ना ही कुछ कहने को है..
ना ही कुछ पूछने को है..
इसीलिए मौन हूँ मैं..
मेरे मौन को तुम..
मेरी उदासी मत समझना..।
मेरे मौन में..
वो सबकुछ है..
जो इस शून्य में है..।।
अगर तुम इस शून्य को,समझ सकते हो..
तो मेरे मौन को भी,
समझ ही लोगे..।
इस शून्य से ही,तो मैं हूँ,
इस शून्य से ही,तो तुम हो..
और तुमको ही समझने को,
मौन हूँ मैं..
क्योंकि मौन ही तो..
शून्य से साक्षात्कार का सबसे सरल साधन है..।।
ना ही कुछ कहने को है..
ना ही कुछ पूछने को है..
इसीलिए मौन हूँ मैं..
मेरे मौन को तुम..
मेरी उदासी मत समझना..।
मेरे मौन में..
वो सबकुछ है..
जो इस शून्य में है..।।

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