गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026

मैं...

बर्बाद होने दो सभी को..
आबाद होने दो सभी को..
जब उन्हें अहसास होगा..
हमतक आएंगे वो सभी..
जो भटक गए हें राह..
जो हो गए हें ग़ुमराह..
कंहा जाएंगे..
और कंहा तक जायेंगे..
अंतोतगत्वा मेरे पास ही आएंगे..।।

मैं ही, वो हूँ..
जिसका तुम्हें तलाश है..।
मगर मुझे पहचान कैसे पाओगे..??
क्योंकि मैं वो नहीं..
जिसका तुम्हें तलाश हैं. ।
मैं वो हूँ..
जिसका सबोको तलाश है..।
मैं तो तुम्हारे सांसों में हूँ..
अपने सांसों के सहारे ही..
मुझतक पहुंच पाओगे..
अन्यथा यू ही भटकते-भटकते..
जिंदगी जाया कर जाओगे..।





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स्वप्न -कथा..