आप आज भी बुरे है..
कुछ भी स्थायी नहीं है..
अगर कुछ स्थायी है..
तो आपका सोच..
जिसे आप जब चाहे तब बदल सकते है..।
आपका सोच ही आपको बुरा..
या फिर अच्छा बनाता है..।
तो क्यों नहीं हम अपने सोच को बदले..।।
जो बुरा हो गया..
उसके बारे में और सोच कर बुरा को न्योता मत दे..
बल्कि अच्छा सोचकर आनेवाले अच्छे कल को न्यौता दे..
जोकि आपके हाथ में है..
क्या आप तैयार है..??
अभी भी आप कसमकस में है..
आप सोच रहें है कि क्या ये संभव है..
बिल्कुल सम्भव है..
हमारा सोच ही असंभव को संभव..
और संभव को असंभव बनाता है..
तो देर किस बात कि..
तो चलिए नया शुरुआत करते है..।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें