गुरुवार, 12 मार्च 2026
महिलाएं पुरुष से बेहतर क्यों है..??
बुधवार, 11 मार्च 2026
No Smoking🚭 Day..
क्या आपको पता है..भारत में हरेक साल स्मोकिंग🚬 के कारण 14 लाख से ज्यादा लोगों की मृत्यु हो जाती है..।
आपको ये जानकर और हैरानी होगी कि सेकंड हैंड स्मोकिंग(SHS)( दूसरे के पीने के कारण प्रभाव) के कारण 4 लाख से ज्यादा लोगों की मृत्यु हो जाती है..।(अगर आप स्मोकिंग नही करते मगर आपके साथ रहने वाले लोग अगर स्मोकिंग करते है तो उनसे दूरियां बना ले.)
भारत की 29% आबादी आज स्मोकिंग 🚬के चंगुल में फंसा हुआ है..इसमें सिगरेट के अलावा स्मोकलेस टोबेको(बिना धुंए वाला तंबाकू) जैसे पान मसाला,खैनी इत्यदि का सेवन करने वाले दुनिया में 70% भारतीय ही है..।।
क्या आपको पता है..हावड़ा ब्रिज कमजोर हो गया है..क्योंकि हम भारतीयों ने गुटखा खाकर थूक-थूक कर उसे कमजोर कर दिया है..🤔।
भारत दुनिया मे दूसरा सबसे बड़ा तंबाकू का उपभोक्ता और उत्पादक है.. जिसके कारण औसतन 6-10 साल पहले लोग अपनी जीवन गंवा देते है..। क्योंकि लोग फेफड़ों के कैंसर(80%मौतें धूम्रपान के कारण),स्वसन रोग,हृदय रोग, टाइप-2 डाइबिटीज, हड्डियां संबंधित रोग, प्रजनन क्षमता का कम होना, आंख की समस्या, मानसिक समस्या.. इत्यादि रोगों से लोग जूझ रहे है..।
आपको जानकर हैरानी होगी कि..
भारत की तंबाकू कंपनियां का राजस्व हरेक साल 10% के औसत से निरंतर बढ़ता ही जा रहा है..।
जबकि सरकार के कुल राजस्व में तंबाकु से होने वाली हिस्सेदारी 2-2.5% है..सरकार हरेक साल तंबाकु उत्पादों पे GST, सेस और एक्साइस टैक्स लगाकर लगभग 50000₹करोड़ से लेकर 60000₹ करोड़ का राजस्व हासिल करता है..।
जबकि सरकार को तंबाकु से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान की भरपाई में सिर्फ 1.77 लाख करोड़ है..।यानी सरकार को लगभग 3-4 गुणा अधिक खर्च करना पड़ता है..।जोकि एक मजाक है लगता है..मगर सोचने वाली बात ये है कि,अगर सरकार को नुकसान हो रहा है तो वो इसे पूर्ण प्रतिबंधित क्यों नही करते जबकि वास्तविकता ये है कि सरकार के राजस्व में हरेक साल इसकी हिस्सेदारी बढ़ती ही जा रही है..।।
क्या हम स्मोकिंग छोड़ सकते है..??
शायद नही,या फिर हां.. ये हमपे निर्णय करता है,और हमारे माहौल पे और परवरिश पर निर्भर करता है..।।
अगर आप स्मोकिंग करते ही है,तो प्लीज् सार्वजनिक जगहों पे ना करें.. और प्लीज् गुटखा,पान मसाला,खैनी खाकर सार्वजनिक जगहों को रंगीन न बनाये..।
जब हम जानकर भी कोई गलती करते है,तो फिर वो गलतियां हमारे लिए अपराधबोध नही रह जाता,जबतक की उसकी कीमत न चुकाना पड़ जाए।
स्मोकिंग से छुटकारा सिर्फ महिलाएं ही दिला सकती है..मगर अफसोस आज महिलाएं खुद इसके गिरफ्त में आ रही है...।।
सोमवार, 9 मार्च 2026
इस T-20 विश्वकप से आपने क्या सीखा..??
रविवार, 8 मार्च 2026
मैं खो गया हूँ..
शनिवार, 7 मार्च 2026
वोमेन्स डे:अधिकार,न्याय और अधिकार के लिए..
गुरुवार, 5 मार्च 2026
Yoga for Cardiovascular
हृदय स्वास्थ्य ❤️ (Cardiovascular Health) के लिए योग और प्राणायाम के वैज्ञानिक लाभ और साक्ष्य नीचे दिए गए हैं:
◆ ताड़ासन (Mountain Pose) - रक्तचाप नियंत्रण
- वैज्ञानिक साक्ष्य: शोध के अनुसार, ताड़ासन जैसी स्थिर मुद्राएं स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (Autonomic Nervous System) को संतुलित करती हैं। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए प्रभावी है जो उच्च रक्तचाप (Hypertension) से जूझ रहे हैं, क्योंकि यह रक्त वाहिकाओं के तनाव को कम करता है।
- प्रभाव: यह हृदय की मांसपेशियों पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को कम करता है और शरीर में रक्त के सुचारू प्रवाह को सुनिश्चित करता है।
◆ सेतुबंधासन (Bridge Pose) - धमनियों का स्वास्थ्य
- वैज्ञानिक साक्ष्य: यह आसन छाती और हृदय क्षेत्र को फैलाता है, जिससे धमनियों (Arteries) में लचीलापन बढ़ता है। वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि यह आसन 'बैरोरेसेप्टर' (Baroreceptor) संवेदनशीलता को बढ़ाता है, जो शरीर के रक्तचाप को नियंत्रित करने वाले प्राकृतिक सेंसर होते हैं।
- प्रभाव: यह हृदय में ऑक्सीजन युक्त रक्त के संचार को बढ़ाता है और कोलेस्ट्रॉल के जमाव को रोकने में मदद करता है।
◆ भ्रामरी प्राणायाम (Humming Bee Breath) - नाइट्रिक ऑक्साइड का उत्पादन
- वैज्ञानिक साक्ष्य: भ्रामरी के दौरान निकलने वाली 'हम्मिंग' ध्वनि नाक की गुहाओं (Nasal cavities) में नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) के स्तर को 15 गुना तक बढ़ा देती है। नाइट्रिक ऑक्साइड एक शक्तिशाली वासोडिलेटर है, जो रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करता है और हृदय को आराम देता है।
- प्रभाव: यह तनाव को कम करके 'स्ट्रेस-इंड्यूस्ड' हार्ट अटैक के जोखिम को काफी हद तक कम कर देता है।
◆ अनुलोम-विलोम (Alternate Nostril Breathing) - हार्ट रेट वेरिएबिलिटी (HRV)
- वैज्ञानिक साक्ष्य: 'इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कार्डियोलॉजी' के अनुसार, यह प्राणायाम Heart Rate Variability (HRV) में सुधार करता है। उच्च HRV का अर्थ है एक मजबूत और लचीला हृदय जो तनाव को आसानी से झेल सकता है।
- प्रभाव: यह हृदय की धड़कन को स्थिर करता है और अतालता (Arrhythmia) जैसी समस्याओं से बचाता है।
नीतीश कुमार: बिहार का,एक अध्याय का अंत..
बिहार की राजनीति में जब भी 'सुशासन' (Good Governance) शब्द का जिक्र होगा, तो नीतीश कुमार का नाम सबसे ऊपर आएगा।
दशकों तक बिहार की कमान संभालने के बाद, उनका कार्यकाल केवल सत्ता का खेल नहीं, बल्कि एक पिछड़े राज्य को मुख्यधारा में लाने का संघर्ष रहा है।
क्या यह वास्तव में एक अध्याय का अंत है?
शायद हाँ, क्योंकि नीतीश कुमार ने बिहार को उस 'जंगलराज' की छवि से बाहर निकाला जिसने राज्य को वर्षों पीछे धकेल दिया था।आज वो मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा सदस्य बनने के लिए नामंकन भर रहें है..।
आइए नजर डालते हैं उनके उन महत्वपूर्ण योगदानों पर जिन्होंने बिहार की तस्वीर बदली।
◆ कानून व्यवस्था: 'जंगलराज' से 'सुशासन' तक
नीतीश कुमार के सत्ता संभालते ही उनकी सबसे पहली प्राथमिकता बिहार की चरमराई कानून व्यवस्था को सुधारना था। उन्होंने अपराधियों में कानून का डर पैदा किया और स्पीडी ट्रायल के जरिए बाहुबलियों को सलाखों के पीछे भेजा।
- परिणाम: शाम ढलने के बाद घरों से निकलने में डरने वाले बिहार में लोग अब बेखौफ सड़कों पर नजर आने लगे।
◆ महिला सशक्तिकरण: 'साइकिल' से बदली सोच
नीतीश कुमार ने समझा कि बिहार तब तक प्रगति नहीं कर सकता जब तक उसकी आधी आबादी पीछे है। उनकी 'मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना'🚲 ने ग्रामीण बिहार की शिक्षा व्यवस्था में क्रांति ला दी।
- पंचायती राज में आरक्षण: बिहार देश का पहला ऐसा राज्य बना जिसने पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 50% आरक्षण दिया।
- शराबबंदी: सामाजिक सुधार की दिशा में उन्होंने कड़ा कदम उठाते हुए शराबबंदी लागू की, जिसका उद्देश्य घरेलू हिंसा को कम करना और गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारना था।
◆ बुनियादी ढांचा: सड़कों और पुलों का जाल
आज बिहार के किसी भी कोने से राजधानी पटना पहुँचने में लगने वाला समय काफी कम हो गया है। नीतीश सरकार ने सड़कों और पुलों के निर्माण को अपनी प्राथमिकता बनाया।
- हर घर बिजली: 'सात निश्चय' योजना के तहत बिहार के लगभग हर गाँव और घर तक बिजली पहुँचाई गई, जो एक समय में नामुमकिन सा लगता था।(आज इसी योजना के तर्ज पर पूरे भारत मे हरेक घर तक बिजली पहुचाई जा रही है)
◆ शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार
नीतीश कुमार के कार्यकाल में बड़ी संख्या में शिक्षकों की भर्ती हुई और स्कूल छोड़ने वाले बच्चों (Drop-out rate) की संख्या में भारी गिरावट आई। स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) की हालत सुधारी गई और मुफ्त दवाओं के वितरण की व्यवस्था की गई।(बिहार भारत के सबसे अग्रणी राज्यों में से है जो सर्वाधिक मुफ्त दवा का वितरण करता है)
क्या रही चुनौतियां..?
उनकी उपलब्धियों के बीच कुछ मोर्चों पर आलोचनाएं भी हुईं:
- पलायन: रोजगार के अवसरों की कमी के कारण आज भी बिहार का युवा दूसरे राज्यों की ओर रुख करता है।
- भ्रष्टाचार: निचले स्तर पर प्रशासनिक भ्रष्टाचार पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पाई।
- राजनीतिक अस्थिरता: बार-बार गठबंधन बदलने की उनकी छवि ने उनकी विश्वसनीयता पर सवाल भी उठाए।
नीतीश कुमार का दौर बिहार के लिए बुनियादी बदलावों का दौर था। उन्होंने बिहार को 'सड़क, बिजली और पानी' जैसे मूलभूत मुद्दों पर आत्मनिर्भर बनाया। इतिहास उन्हें एक ऐसे मुख्यमंत्री के रूप में याद रखेगा जिसने एक बीमारू राज्य को विकास की पटरी पर खड़ा किया।
भले ही वो अब राज्यसभा के सदस्य बन गए है, लेकिन बिहार के आधुनिक इतिहास में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।
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क्या सोच रहे हो तुम..?? यही सोच रहा हूँ कि.. क्या सोच रहा हूँ मैं..। सच कहूं तो.. कुछ तो सोच रहा हूँ मैं... मगर अफसोस क्या सोच रहा हूँ.. यह...
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हम सब खास(special) दिखना चाहते है.. मगर सवाल है क्यों..?? इसका सबसे बड़ा कारण है कि हम स्वयं को खास समझते ही नही..। जब हम स्वयं को खास समझने ...
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अतीत से लेकर वर्तमान तक,हम सभी दुःखो से घिरे हुए है.. आखिर क्यों..?? इस क्यों का जबाब हम अतीत से ही ढूंढते आ रहे है..हमारे ऋषियों-मनीषियों न...









