कभी-कभी तुम भी कुछ लिखा करो..
कभी-कभी तुम भी कुछ कहा करो..।
मैं ही कबतक अकेले लिखता रहूंगा..
मैं ही अकेले कबतक बकता रहूंगा..।
कभी-कभी तुम भी कुछ लिखा करो..
कभी-कभी तुम भी कुछ कहा करो..।
जानता हूँ..मैं भी..
जानती हो..तुम भी..
हमदोनों के बीच की दूरियों को..
और..
हमदोनों के बीच के खाइयों को..।
कभी-कभी हमदोनों मिलकर दूरियां मिटाये...
कभी-कभी हमदोनों मिलकर खाइयों के गहराइयों का पता लगाएं..
कभी-कभी..तुम भी कुछ लिखा करो..
कभी-कभी तुम भी कुछ कहा करो..।।
यू मुँह मोड़ने से क्या होगा..
यू चुप रहने से क्या होगा..
जबतक नजरें मिलाओगे नहीं..
जबतक चुपिया तोड़ोगे नही..
तुम्हीं बताओ मैं कैसे समझ पाऊंगा..।
कभी-कभी तुम भी कुछ लिखा करो..
कभी-कभी तुम भी कुछ कहा करो..।
माना कि आता नही..
मुझे प्यार जताना..
तुम्हीं सिखाओ..
तुम्ही बताओ..
की कैसे जताए..
की कैसे बताये..।
कभी-कभी तुम भी कुछ लिखा करो..
कभी-कभी तुम भी कुछ कहा करो..।

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