गुरुवार, 15 अगस्त 2024

संघर्ष

हमें अपने हिस्से के संघर्ष से खुद ही जूझना होता है..
यंहा कोई और नही है,आपके संघर्ष में हिस्सेदारी के लिए..
बिरले ही कोई-कोई होते है,जिन्हें मदद मिल जाती है..
संघर्ष से जूझने में..
अन्यथा अपने संघर्ष से स्वयं ही लडकर जीतना होता है..
यंहा कोई नही है,उसके सिवा..
वो सिर्फ शिव ही है..
जो आपके संघर्ष में,आपके सहयोगी हो सकते है..।।
उनपे आस्था रखकर,सबकुछ उनके ऊपर छोड़ दे..
सब ठीक हो जाएगा..।।

कमियां

आप दूसरों के नजर में कैसे है..ये उतना मायने नही रखता जितना कि, 
आप स्वयं के नजर में कैसे है..??
दूसरों के नजर में अच्छा होने से सम्मान मिलता है,
और स्वयं के नजर में गिरा होने से आत्मग्लानि होता है,मगर इसके लिए अपनी कमियों का भान होना जरूरी है,जो शायद ही किसी-किसी को होता है,और उसमें से विरले ही कोई-कोई उसे दूर कर पाता है..।।

हम सारी क्रियाकलाप दुनिया के नजर में अच्छे दिखने के लिए करते है..
और हम कभी ये मूल्यांकन नही करते कि हम स्वयं के नजर में कैसे है..।।

हम अक्सरहाँ अपनी कमियां दुसरों के नजर से छुपाते है..
मगर उन कमियों को स्वीकार कर उसका न ही मूल्यांकन करते है,और न ही उसे दूर करने की कोशिस करते है..।।

जब तक हम अपनी अच्छाइयों का मुखोटा हटाकर 
अपनी कमियों को स्वीकार कर..
उसे दूर करने की कोशिस नही करेंगे तबतक हमें तकलीफों का सामना करना पड़ेगा..।।

आपके सिवा और कोई नही,आपके कमियों के बारे में जानता है..
शायद आप स्वयं भी नही..
अपने अंदर झांके और अपनी कमियों को महसूस कर उसे दूर करें..
इससे सिर्फ आपकी ही नही, दूसरों की जिंदगी भी आनंदमय हो जाएगा..।


शुक्रवार, 9 अगस्त 2024

क्या मुसलमान ही इस्लाम के लिए खतरा है..??

हाल ही में जो दृश्य बांग्लादेश में देखने को मिला,वो हरेक संवेदनशील प्राणी को झकझोर देने वाला था...

जरा सोचिए..
क्या भारत मे गांधी,अंबेडकर जी की मूर्ति तोड़ी जा सकती है..
क्या अमेरिका में जॉर्ज वाशिंगटन और लिंकन की मूर्ति तोड़ी जा सकती है..
शायद नही..अगर ऐसा होता है तो वे विछिप्त लोग ही करेंगे..

मगर हाल ही में जिस तरह बांग्लादेश में..
 मुजीबुर्रहमान की मूर्ति बंगलादेशी ही तोड़ रहे थे..
ऐसा लग रहा था,जैसे कोई बाह्य आक्रमणकारी कर रहा हो..
(और ये साबित भी हो गई,ये लोग अमेरिका और पाकिस्तान के नाजायज संतान थे)
अगर सच कहूं तो भारत के लिए गांधी,अंबेडकर, सुभाष ने मिलकर जितना किया..मुजीबुर्रहमान ने अकेले ही बांग्लादेश के लिए किया..


मगर बांग्लादेशी ही उनकी मूर्तियों को तोड़ रहे थे..
वो सिर्फ मूर्तियां नही बल्कि अपने भविष्य को ही तोड़ रहे थे..

"जो अपने पूर्वजों का सम्मान नही करते,
  आने वाली पीढियां उनका भी सम्मान नही करते"

जंहा तक बांग्लादेश में हिंदुओं पे जो हिंसा हो रही है,वो बड़ी बात नही है..क्योंकि मुसलमानों का ये स्वभाव ही है,वो हमेशा से ही अल्पसंख्यक के प्रति निर्मम रहे है,और वो ऐसा सुनहरा मौका खोना नही चाहेंगे..शायद इसलिए भी इस्लाम खतरे में है..।।

चलिए हम इस बात पे गौर करते है कि..
आखिर क्यों इस्लाम खतरे में है..??
क्योंकि इस्लाम अपने जड़ से अलग हो गया है..
जब इस्लाम का उद्भव हुआ तो वो सबसे प्रगतिशील धर्म था, और आज सर्वाधिक बुराइयां इस्लाम मे ही मिलेगा..
अशिक्षा,गरीबी,लैंगिक असमानता,कट्टरपंथ इत्यादि..
आखिर क्यों..??
क्योंकि मुसलमान अल्लाह का नाम तो लेते है,मगर उनके विचारों का अनुसरण करने के बदले उन मुला-मौलवियों,का अनुसरण करते है,जो उन्हें उनके विचारों से उद्देलित करता है..।।

इस्लाम दूसरा सबसे व्यापक धर्म है..
50 के आसपास इस्लामिक देश है,
मगर आपको जानकर आश्चर्य होगा कि उनमें से 90% देशों में लोकतंत्र नही है..।।
जंहा मुसलमान बहुमत में है वंहा वो धर्मनिरपेक्षता को बुरा मानते है..
और जंहा अल्पमत में है,वंहा धर्मनिरपेक्षता को लोकतंत्र की कसौटी पे कसते है..।।

इस्लाम भाईचारे का पैगाम देता है..।।
मगर आपको जानकर आश्चर्य होगा कि प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सर्वाधिक रक्तपात मुसलमानों ने मुसलमानों के प्रति ही किया..और ये सिलसिला जारी है..

ये कैसा भाईचारा है..??
अगर अमीर अरब देश चाहे तो वो अफ्रीका और एशिया के मुस्लिम राष्ट्रों की गरीबी दूर कर सकते है..मगर वो कोई दिलचस्पी नही लेते है,वो तो अमेरिका के साथ गलबहियां कर रहे है..

इस्लाम शांति का पैगाम देता है..??
मगर वर्तमान में कुछ अमीर अरब देश को छोड़ दे तो कोई भी इस्लामिक राष्ट्र में शांति नही है..।।
आखिर क्यों..??

इस्लामिक कट्टरपंथ..
इस्लामिक कट्टरपंथ के रूप में ISIS,अलकायदा,तालिबान इत्यादि(ग्लोबल) के रूप में उभरा है और कुकुरमुत्ते की तरह उभरते जा रहे गई ..जो इस्लाम की छवि ही नही बल्कि इस्लाम को मानने वाले जनसाधारण के जीवन को खराब कर रहे है..।।

अशिक्षा..
आपको जानकर हैरानी होगी की मुस्लिम पुरुष और महिलाएं सबसे ज्यादा शिक्षित और आत्मनिर्भर वंहा है,जंहा मुसलमान अल्पसंख्यक है..
-जंहा मुसलमान बहुमत में है वंहा की महिलाओं की स्थिति दयनीय है..
आखिर क्यों..??

समय आ गया है..की मुसलमानों को फिर से स्वयं का आंकलन करना होगा कि...
क्या वो पैगम्बर के दिखाए मार्ग पे चल रहे है..??
अगर नही तो... 
किसी न किसी को तो फिर से उस मार्गे पे ले जाना होगा..
ये कौन करेगा...
शायद कोई नही,क्योंकि सबको अपनी जान प्यारी है..।।

तो फिर क्या होगा..
फिर कयामत के दिन आएंगे..और आपस में लड़ कट कर मर जायेंगे..।।

शायद इसीलिए मुसलमान ही इस्लाम के लिए खतरा है..।।

इस्लाम ने दुनिया को क्या दिया..??
आप सोच नही सकते..??
आज हम जिस 21वी सदी में इतनी प्रगति कर रहे है उसका नीव इस्लाम ने ही रखा..
इस्लाम ने ही नवीन ज्ञान को पूरे दुनिया मे प्रसारित किया..।
जिस विज्ञान के बलबूते आज यूरोप और अमेरिका महाशक्ति बना हुआ है उस विज्ञान का प्रसार इस्लाम ने ही किया..
जिसके बलबूते यूरोप महाशक्ति बन पाया..।।

मगर आखिर फिर ऐसा क्या हुआ कि इस्लाम हासिये पे चला गया..??
सोचियेगा..??


रविवार, 4 अगस्त 2024

मित्र कौन है..

चाणक्य कहते है - "तनमित्रं यत्र विश्वासः"
"मित्र वही है जिस पर विश्वास किया जा सके"


जीवन मे मित्र का होना बहुत आवश्यक है,क्योंकि..
बिना मित्र के जीवन की गाड़ी आगे बढ़ ही नही सकती..
मित्र ही है जो हमें हताशा और निराशा से बाहर निकलने में मदद करता है,अगर वो न हो तो जीवन कंही फंसा रह जायेगा..

वर्तमान में हमारे पास सबकुछ है मगर मित्र का अभाव है जिस कारण, जिंदगी नीरसता से भरती जा रही है..।

कई ऐसे लोग है जिनके पास सबकुछ है मगर तब भी वो दुःखी है..
क्योंकि उनके पास मित्र नही है..।

जिंदगी मैं वैसा मित्र होना बहुत जरूरी है,जिसपर आप विश्वास कर सके.. वो कोई भी हो सकता है..माँ-बाप,भाई-बहन,पत्नी,या फिर बचपन या स्कूल,कॉलेज के मित्र जिनपर आप विश्वास करके उनसे सबकुछ कह सके..।

मगर अफसोस आज मित्र बनने के लिए कोई तैयार ही नही है,क्योंकि आज आगे बढ़ने की हौड़ में,हम सबको रौंदने में लगे है,चाहे वो हमारा मित्र ही क्यों न हो अगर वो हमारे स्वार्थ के आड़े आता है तो उन्हें भी रौंद रहे है..।
जिसका परिणीति दुःख के सिवा और कुछ भी नही है..।।

महात्मा बुद्ध के जीवन मे मित्रों का बहुत योगदान था,क्योंकि अगर उनके जीवन मे मित्र का प्रादुर्भाव न होता तो वो बुद्ध नही बन पाते.. 
उन्होंने अपने मित्र सारथी(चन्ना) पर विश्वास करके ही गृहत्याग किया,अन्यथा वो कभी अपने राज्य से बाहर नही निकल पाते..।।


बुद्ध मित्र के लिए "कल्याण मित्र"शब्द का इस्तेमाल करते है..
वो कहते है,मित्र वो है जो तुम्हारे कल्याण के बारे में सोचे,तुम्हारा इस्तेमाल न करे,बल्कि तुम्हारा भला करें..
मित्र गुरु जैसा होना चाहिए,जो तुम्हें ऊंचाइयों पे ले जाये..।।

बुद्ध को भविष्य का ज्ञान था शायद इसीलिए बुद्ध कहते थे जब में पुनर्जन्म लूंगा तो "मैत्रेय" के रूप में..।।

क्योंकि वर्तमान में इस दुनिया को मित्र की आवश्यकता है..।(चाहे अमेरिका हो या रुस हो)
जो आपको अंधियारे से निकाल सके,अगर न निकाल सके तो उस अंधियारे को दूर करने के लिए कर्ण जैसे ही अपना सबकुछ न्योछावर कर दे..

जरा सोचिए क्या आपके जीवन मे ऐसा कोई मित्र है..
जिसपे आप विश्वास कर सके..??
(विश्वास इतना कि आप अपनी कमियों को भी उनसे कह सके,इस विश्वास से की वो इस राज को राज ही रहने दे)
शायद आपका जबाब "ना" में ही होगा..
ढूँढिये उस मित्र को..कोई न कोई जरूर मिल जाएगा..
क्योंकि प्यास लगेगी तब ही प्यास बुझेगी..
मगर अफसोस आज स्मार्टफोन ने प्यास बुझा दी है..।

बिना मित्र के जीवन,बिना सुंगंध के फूल के समान है..
बिना मित्र के जीवन,समुन्द्र के पानी के समान है..
बिना मित्र के जीवन,बिन पतवार के नोअका के समान है..
बिना मित्र के जीवन,सावन के पूर्णिमा के समान है..
बिना मित्र के जीवन,पूस के दिन के समान है..
बिना मित्र के जीवन,जीव विहीन ग्रहों के समान है..
सच कहूं तो बिना मित्र के जीवन,जीवन है ही नही..

एक मित्र जरूर बनाइये वो कोई भी हो सकता है...।
जिसपर आप विश्वास कर सके..।।



शनिवार, 3 अगस्त 2024

कभी उदास मत होये..

आपने कभी सब्जी खरीदा है..??
आप किस तरह की सब्जी खरीदते है..
अक्सरहाँ ताजी सब्जी ही खरीदते होंगे..
और जो थोड़ा बासी या खराब हो जाता है,उसकी कीमत कम हो जाती है..।।

आपने कभी गुलाब के फूल का सुंगंध लिया है..
सबसे ज्यादा सुगंध उन फूलो में रहता है,जो ताजी हो..
बासी फूल तो भगवान पे भी नही चढ़ाते है..
कभी सोचा है क्यों..??

प्रकृति का नियम ही है..
की इस प्रकृति में उसी का महत्व रहेगा जो जिंदा और ताजगी से लबरेज है..।।
आपने छोटे बच्चे को हंसते हुए या फिर रोते हुए देखा होगा..
आप रोते हुए, या फिर हंसते हुए बच्चे को देखकर आनंदित हुए..??

जरूर आप हंसते हुए बच्चे को देखकर ही आनंदित हुए होंगे..
रोते हुए बच्चे को देख कर आपके अंदर करुणा और दया का भाव आया होगा.. और आप खुद को असहाय महसूस कर रहे होंगे..।।

इसी तरह जब हम उदास होते है..
तो लोगों का हमारे प्रति सिर्फ दया का भाव जागृत होता है,मगर अफसोस वो कुछ कर नही सकते..और आपके उदासी में वो भी शामिल हो जाते है..
और ये सिलसिला चलता रहता है..एक से दो,दो से चार,और चार से आठ मालूम नही कंहा तक जाएगा..??
मगर आप इस सिलसिला को रोक सकते है..
कैसे..??
अगर आप अपनी उदासी को दूसरे के सामने जागृत ही न होने दे..
न किसी को पता चलेगा और न ही ये सिलसिला आगे बढ़ेगा..
अपने चेहरे पर हमेशा मुस्कान रखें..
भले अंदर कितना भी तकलीफ हो..।।

हमारी महत्वता तबतक ही है,जबतक हमारी सांस चल रही है..मगर हम अपनी महत्वता को अक्सरहाँ गिराते है,
जब-जब हम उदास होते है..।।

प्रकृति की नियति ही है खिलना,चाहे परिस्थिति कैसी भी क्यों न हो उसे खिलना ही है,
मगर हमने प्रकृति से दूरी बना ली है..
इसीलिए तो हम खिलना भूल गए है..।।

जबतक सांस चल रही है,
तबतक चेहरे पे मुस्कान रखिये..
प्रकृति रूपी माली का नजर आप पे जरूर पड़ेगा..
और उसकी कृपा जरूर होगी..😊

क्योंकि हमें भी खिलखिलाते हुये बच्चे ही पसंद आते है..।।

शुक्रवार, 26 जुलाई 2024

हम खुद..

हम खुद गुनाहगार है,
उन हर परिस्थितियों के लिए,
जिन परिस्थितियों से आज जूझना पड़ रहा है..।।

हम खुद कसूरवार है,
उस हर सजा के लिए,
जिसे आज हम भुगतने को मजबूर है..।।

हम खुद जिम्मेदार है..
उन सभी असफलताओं के लिए
जिससे आज सामना करना पड़ रहा है..

नसीब और भाग्य तो..
असफल लोगों के लिए, 
सबसे अच्छी बैसाखी है..
जो ताउम्र अपनी असफलताओं को छुपाने का काम करती है..

कुछ ही खुशनसीब होते है..
जो अपने नसीब और भाग्य को दरकिनार कर,
अपने कर्मो के द्वारा 
अपनी असफलताओं को सफलता में परिवर्तित कर पाते है..।।


                सफलता प्रकृति की नियति है..
                 अगर आप प्रकृति से जुड़े है,
        तो वो आपको सफल करा के ही मानेंगी..।।

रविवार, 21 जुलाई 2024

गुरु पूर्णिमा और असाढ़ की पूर्णिमा..

आपने कभी सोचा है कि गुरु पूर्णिमा आखिर आसाढ़ माह में ही क्यों मनाया जाता है..??

आसाढ़ माह की पूर्णिमा बादलों से ढकी होती है..
ये अंधकार रूपी बादल शिष्य है..
जिसे गुरु रूपी चंद्रमा की रोशनी उस अंधकार को दूर करती है..।।

गुरु की उपमा चन्द्रमा से ही क्यों कि गई है..??

चंद्रमा की अपनी रोशनी नही होती है,वो सूर्य की रोशनी लेकर पृथ्वी पर बिखेरती है..जो हमें शीतलता,माधुर्यता का अहसास दिलाती है..।।
यंहा सूर्य भगवान स्वरूप है,जो हमेशा एक स्वरूप में होता है,मगर उसके ताप का परिणाम अलग-अलग होता है..।

मगर गुरु रूपी चंद्रमा अमावश की अंधकार से होकर गुजरता है,और पूर्णिमा के प्रकाश के रूप में चमकता है..
शिष्य जिस अवस्था मे होते है,उस अवस्था से गुरु को भी गुजरना होता है,इसीलिए वो अपने शिष्य के बारे में सबकुछ जानते है..।

कबीरदास जी कहते है-
 " गुरु,गोविंद दोऊ खड़े,काके लागे पाऊ
    बलिहारी गुरु आपने,गोविंद दियो मिलाय"।



गुरु दो शब्दों से मिलकर बना है- गु+रु
यंहा गु मलतब अंधकार होता है
और रु मतलब अंधकार दूर करने वाला..।।
हमारे जिंदगी से अंधकार रूपी बादल तब तक नही छटेगी जबतक गुरु की शीतलता रूपी रोशनी हमपे नही पड़ेगी..।।

आज भागदौड़ भरी जिंदगी में हम गुरु को भूल गए है..
हम शिक्षक,परिशिक्षक,अध्यापक,प्रोफेसर, मोटिवेशनल स्पीकर, कोच को ढूंढ रहे है,जो हमारे जिंदगी को आसान तो बना रहे है,मगर हमारे जिंदगी से अंधकार को दूर नही कर पा रहे है..
जिसे हम आज गुरु मानने की होड़ में लगे है..वो आज खुद मीडिया,सोशल मीडिया के माध्यम से प्रकाशमान है,उनकी अपनी आभा है ही नही..
अगर आज हमें सच्चा गुरु मिल भी जाये तो हम उन्हें स्वीकार नही कर पाएंगे..
क्योंकि हममें स्वयं वो योग्यता है ही नही..।

क्योंकि एक गुरु को शिष्य चाहिए ...
और हममें शिष्य की योग्यता है ही नही..
शिष्य मतलब समपर्ण,समर्पण इतना कि शीश तक चढ़ाने को जो न हिचके, वही शिष्य है..

क्या हम में वो समर्पण है..??
आज हम शिष्य की जगह छात्र,विद्यार्थी,ग्राहक,क्लाइंट, इत्यादि बन गए है..।।

मगर जब हम थक-हार जाते है,और अंतर्मन से आवाज निकलती है, तो गुरु की शीतलता हमें अवश्य प्राप्त होती है..।
क्योंकि गुरु का स्थान कोई ले ही नही सकता,क्योंकि गुरु का कोई पयार्यवाची है ही नही..।।

           "गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः । 
           गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः"॥





Yoga for digestive system