रविवार, 30 अगस्त 2026

सबकुछ बदल रहा है..

लोग बदलते है..
जनाब लोग ही नही..
सबकुछ बदलता है..
जिससे आपको लगाव होता है..
उसके बदलाव का अहसास होता है..
जिससे लगाव नही होता है..
उसके बदलाव का अहसास नहीं होता है..।।

आपने खुद को सीमित ही इतना कर लिया है कि..
आपको सिर्फ कुछ लोगों का बदलने का अहसास होता है..
खुद को इतना विस्तारित करें..कि
हर क्षण ब्रह्मांड में हो रहे बदलाव का अहसास कर सकें...।
छोड़िए हटाइये खुद को इतना विस्तारित मत कीजिये..
खुद को इतना संकुचित कीजिये कि
अपने हृदय गति और सांसों में हो रहे बदलाव का अहसास हो सके..।

ये कैसे होगा..?
ये कैसे होगा नहीं,ये हर क्षण हो रहा है..
बस अपने आपको स्थिर करके देखना है..।।
खुद के अंदर सांसों के सहारे गोता लगाइए..
और सांसों के सहारे बाहर आइए..
तबतक गोता लगाते रहिये जबतक वो मिल न जाये...
जिसकी आपको तलाश है..।




शनिवार, 29 अगस्त 2026

इच्छाएं

मेरी कोई इच्छाएं नहीं है..
सारी इच्छायें जैसे मर चुकी है..
या फिर ये सब चीज तुच्छ लगने लगी है..
जब अपने अतीत में झांकता हुए बहुत पीछे जाता हूँ..
तब अहसास होता है कि मेरी कोई इच्छायें क्यों नही है..।
मैंने अपने अतीत में वो सब चीज का उपभोग किया है..
जो विश्व की 0.10% लोग ही उपभोग कर पाते है..
बड़ी मुश्किल से छुटकारा पाया..
मगर अभी भी एक चीज से छुटकारा नही पा रहा हूँ..
शायद इस जन्म उससे भी छुटकारा पा लूंगा..
और उस उच्चतम स्तर को छू पाऊंगा..
या फिर उसमें विलीन हो पाऊंगा..।
फिलहाल तो कोई आसार नही दिख रहें..
मगर बदलाव शुरू हो चुके है..😊

गुरुवार, 27 अगस्त 2026

कभी-कभी..

कभी-कभी मुझे भी हताश और निराश होने का मन करता है..
मगर मालूम नहीं क्यों..
अगर मैं, हताश और निराश होता भी हूँ तो..
पानी के बुलबुले के समान क्षणभंगुर..
और फिर..
निर्लज आसमान की तरह मुस्कुराने😊 लगता हूँ..।
शायद हमारी नियति ही मुस्कुराना है..
हम ही मुस्कुराना भूल जाते है..।
अपने आसपास देखिए..
हरेक पेड़-पौधे और जीव-जंतु को..
सब मुस्कुरा रहें है..
अगर नही मुस्कुरा रहें है तो..
मुस्कुराने की कोशिस कर रहें है..।
और हम क्या कर रहें है..?


मंगलवार, 25 अगस्त 2026

मैं क्यों ढूंढता हु उन्हें..

मैं क्यों ढूंढता हूँ उन्हें..
जिन्हें मेरी फिक्र ही नही..।
क्यों ना मैं खुद को ढूंढू..
इतना ढूंढू..
कि दुनिया फिर मुझे ढूंढें..।
मैं क्यों ढूंढता हूँ उन्हें..
जिन्हें मेरी फिक्र ही नही..।



शुक्रवार, 21 अगस्त 2026

जिंदगी..

जिंदगी व्यर्थ मालूम होती है..
क्या होना चाहता था,
और क्या हो गया मैं..
कंहा जाना चाहता था..
और कंहा आ गया मैं..।
क्या अब भी कोई उम्मीद बची हुई है..
तो हां,अभी भी बहुत उम्मीद बची हुई है..
आपके पास अभी भी उतना समय है कि..
आप जो होना चाहते थे वो हो सकते है..
तो उदास मत होइए..
और जो हो सकता है..
वो सब कुछ कीजिये..
चाहे जैसे भी हो..
अपने लक्ष्य को हासिल कीजिये..।।


गुरुवार, 20 अगस्त 2026

बप्पा..

मैं अक्सरहाँ भूल जाता हूँ आपको..
मगर आप ही हो,कि अक्सरहाँ दस्तक दे जाते हो..
और मुझे अपने आगोश में ले लेते हो..
आखिर क्यों करते हो ऐसा..?
मैंने तो कभी..
अच्छे से न नाम लिया,न जप किया,न तप किया..
तो फिर आखिर क्यों..
मुझपे कृपा वरसा रहें हो..
मैं तो उस योग्य भी खुद को नही मानता..
की आपके चरणों की धूलि को अपने सर से लगा सकूँ..
मगर आप हो.. 
जो मेरे साँसों में रच बस गए हो..
ज्योहीं आपसे दूरियां बढ़ती है..
आप हरदफ़ा दस्तक दे जाते हो..।

क्या करूँ,कैसे करू..
की आपमें समाहित हो जाऊं..।
आप ही मार्ग दिखाओ बप्पा..
इस जीवन को अब..
सार्थक बनाओ बप्पा..।





बुधवार, 19 अगस्त 2026

अहमियत..

मुझे लगा मेरी अहमियत कुछ तो होगा..
उनके जिंदगी में..
मगर में गलत था..।
उनके लिए शायद में नहीं..
कुछ और अहमियत रखता है..।



रविवार, 16 अगस्त 2026

थोड़ा कठिन है..

अगर आप चाहते है कि लोग आपको पसंद करें..

तो पहले आप,

लोगों को पसंद करना शुरू कीजिए..

अपने शर्तों पे नहीं..

बल्कि वो जैसे है..

वैसे ही,

पसंद करना शुरू कीजिए..।।


थोड़ा कठिन है..

थोड़ा नही बहुत कठिन है..।

मगर जब आप किसी को उसके ही शर्तों पे पसंद करना शुरू करते है..

तो,वो भी..

आपके शर्तों का ख्याल रखना शुरू कर देते है..😊।



कुछ नियम बनाये थे मैंने अपने लिए..

मैं अपने ही बनाये हुए नियम को..
तोड़ता हूँ अपने लिए..।
जब नियम को तोड़ कर तार-तार कर देता हूँ..
तब ख्याल आता है कि..
ये नियम बनाया था 
मैंने अपने लिए..।




अक्सरहाँ इन बातों को दरकिनार कर आगे बढ़ जाता हूँ..
मगर कभी तो रुकना होगा..
और इन बातों का ख्याल करना होगा..।

जो नियम बनाये थे मैंने..
अपने भले के लिए..
तो भला कबतक,
नियम को दरकिनार कर आगे बढ़ता रहूंगा..।
कभी तो रुकूँगा..
और अपने बनाये नियम पे चलूंगा..
शायद वो वक़्त अब आ गया है..
अपने बनाये नियम को दृढ़ता से अनुसरण करने का..।

शुक्रवार, 14 अगस्त 2026

आखिर कबतक..

तुम ढूंढते हो उसे..
जिसे तुम्हारी कद्र ही नहीं..
तुम भटकते हो..
उसके लिए..
जिसे तुम्हारी फिक्र ही नही..।
आखिर कबतक सबकुछ खबर होते हुए भी..
बेखबर बने रहोगे..।



हम क्यों किसी के बारे में सोचते है..

हम क्यों किसी के बारे में सोचते है..??
सच कहूं तो आप निकम्मे और निठल्ले हो😊..
इसिलिय आप किसी के बारे में सोचते है..
खुद को इतना समय क्यों देते है..
कि आप किसी के बारे में सोचे..।
अपने जिंदगी को उद्देश्यपरक बनाये..
और पूरा समय उसमें लगाए..
तब देखिए आप कैसे किसी के बारे में सोचते है..
जबतक उद्देश्यहीन जिंदगी जीते रहेंगे..
तबतक हम यू ही..
किसी और के बारे में सोचते रहेंगे..।
खुद को व्यस्त रखें..
अपने उद्देश्य की पूर्ति में..
अगर कोई उद्देश्य नही है..
तो अभी बनाये..
अन्यथा जिंदगी यू ही..
दूसरों के बारे में सोचते-सोचते खत्म हो जाएगा..।



गुरुवार, 13 अगस्त 2026

मन भटक रहा है..

मन भटक रहा है..
क्यों..??
ये सवाल नया नही,
सदियों पुराना है..
मन भटक रहा है..।
आखिर भटकेगा क्यों नहीं..
क्योंकि उसे खुला छोड़ जो रखा है..।



क्या करें, कैसे करें..
कैसे इसे नियंत्रित करें..??
इसे नियंत्रण करना आसान कंहा है..
ये तो बिना लगाम के घोड़े के समान स्वछंद है..
इसके लगाम को जितना जकड़ने की कोशिश करेंगे..
ये उतना ही उलझन बढ़ाता जाएगा..।

फिर आखिर क्या करें,कैसे करें..??
कुछ नहीं..
बस अपने उद्देश्य को ढूंढिए..
और उसके पूर्ति के लिए लग जाइये..
और अपने मन को भी वंही लगाइए..।
क्योंकि हमारा मन भी तो..
किसी उद्देश्य के लिए ही भटक रहा है..
उसे सार्थक उद्देश्य की पूर्ति में लगाइए..।
न कि बेवजह के उद्देश्य में उसे उलझाइये..
जबतक बेवजह के उद्देश्य में उसे उलझाइयेगा
तबतक वो यू ही भटकता रहेगा..
खुद से ही सार्थक उद्देश्य को तलाशता रहेगा..।।

मन भटक रहा है..
मगर वास्तविकता तो कुछ और है..
हम ही भटक रहे है..
मन तो अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए भटक रहा है..।
हम क्यों भटक रहे है..?
जिस रोज हम अपने उद्देश्य की पूर्ति में लग जाएंगे..
उस रोज मन भी तादात्म्य बिठाकर उद्देश्य पूर्ति में लग जायेगा..।
जिस रोज उद्देश्य निर्रथक लगने लगेगा..
फिर से मन भटकने लगेगा..।

मन भटक रहा है..।

कुछ लिखने का मन करता है..

कुछ लिखने को मन करता है..
मगर लिखने से ड़र लगता है..।
कंही मेरी लेखनी..
किसी को सुई की तरह न चुभ जाये..
या फिर किसी को समझ ही न आये..
दोनों में खतरा है..
भला ये खतरा कौन मोल उठाये..।


कुछ लिखने का मन करता है..
मगर लिखने से डर लगता है..
क्योंकि आजकल कौन पढ़ता है..
और किसको इतनी समझ है..कि
किसी की लेखनी को समझ पाए..
हम वही समझ पाते है..
जो पढ़ पाते है..
मगर उस लेखनी के उस पार झांक नही पाते..।

कुछ लिखने को मन करता है..
मगर लिखने से ड़र लगता है..
क्योंकि शब्दों के मायाजाल में कोई फंसकर..
यू ही गुमराह न हो जाये..
क्योंकि सही राह चलना बड़ा दुष्कर है..
गलत राह पर तो हम चल ही रहें है..।

कुछ लिखने को मन करता है..
मगर लिखने से ड़र लगता है..
क्योंकि..
मेरी लेखनी किसी को समझ आएगा कि नही..
या फिर मैं कुछ ऐसा लिख भी पाऊंगा की नही..
जो सार्थक हो,सामर्थ्य हो,समृद्ध हो..
शायद यही सब सोचकर लिखने से डर लगता है..।

कुछ लिखने को मन करता है..
मगर लिखने से ड़र लगता है..

मंगलवार, 11 अगस्त 2026

गलतियां

गलतियां होना सामान्य सी बात है..
गलतियों का अहसास होना अच्छी बात है..
और उस गलती को फिर से न दोहराना बहुत बड़ी बात है..।

मगर आजकल हमलोग गलती करते ही नहीं..
अगर गलती करते तो,उसका अहसास होता..
मगर आजकल अहसास कंहा हो रहा है..
अगर अहसास होता..
तो हम फिर से उस गलती को नहीं दोहराते..।

मगर आजकल हमलोग,कई गलतियां रोज दोहरा रहें है..
जैसे वो जिंदगी का हिस्सा हो चुका है..और हमें लगता है ये सामान्य सी बात है..क्या ऐसा नहीं है..??

आप रोज जानते हुए कि ये गलत है,तब भी गलती करते है..ऐसा गलती दिनभर में कितना करते है..??
जरा सोचिए..🤔

ये गलतियां धीरे-धीरे बेड़ियां की तरह भारी और मजबूत होता जाएगा,और आपके जिंदगी का बोझ बन जायेगा..आप जितना देर करेंगें उतना ये बेड़ियां मजबूत होता जाएगा..जबतक आपको अहसास होगा तबतक ये बेड़ियां आपको अपना गुलाम बना लिया होगा..और आप चाहकर भी इससे नही निकल सकते..।

इसलिए जितना जल्दी हो सके अपने गलतियों को पहचानिए और उसे स्वीकारिये और इसे 

सोमवार, 10 अगस्त 2026

खुद को देखिए जनाब..

खुद को देखिए जनाब..
आपको हो क्या गया है..??
कल तक आप सबके चहेते थे..
आज आपको हो क्या गया है..?
आपको लगता है..
लोग बदल गए है..
मगर नहीं..
आप ही बदल गए है..।


सूर्य को फर्क नहीं पड़ता कि..
कौन उसके ऊपर कीचड़ उछालता है..
या फिर पानी उछालता है..
वो तो सबपे..
एक समान रोशनी का बौछार करता है..।
आप तो सूर्य से थे..
तो फिर,
आजकल एक आंगन के, 
दीपक क्यों बन गए है..??

खुद को देखिए जनाब..
आपको हो क्या गया है..??
कल तक आप सबके चहेते थे..
आज आपको हो क्या गया है..?

माना कि लोग गलत है..
मगर,वो सही ही कब थे..
बिच्छु काटना,और 
शेर दहाड़ना तो बंद नही करेंगे..
वो कल भी ऐसे थे..
और आज भी ऐसे ही है..
मगर आपको क्या हो गया है..??
आप तो ऐसे नहीं थे..??

किसी को कोई फर्क नही पड़ेगा..
आपके बदलने से..
आपके चाहने वाले थोड़ा हताश और निराश होंगे..
और कुछ दिनों बाद उन्हें आदत हो जाएगी..।
मगर आपका क्या होगा..??
क्या आप कभी..
स्वयं को आईने में देख पाएंगे..?
क्या आप कभी अकेले में..
स्वयं से नजरें मिला पाएंगें..?

खुद को देखिए जनाब..
आपको हो क्या गया है..??
कल तक आप सबके चहेते थे..
आज आपको हो क्या गया है..??

लोग नहीं बदलते..
हम ही बदल जाते है..
और हमें लगता है..
लोग बदल गए है..।



मैं..से मैं तक..

मैं,जो हूँ..
वो मैं होना चाहता हूँ..
वो,मैं..
मैं,कैसे होऊं..।
जबतक मैं,
वो मैं न होऊं..
तबतक बैचैन ही रहूंगा..
वो मैं,मैंकैसे होऊ..
इसका तो पता नही...
मगर उस मैं के अवरोधक को हटा दे..
तो शायद उस मैं तक जाने का पता चल जाये..

शनिवार, 8 अगस्त 2026

नी..

नी..
कंहा से शुरू करू..
तुम्हारी दास्तां..
वंही से शुरू करता हूँ..
तुम्हारी दास्तां..
जंहा पहली दफा देखा था..
तपती सुबह में,पेड़ की छावं में.
गिट्टी के ढेर पे.
मुहर वाले फ्रॉक में,
ब्रश करते हुए देखा था पहली बार..।
हां पहली दफा तुम्हें देख के वो अहसास न हुआ..
मगर न जाने अक्सरहाँ तुम्हें देखते-देखते
वो अहसास कब होने लगा पता न चला..
नी कंहा से शुरु करू तुम्हारी दास्तां


(साभार - "नी" )


हम सोचते क्यों है..

आपने कभी सोचा है कि..
आप सोचते क्यों है.??
जरा सोचिए..🤔
तो क्या सोचा आपने..
चलिये हम बताते है..
कि हम क्यों सोचते है..
क्योंकि हमारे पास करने को कुछ नही है
या फिर हमारे पास करने को कुछ है..।



मगर हास्यपद ये है कि हम आज सोचते ही नही।
है न बड़ी बात..
क्या सच में ऐसा है..??
हरेक अंग का अपना-अपना काम है..
उसी तरह दिमाग का अपना काम है,सोचना..
अगर दिमाग नही सोचेगा..
तो इसका मतलब है कि दिमाग मे कुछ तो खराबी है..।

अब आप सोच रहें होंगे कि मैं क्या बोल रहा हूँ..
अगर ऐसा है..
तो घबराइए नही..
आपका दिमाग सही है..
क्योंकि आप सोच रहें है..😊।

मगर इससे भी बड़ी बात अब मैं,ये कहने जा रहा हूँ कि..
क्या आप वही सोचते है..
जो आपके लिए जरूरी है..?
या फिर आप वो सोचते है..
जो किसी के द्वारा सोचवाया जा रहा है..??
हां, हममें से अधिकांश लोग वो ही सोचते है,जो हमारे लिए जरूरी नही है..
हम सारा दिन व्यर्थ की बातें सोचते है,और उस सोच को सोशल मीडिया में विस्तारित करते है..जिससे किसी और का स्वार्थ सिद्ध होता है..और हमें अंततः वो सब सोच कर कुछ नही मिलता..।

आपने आखरी बार अपने बारे में कब सोचा था..??
और आज आपने क्या-क्या सोचा..??
या फिर आपने सोचा ही नहीं..?
अगर आपने सोचा ही नहीं, तो ये बड़ी समस्या है क्योंकि अब आपके सोच को कोई अप्रत्यक्ष तरीके से नियंत्रित कर रहा है..
और आज उसका सबसे बड़ा माध्यम सोशल मीडिया है..
ये आपको अजीब लग सकता है..
मगर यही वास्तविकता है..।
आप सफल व्यक्ति को देखें..
उनके दिनचर्या को देखें..
क्या वो सोशल मीडिया इस्तेमाल करते है..
अगर हां तो कितना..??
अगर आप भी सफल होना चाहते है तो..
एक सफल व्यक्ति की तरह ही अपने सफलता के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करें..न कि एक एडिक्ट की तरह..।

शायद आपको अभी भी कुछ समझ नहीं आया होगा..
अगर आया भी होगा..
तो आप कुछ नही कर सकते..
क्योंकि आपके पास अपना कोई उद्देश्य ही नही है..
अगर उद्देश्य है..
तो आप अभी से ही अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए ही..
सोशल मीडिया इस्तेमाल करेंगे..।

क्या आप अभी भी कुछ सोच रहे है..
अगर हां,
तो अच्छी बात है..😊
क्योंकि आप सोच रहें है..
क्योंकि हमारी सोच ही तो हमें औरों से अलग बनाता है..।


शुक्रवार, 7 अगस्त 2026

माना कि..

माना कि मैं,
असफलता के बोझ से ढका हुआ हूँ..
मगर वो दिन दूर नही..
जब इन्ही असफलताओं के बोझ पर..
सफलता का सिंहासन लगाऊंगा..

क्योंकि जब मैं असफल हो सकता हूँ..
तो सफल भी जरूर होऊंगा..।



मुझे मत ढूंढो..।

मुझे मत ढूंढो..
मैं नही मिलूंगा..
क्योंकि में बहुत सूक्ष्म हूँ..।
और हर जगह विद्यमान हूँ..
तुम मुझे कंहा-कंहा ढूंढोगो..।

मुझे मत ढूंढो..
मैं नही मिलूंगा..
क्योंकि मैं बहुत विशालकाय हूँ..
न मेरा ओर है,
न ही मेरा छोर है..
इस जंहा में..
सिर्फ मैं ही, मैं व्याप्त हूँ..।

मुझे मत ढूंढो..
मैं नही मिलूंगा..
क्योंकि मैं कंही हूँ ही नही..
अगर हूँ,
तो तुम्हारे अहसास में..।
मुझे महसूस करो..
क्योंकि,मैं..
तुममें ही हूँ..
तुमसे ही हूँ..।
मुझे मत ढूंढो..
मैं नही मिलूंगा..।


गुरुवार, 6 अगस्त 2026

जब सारा शहर..

जब सारा शहर हंस रहा था..
तो मैं, मौन था..
जब सारा शहर उदास है..
तो मैं,मुस्कुरा रहा हूँ..।
मैं इसलिए नही मुस्कुरा रहा कि..
ये उदास है..
मैं इसलिय मुस्कुरा रहा हूँ कि..
यही तो सत्य है..
तो फिर इस सत्य से,
मुँह फेर के उदास क्यों होऊ मैं..
इसे स्वीकार कर..
क्यों न मुस्कुराऊँ मैं..।


सोशल मीडिया और उद्देश्यहीन जिंदगी..

कभी आपने सोचा है..
आप क्यों मिनटों,घंटों सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करते हो..??
शायद नही सोचा होगा..
क्योंकि सोशल मीडिया हमसे सोचने और समझने की शक्ति छीनते जा रहे है..।



रॉयल मेलबर्न इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी का एक शोध बताता है कि लगातार सोशल मीडिया के इस्तेमाल से हमारा क्रिटिकल थिंकिंग और डेप्थ प्रोसेसिंग की क्षमता घटती जा रही है..

यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास का "स्मार्टफोन एंड वर्क मेमोरी" शोध बताता है कि केवल पास में रखा फोन(चाहे वो स्विच ऑफ हो) हमारे मानसिक क्षमता को कमजोर कर रहा है..

हावर्ड यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट "डोपामाइन एंड अटेंशन स्पैन" बताता है कि..सोशल मीडिया के नोटिफिकेशन, 'लाइक' और शॉर्ट्स दिमाग में डोपामाइन (Reward Chemical) रिलीज करते है.. जिससे दिमाग को तुरंत खुशी मिलने की आदत हो जाती है..जिसके कारण जिस काम में तुरंत नतीजा नहीं मिलता (जैसे पढ़ाई करना या कोई गहरी समस्या सुलझाना), उसमें दिमाग जल्दी बोर हो जाता है और ध्यान भटक जाता है..।

मेरा फिर से वही सवाल है..की, हम क्यों घंटों सोशल मीडिया पर समय बिताते हैं..??

इसका एक ही जबाब है..
हम उद्देश्यपूर्ण जिंदगी नही जी रहे है..अगर हमारे पास कोई उद्देश्य होता तो हम अपना समय सोशल मीडिया पर नही जाया करते..।
जरा गौर कीजिए..आप जितने भी लोकप्रिय चेहरे या नाम जानते है..उनके बारे में पता कीजिये..
वो कितना समय सोशल मीडिया पे बिताते हैं..?
आपको जबाब मिल जाएगा..।
(आप उन्हें छोड़ दे जिन्होंने सोशल मीडिया को ही अपना उद्देश्य बना लिया है..)

इसिलिय जिंदगी में कोई उद्देश्य बनाये और उसे पूर्ति करने में समय गवांये न कि सोशल मीडिया पे..
सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना गलत नही है..आज ये आम आदमी का अपना नजरिया,अपना भाव व्यक्त करने का साधन है..।

मगर सतर्क रहने की जरूरत है..
सोशल मीडिया को आप अपना साधन बनाये..ऐसा न हो कि सोशल मीडिया आपको अपना साधन बना ले..जोकि बना चुका है..हम वही देखते है,जो हमें दिखाया जाता है..हम वही सुनते है जो हमें सुनाया जा रहा है..।
आपको याद है,आप लास्ट टाइम कब सर्च करके कुछ देखा या सुना था..??😊




सोमवार, 3 अगस्त 2026

उपयोग और उपभोग..

साधारणतया हम उपयोग और उपभोग में कोई अंतर नही समझ पाते,हमें लगता है ये दोनों शब्द का मतलब एक ही है..।
मगर दोनों शब्द में जमीन और आसमां का अंतर है..।

किसी चीज का उपयोग करना सही है..
जैसे स्मार्टफोन को ही ले..
ये हमारे लाइफ का अभिन्न हिस्सा है..हम इसके बिना अपने दिन की शुरुआत और अंत कर ही नही सकते..ये आज इसकी महत्ता हमारे जीवन के हरेक स्तर पर है..इसके बिना आर्थिक गतिविधियां से लेकर मनोरंजन तक कि गतिविधियों का हम कल्पना नही कर सकते..।

मगर हम में से अधिकांश लोग आज स्मार्टफोन का उपयोग नही कर रहें है,बल्कि उपभोग कर रहें है..।
उपभोग का साधारण अर्थ है..उप+भोग= दूसरों के लिए भोग(इस्तेमाल) करना..(इसके और कई अर्थ है)


आपने गौर किया होगा..जब आप स्मार्टफोन उठाते है तो आप करना कुछ और चाहते है,और कर कुछ और रहे होते है..।और जो आप कर रहें होते है..वो आप अपने लिए नही बल्कि आप दूसरों के लिए कर रहें होते है..।
हां यही वास्तविकता है..नही तो आपके रील स्क्रोल करने से,ऐड देखने से कैसे कई लोग धनवान होते जा रहे है,और आप वही के वही है..।
कुछ लोगों का कहना है,जब हम रील या सोशल मीडिया देखते है तो हमें खुशी मिलती है..
आखिर ये कैसी खुशी है,जिसे देखना बंद करते ही आप फिर से उसी स्थिति में आ जाते है,जिस स्थिति में आपने देखना शुरू किया था..क्या ये सच नही है..??

आज हम उस दौर में जी रहें है..जिस दौड़ में जिंदगी की बागडौर हमारे हाथों में है ही नही..और आश्चर्य की बात ये है कि हमें पता ही नही है..।
जिन्हें पता चल गया है,वो नित नए कीर्तिमान रच रहे है..।
क्या ऐसा नही है..??
जरा आप सोचिए आप क्या पहनते है,क्या खाते है,क्या खरीदते है..यंहा तक कि क्या करते है..ये सब आप कंही-न-कंही दूसरों से प्रभावित होकर ही कर रहे है।

 और हमें प्रभावित कौन कर रहा है..??
जिसका हम सर्वाधिक उपभोग कर रहें है..।
ऐसा नही है कि ये समस्या आज ही उभरी है,ये पहले भी था,मगर पहले अधिकांश लोग थोड़ा सोचते थे,उसका हमारे जीवन मे क्या प्रभाव होगा नही होगा इस बारें में विचार करते थे..।

मगर आज हमारे विचार को नियत्रंण कर लिया गया है..हम खुद से कुछ विचार ही नही करते,किसी विषय वस्तु पर हमारा कोई विचार ही नही है,हम या तो उसके या फिर इसके विचार से प्रभावित है।।
और ऐसे ही लोग किसी चीज का उपयोग के बदले उपभोग करते है,और कइयों का उपभोग का साधन बन जाते है..।।

जरा सोचिएगा..
क्या आप किसी चीज का उपयोग करते है,या फिर उपभोग..??