मालूम नही क्यों..
तेरे साथ कुछ वक्त बिताने का मन करता है..।
मालूम नही क्यों..
तेरे कंधे पे सर् रखकर,
तेरे बारे में सबकुछ जानने का मन करता है..।
मालूम नही क्यों..
तेरे मौन को पढ़ने का मन करता है..।
मालूम नही क्यों..
तेरे गोद मे सर् रखकर..
तेरे चेहरे को पढ़ने को मन करता है..।
मालूम नही क्यों..
कुछ पल के लिए..
तुममें समाहित होकर अपना अस्तित्व खो देने का मन करता है..।
मालूम नही क्यों..
तुममें शून्यता का अहसास करने का मन करता है..।
मालूम नही क्यों..
तुममें शिवत्व का अहसास करने का मन करता है..।
मालूम नही क्यों..
मालूम नही क्यों..
मालूम नही क्यों..

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