वो हर बार मुझे..
अपने करीब खींच लाते है..।
फिर जब मैं उनके करीब जाता हूँ..
तब अहसास होता है..।
भला शरीर के बिना..
आत्मा कैसे रह सकता है..।।
मैं जब भी उनसे दूर जाना चाहता हूं..
वो हर बार मुझे..
अपने करीब खींच लाते है..।
फिर जब मैं उनके करीब जाता हूँ..
तब अहसास होता है..।
भला सूरज के पृथ्वी का क्या हश्र होगा...
ये सोच के ही मन घबराता है..।
मैं जब भी उनसे दूर जाना चाहता हूं..
वो हर बार मुझे..
अपने करीब खींच लाते है..।

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