हो गया..।वो बेबी मेरे सीने से इस तरह चिपक गया मानो वो मेरे ही शरीर का अंग हो..।।


(सपने में जो लेडी थी वो कैटरीना कैफ थी..और दो हीरोइन थी😄..शायद ये सपना इसलिए देखा कि उनकी खबरें आजकल चर्चा में थी बॉडी सेमिंग के कारण शायद इस वजह से देखा हो..हां एक और वजह हो सकता है,कभी कैटरीना मेरी फेवरेट हुआ करती थी..)


इस सपने के क्या मायने हो सकते है..??
शायद कोई रेस्पोंसबिलिटी मिलने वाली है..।

सपने का दूसरा दृश्य..
रात का समय है और बारिश हो रही है,चारों और सन्नाटा है,गाड़ियां भी न के बराबर चल रही है,स्ट्रीट लाइट की पीली रोशनी चारों और फैली हुई है..सड़क के किनारे एक झुग्गी सा दुकान है जो खुला हुआ है..मैं उसी दुकान के पास खड़ा हूँ(मालूम नहीं मैं हूँ या कोई और चेहरा मालूम नहीं) सड़क के उस पार से एक लड़की आ रहीं है,जिसे देखकर मैं,उससे मिलने जाता हूँ..हमदोनों सड़क के बीच मे है..वो उदास है..वो दोनों आपस मे कुछ बात करते है,मालूम नहीं क्या बात करते है..वो लड़की कहती है ये शर्ट उतार दो ये मैंने गिफ्ट की थी..लड़का शर्ट उतार देता है..उसके सीने पर एक टेटू है जिसे उसने उस लड़की के लिए बनाया था..।लड़की बोलती है क्या-क्या उतारोगे..ये पेंट भी तो मैने ही दिया था,लड़का गुस्सा में पेंट भी उतार देता है..लड़की रोते हुए वंहा से चली जाती है..।लड़का बीच सड़क पर बेबस होकर बारिश में भींग रहा होता है..।




इस सपने के क्या मायने है..??
मालूम नहीं..
शायद यही मतलब है कि काबिल बनो..अगर काबिल नहीं बनोगे, तो लोग यू ही छोड़ के चले जायेंगे..।

मेरे अंदर एक छोटा सा लेखक है,उसके नजरिया से देखें तो सपने का दूसरा दृश्य उस लड़के के जिंदगी की शुरुआत की कहानी है..सपने के पहले दृश्य में जो लेडी है,शायद वो वही लेडी है,जो उसे उस रात छोड़ के चली जाती है..।मानो कोई सपना नहीं, बल्कि कोई फ़िल्म सपने में देख रहा हो..शायद ये फ़िल्म देखने के वजह से ऐसा हुआ हो..शायद.. क्योंकि अक्सरहाँ हम सपने में वहीं देखते है जो वास्तविक दुनिया मे देखते है..।

गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026

मैं...

बर्बाद होने दो सभी को..
आबाद होने दो सभी को..
जब उन्हें अहसास होगा..
हमतक आएंगे वो सभी..
जो भटक गए हें राह..
जो हो गए हें ग़ुमराह..
कंहा जाएंगे..
और कंहा तक जायेंगे..
अंतोतगत्वा मेरे पास ही आएंगे..।।

मैं ही, वो हूँ..
जिसका तुम्हें तलाश है..।
मगर मुझे पहचान कैसे पाओगे..??
क्योंकि मैं वो नहीं..
जिसका तुम्हें तलाश हैं. ।
मैं वो हूँ..
जिसका सबोको तलाश है..।
मैं तो तुम्हारे सांसों में हूँ..
अपने सांसों के सहारे ही..
मुझतक पहुंच पाओगे..
अन्यथा यू ही भटकते-भटकते..
जिंदगी जाया कर जाओगे..।