मंगलवार, 28 अक्टूबर 2025

परेशानियां

हम सब परेशानियों से घिरे हुए है,शायद ही कोई होगा जिसके जीवन में परेशानी न हो..।
मगर हम में से कई लोग ऐसे होते है,जिसके जिंदगी में हमारे आप से ज्यादा परेशानियां होता है,मगर हमें पता नही चलता..।
आखिर क्यों..??
क्योंकि हममें से कई लोग परेशानियों से निपटना जानते है,और परेशानी को समझते है,इसीलिए किसी को महसूस नही होता की वो परेशानियों से घिरे हुए है..।।

मगर हममें से कई लोग ऐसे होते है जो परेशानियों से निपटना नही जानते,और ना ही परेशानियों को समझने की कोशिस करते है, इसलिए ताउम्र परेशानियों से घिरे होते है..।।

कभी घर से बाहर निकलिये और अपने चारों तरफ देखने की कोशिस कीजिये, तब अहसास होगा कि हमसे भी ज्यादा परेशानियों दूसरों के जिंदगी में है..।।

कभी परेशानियों से घबराए नही बल्कि परेशानियों का सामना करें..क्योंकि परेशानियों ही हमारे जिंदगी में निखार लाता है.।।


सोमवार, 6 अक्टूबर 2025

मेरी दादी माँ..

दुनिया में माँ से भी ज्यादा अगर कोई प्यार करता है तो,वो है दादी माँ..और अगर आप पहले पोते/पोती हो तो मत पूछिए की कितना प्यार मिलेगा..।।
दादी इतना प्यार करती है कि उनके प्यार का अहसास ही नही होता..
उनका प्यार,उनका व्यवहार लगने लगता है,शायद इसीलिए उनके प्यार को हम अहसास नही कर पाते,जब दूर चली जाती है,तब अहसास होता है..।



मेरी दादी माँ..उनके बारे में जितना लिखू उतना कम है..।
मैं बचपन से ही दादी माँ के करीब था शायद इसलिए उनका प्यार ज्यादा पाने का मौका मिला..।

मेरी दादी माँ गलत घर में पैदा हो गई थी..।अगर वो किसी राजनीतिज्ञ के घर मे पैदा हु
हुई होती, तो आज शायद उन्हें सब जानता।अगर वो किसी उद्योगपति के घर पैदा हुई होती, तो बहुत बड़ी उद्योगपति होती..।अगर किसी कलाकार,लेखक के घर पैदा हुई होती तो अच्छा कलाकार/लेखक होती..।मगर प्रकृति को कुछ और ही मंजूर था..।

उनमें जितना करुणा और प्रेम था,उतना ही क्रोध भी..उनमें सब गुण था..।
भगवान ने उन्हें सब सुख दिया..लगभग उनकी सब इच्छायें पूर्ति हो ही गई,अगर कुछ बाकी रह भी गया तो,सब इच्छायें सबकी कंहा पूरी होती है..।।
दादीमाँ के कथनानुसार उन्होंने गरीबी के साथ संघर्ष भी देखा बचपन मे भी और शादी के बाद भी(जब बाबा दुर्घटना में महीनों घायल रहें) मगर भगवान के दया से उन्हें सबसु ख मिला..इसलिए शायद उन्हें भगवान से शिकायत ना के बराबर रही होगी..।

कुछ लिखने का मन नही करता..
शायद अपने साथ दादी माँ अपनी स्मृतियां भी ले गई..।
या फिर लिखने को इतना कुछ है कि कुछ लिख नही पाता..।


हमारा प्रथम प्राथमिकता..

हम सबके जीवन में शुरू से लेकर अंत तक किसी न किसी चीज की प्राथमिकता बनी रहती है..।
किसी के लिए परिवार,किसी के लिए समाज तो किसी के लिए पैसा पहला प्राथमिकता होता है..।हम ता उम्र इसे और बढ़ाने में लगे रहते है।जो कि सही भी है..अगर जिंदगी में हम किसी चीज को प्राथमिकता नही देंगे तो फिर जिंदगी का महत्व ही क्या रह जाएगा..।

मगर एक वक्त ऐसा आता है,जब हमारे पास पैसा,समाज,परिवार सबकुछ होते हुए भी,कोई काम का नही रह जाता आखिर क्यों..??
क्योंकि हमारा स्वास्थ्य हमारा साथ नही दे रहा होता..
आखिर क्यों..??
क्योंकि हमने अपने स्वास्थ्य को,कभी प्राथमिकता नहीं दी।
जबकि हमारा प्रथम प्राथमिकता हमारा स्वास्थ्य होना चाहिए..।

अगर आप स्वस्थ है तो आप सबकुछ पा सकते है..
अगर आप अस्वस्थ है तो सब कुछ होते हुए भी किसी चीज का उपभोग नही कर सकते..।।

हममें से अधिकांश लोग पूरी उम्र पैसा और परिवार के पीछे खर्च कर देते है..मगर अपने ऊपर कुछ वक्त खर्च नही करते...।।मगर जब आप कुछ दिनों के लिए बीमार होते है..तब ये पैसा और परिवार साथ तो होता है,मगर उस असहनीय पीड़ा से खुद ही जूझना पड़ता है..।।

इसीलिए हमारी प्रथम प्राथमिकता हमारा स्वास्थ्य होना चाहिए..
अपने लिए हरेक रोज समय निकालिय और अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखिये...।।
"क्योंकि स्वास्थ्य से बड़ा कोई धन नही है, और न ही कोई मित्र है"

पुनर्वित्तं पुनर्मित्रं पुनर्भार्या पुनर्मही। एतत्सर्वं पुनर्लभ्यं न शरीरं पुनः पुनः ॥
हरेक चीज को हम दुबारा पा सकते है,मगर अपने स्वास्थ्य को नही,इसलिय अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखिये..।।

रविवार, 5 अक्टूबर 2025

प्यार की पाँति...कोई होती..

कोई होती जो मुझे भी खिड़की के ओट से देखती..
मेरी नजर पड़ते ही,नजरें झुका लेती..।

कोई होती जो मुझे देखने को,
 घंटों टकटकी लगाए रहती..
जब मैं उसे देखता,तो मुँह फेर लेती..।

कोई होती जो मुझसे भी, प्यार का इजहार करने का बहाना ढूंढती..
मगर बहाना मिलने पर भी, प्यार का इजहार न कर पाती..।

कोई होती जो मुझसे भी,जी जान से प्यार करती..
मगर मैं कमबख्त उसके प्यार का कद्र न करता..।

कोई होती जो दूसरे का गुस्सा भी मुझपे उतारती..
और मैं चुपचाप उसके गुस्से को अनसुना कर देता..।

कोई होती जो मुझे भी खिड़की के ओट से देखती..



शनिवार, 4 अक्टूबर 2025

आप कितने अच्छे हो..ये मायने नही रखता..

आप कितने अच्छे व्यक्ति को जानते है..अतीत से लेकर वर्तमान तक..??
आप जितने भी व्यक्ति को जानते है,उनमें एक बात सामान्य है...
पता है क्या बात सामान्य है..??
वो अपने जिंदगी में सफल है..।।



ये मायने नही रखता की आप अच्छे है,या बुरे..।
मायने ये रखता है कि आप अपने जिंदगी में सफल है या असफल..।
क्योंकि अच्छे और बुरे का मूल्यांकन सबके लिए अलग-अलग है..
आपको जो अच्छे लगते है,हो सकता है वो किसी और को बुरा लगता है, जो आपको बुरा लगता है,हो सकता है वो किसी और को अच्छा लगे..।।
आप वर्तमान में ही,किसी सफल व्यक्ति को ले..या फिर जिसे आप अपना रॉल मॉडल मानते है,हो सकता है दूसरे के नजर में उनकी उतनी अहमियत न हो..।।
मगर आप दोनों उस सख्स को इसलिए जानते है कि..
वो अपने जीवन मे सफल है..।।

इसीलिए कौन अच्छा कहता है,कौन बुरा कहता है..
या फिर परिवार,सगे-संबंधी,समाज और दुनिया क्या कहती है..
उसपर ध्यान मत दे..सिर्फ और सिर्फ अपने सफलता पे ध्यान दे..।
क्योंकि जब आप अपने जिंदगी में सफल हो जाएंगे..
तो सबके बोल बदल जाएंगे..।।

अहमियत..

"लोगों की अहमियत का पता,हमें तब चलता है,
 जब वो हमसे कुछ पल,कुछ दिन,कुछ महीनों,कुछ साल या फिर हमेशा के लिए हमसे दूर चले जाते है.."।

हमारे जिंदगी में कुछ लोगों की अहमियत पानी के बुलबुले के समान क्षणभंगुर होता है..ये ऐसे लोग होते है जिससे हम एक क्षण के लिए मिलते है..।(ये लोग कौन हो सकते है..??)इस तरह के लोग अक्सरहाँ हवा के झोंके के साथ जीवन में आते है,और चले जाते है..मगर कभी-कभी इनमें से कुछ लोग ऐसे होते है,जिनकी अहमियत जिंदगी में ताउम्र बनी रहती है..।।



कुछ लोग ऐसे होते है..जो हमारे जिंदगी को संवारने का काम करते है..(ये लोग कौन है..??)मगर शायद ही हम उन सबकी अहमियत को समझ पाते है..उनमें से कुछ ही लोग होते है,जो हमें भाते है,जो हमें प्रभावित करते है,और wo ताउम्र यादों में बने रहते है..।


कुछ ऐसे होते है..जो जिंदगी में रंग भरते है..अगर वो न होते तो जिंदगी कितना रंगहीन होता..(ये लोग कौन हो सकते है..??)इनके साथ बिताए हर पल खास थे,ये वही लोग थे,जो मुझसे भी झगड़ते और मेरे लिए दूसरों से भी झगड़ते..।ये वही कमीने यार है जो कभी प्रसंशा के झाड़ पे चढ़ाते तो कभी उसी के आड़ में झाड़ में फंसाते..।जिंदगी ज्यों-ज्यों आगे बढ़ती जाती तो कई कुछ पीछे छूटते जाते..एक वक्त पे सब पीछे छूट जाते..।मगर उनमें से कुछ से पीछा नही छूट पाता..क्योंकि उनके बिना जिंदगी की अहमियत कंहा है..।।


आपने कभी सोचा है,सूरज न होता तो क्या होता..??

•जिंदगी में इसी तरह कुछ लोग होते है..जो जिंदगी में, हमेशा सूरज की तरह चुपचाप हमारे जिंदगी को सवार रहे होते है..।अगर सूरज न होता तो इस पृथ्वी पर जिंदगी न होता.. उसी तरह अगर वो लोग न होते तो हम न होते..मगर हमें, जिस तरह सूरज की अहमियत का पता नही चलता,उसी तरह उनकी अहमियत का पता नही चलता..।
जिस तरह कड़कती ठंड में जब सूरज नही होता है,तब उसके अहमियत का अहसास होता है..उसी तरह उनलोगों की अहमियत का तब अहसास होता है,जब वो या हम उनसे दूर हो जाते है,या दूर चले जाते है..या फिर बहुत दूर चले जाते है..।।.


          


वो पास थे,तो उनकी अहमियत का अहसास नहीं था..
वो अब दूर है,तो उनकी अहमियत का अहसास हो रहा है..।
वो फिर जब पास आएंगे तो फिर उनकी अहमियत का अहसास नहीं होगा..
वो फिर जब दूर चलें जाएंगे,तो फिर उनकी अहमियत का अहसास होगा..।

अगर वो फिर कंही बहुत दूरररर...चल गए..
तो हम फिर मुँह लटकाएँगे...और अश्रु बहाएंगे..
और उनकी अहमियत का,जिंदगी भर गुणगान करेंगे..।

वो पास थे तो उनकी अहमियत का अहसास नही था...

गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025

राष्ट्र,राष्ट्रपिता और गांधी..

क्या आप अल्बर्ट आइंस्टीन को जानते है..??
शायद जानते ही होंगे..
उन्होंने एकबार एक व्यक्ति के लिए कहा था -
" आने वाली पीढियां शायद ही विश्वास करेगी कि,ऐसा कोई हांड-मांस का व्यक्ति इस धरती पर चला था"।
पता है ये लाइने आइंस्टीन ने किसके बारे में लिखा था..कोई और नही वो "राष्ट्रपिता गांधी" थे..।।


आज सोशल मीडिया पे या फिर आपके घर के ही कोई सदस्य गांधी के बारे में अपमानजनक बातें करते हुए नजर आ जाएंगे..।
पता है क्यों..??
क्योंकि उन्होंने गांधी के बारे में खुद से कुछ पढ़ा ही नही है,अगर कुछ सुना है,या फिर देखा है, तो ऐसे लोगों को जो गांधी से नफरत करते है..क्योंकि जब हम किसी के कद की बराबरी नही कर पाते,तो उसके कद को गिराने लगते है..।

एक बात पता है आपको..गांधीजी को राष्ट्रपिता से सर्वप्रथम किसने संबोधित किया था...??
जरा सोचिए..शायद एक या दो नाम जेहन में आया होगा..अगर उसमें से कोई एक सही नाम हो तो अपना पीठ ठोकिये..।
वो व्यक्ति कोई और नही राष्ट्र का हीरो सुभाषचंद्र बोस थे..।।


आखिर सुभाष चंद्र बोस की क्या मजबूरी रही होगी कि उन्होंने रंगून(म्यांमार) के रेडियो स्टेशन से 1944 में उन्हें राष्ट्रपिता कहकर उनसे स्वतंत्रता की लड़ाई में उनसे आशीर्वाद मांगा..।
जबकि दोनों में वैचारिक मतभेद था एक अहिंसा के तो दूसरे सशत्र विद्रोह के समर्थक थे..।।
बोस की कोई मजबूरी रही होगी या फिर वो गांधी के व्यक्तित्व से अवगत थे..(एक बात और राज की बात बताता हूँ😊 बोस अकेले ऐसे व्यक्ति थे जो गांधी के आश्रम में जूते और चप्पल पहन कर अंदर जा सकते थे,और चाय सिर्फ उनके लिए ही आश्रम में बनती थी)

एक आधुनिक राष्ट्र का निर्माण कैसे होता है..??
दुनिया का कोई भी राष्ट्र का नाम मन मे सोचें..और गूगल पे सर्च करें..
उसकी भाषा,धर्म,नृजातीय समहू,और भौगोलिक अवस्थिति देखें..
आपको हरेक राष्ट्र में एक चीज कॉमन दिखेगी..
उस राष्ट्र की अधिकतम आबादी, कोई एक भाषा,या कोई एक धर्म,या कोई एक नृजातीय समूह की बहुलता अधिकतम दिखेगी,या फिर उसकी भौगोलिक स्थिति बिल्कुल अलग होगी..।

अब अपने भारत को देखें..
•यंहा कितने धर्म है..प्रमुखता से 8 धर्म है..
•यंहा कितने भाषा है..आठवीं अनुसूची में 22 भाषा शामिल है,जबकि उन सूची में शामिल कुछ भाषा से ज्यादा बोलने वाले अन्य भाषी लोग है..
•यंहा कितने नृजातीय समूह है..PVTG में 75 जनजाति शामिल है जबकि आधिकारिक रूप से इनका संख्या 705 है..।।
•भारत को भौगोलिक रूप में 8 भागों में विभाजित किया गया है..।



इतने विविध आधुनिक भारत को एक सूत्र में आखिर सर्वप्रथम किसने बांधने का प्रयास किया..??
आधुनिक भारत(1857 के बाद का समय) को अगर देखें तो उस समय ऐसा कोई व्यक्तित्व नहीं था जो पूरे भारत का नेतृत्व करता हो..
हरेक व्यक्ति अपने-अपने क्षेत्र में कार्यरत थे..नरमपंथी कोट और टाई लगाकर अंग्रेज को चिट्ठी लिख रहे थे तो गरमपंथी शहरों में पत्र और पत्रिकाओं के माध्यम से या फिर कभी शहर के सड़को पे अंग्रेज का विरोध कर रहे थे..।
जबकि आजादी के समय तक शहरी आबादी 17% के आसपास ही था..क्या सिर्फ शहरी लोगों के सहायता से ही अंग्रेज से आजादी और राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता था..।।

आखिर वो शख्स कौन था जिसने भारत की आजादी के लिए भारत के उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम के सुदूर क्षेत्र तक राष्ट्र के भावना को पहुँचाया..वो सख्स कोई और नही बल्कि गांधी जी थे..।

उनसे पहले कोई गाँव की सुध लेने वाला नही था,गांधी पहले सख्स थे जिन्होंने हर सख्स को अहसास कराया कि भारत अंग्रेज से आजादी पाकर एक स्वतंत्र राष्ट्र का निर्माण करेगा..।।
गांधी के आंदोलन में बच्चे,बूढ़े,जवान,महिलाये तक शामिल होते थे..
न धर्म,न जात,न पात सबकों भुलाकर सबका एक ही उद्देश्य उन्होंने बना दिया..अंग्रेजो से भारत की आजादी..।।

गांधी के विचारों से हम असहमत हो सकते है,मगर हम उन्हें नकार नही सकते..।।

ऐसा नही है कि गांधी नही होते तो भारत को आजादी नही मिलता..मगर क्या आजादी का ये स्वरूप होता..??

गांधी खुद में एक विश्वविद्यालय थे..जिसने नेहरू,पटेल,सुभाष से  लेकर भगत सिंह तक को आजादी के लिए तैयार किया,उन्होंने कई पौध तैयार किया जो कुछ बड़े होकर अलग रास्ता अख्तियार करके देश की आजादी के लिए लड़े..।।
आज भी उनके पौध अन्य रूप में कार्यरत है..भले ही वो स्वयं को उनसे नही जोड़ते मगर वो स्वयं जानते है कि उनकी जड़ें आज भी वंही से जुड़ी हुई है..।।

भारत के साथ और उसके बाद कई देश आजाद हुए..आज उनकी स्थिति देखें और भारत की स्थितियों को देखें..आखिर क्यों कई देश बिखर गए जबकि भारत दिन-प्रतिदिन मजबूत हो रहा है..??

क्योंकि अन्य देशों को आजादी सशत्र संघर्ष द्वारा मिला तो कइयों को अमेरिका के दबाब में,जिस कारण उस देश के हरेक नागरिक तक राष्ट्र की महत्वता नही पहुंच पाया,वो एक जुट नही हो पाए..
जबकि भारत के साथ इसके विपरीत हुआ,भारत के आजादी के लड़ाई में पूर्वोत्तर भारत से लेकर दक्षिण सुदूर भारत तक आजादी की गूंज थी..और हरेक जुबां पे गांधी का नाम था..गांधी से सब अवगत थे..क्योंकि गांधी ने सब कुछ देश के लिए न्यौछावर कर दिया था..।।

वो विश्व के इकलौते ऐसे नायक है जो आजादी की लड़ाई का नेतृत्व करने के बाद भी सक्ता से दूर रहें..।।

मगर आज भी कुछ लोगों को..गांधी विलेन दिखते है..
तो मैं उनसे पूछना चाहता हूं..उस समय आपके बाप,दादा,परदादा क्या कर रहें थे..??और आप स्वयं आज क्या कर रहें है,राष्ट्र की प्रगति में आपका क्या योगदान है..??
आप जिसे सुन कर गांधी का विरोध कर रहें है..उनके बाप-दादा उस समय क्या कर रहें थे..??

आप गांधी के विचार से असहमत होइए..इसमें कुछ बुरा नही है..।
मगर हरेक चीज के लिए गांधी को ही कसूरवार मत ठहराईये...।
क्योंकि गांधीजी और उनके अनुयायियों को अब आपके सवालों का जबाब देने का मतलब नही है..क्योंकि आपने खुद कभी इतिहास का किताब ही नही पलटा है..😊।

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Yoga for digestive system