शुक्रवार, 21 अप्रैल 2023

भारतीय vs पाश्चात्य शिक्षा



 क्या आपको पता है..

टिम कुक एक दिन में कितना कमाते है..??                     (टिम कुक को गूगल पे सर्च कर लीजिए)                  

औसतन 1 करोड़ से ऊपर प्रतिदिन कमाता है। भारत की लगभग 20% से ज्यादा आबादी अपने पूरे जीवनकाल में भी 1 करोड़ नही कमा पाती है।

टिम कुक बचपन में अखबार बेचा करते थे , फिर माँ के साथ फार्मेसी के दुकान पे काम करने लगे..।। टिम कुक को इंजीनियर बनना था तो उसने अमेरिका के ऑबोर्न विश्विद्यालय से इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में स्नातक किया फिर डूइक यूनिवर्सिटी से MBA किया..।।

कहने का तात्पर्य है,कि अगर आप पाश्चात्य देश मे पैदा हुए है तो आपके लिए शिक्षा सुलभ ही नही बल्कि गुनवक़्तापूर्ण मिलने की गारंटी है.. भले ही आप अमेरिका के बड़े शहरों में शिक्षा ले या फिर अमेरिका के किसी गाँव मे ले, शिक्षा का पैटर्न सामान है..।। हां थोड़ा बहुत सुविधा का अंतर हो सकता है। मगर आपको अमेरिका के सुदूर गाँव मे भी वही पढ़ाया जाएगा जो अमेरिका के उन्नतशील शहर में पढ़ाया जा रहा है..।। आपको किसी भी तरह की शिक्षा के लिए स्कॉलरशिप और ऋण के लिए भटकना नही होगा..। ये इतना ही सुलभ है जितना भारत में गुटका खरीदना।

और अब भारत की स्थिति देखिए...

जैसे-जैसे शिक्षा पर आप पैसा खर्च करते जाएंगे त्यों-त्यों आपको गुनवक़्तापूर्ण शिक्षा मिलता जाएगा..।।

भारत की शिक्षा व्यवस्था आज बहुत दयनीय अवस्था मे है.. आज से पहले कभी नही था..।।(70 सालों में)

भारत की शिक्षा व्यवस्था आज एवेरेस्ट और अरावली की तरह हो गई है..।।

ग्रामीण परिवेश में जो पढ़ रहा है वो शायद स्नातक तक की पढ़ाई के दौरान माउस नही पकड़ पायेगा..।।

और शहरी क्षेत्र में जो पढ़ रहे है आशा है वो 9th तक जाते -जाते जरूर माउस पकड़ लेंगे..।।

जो समृद्ध परिवार में पैदा हुए है वो स्कूल जाने से पहले ही माउस से परिचित हो जाएंगे..।।

अब आप जरा सोचिए कि अच्छी सैलरी किसे मिलेगा..??

हमारा संविधान समानता की बात करता है..??

किस समानता की बात करता है...।।

चाहे शिक्षा हो,स्वास्थ्य हो या किसी भी तरह की सुविधा की बात आती है ,वंहा असमानता फैली हुई है.. थोड़ी नही बहुत ज्यादा इतना कि इसे पाटने में कितने दशक लगेंगे..।।

अब आप जरा सोचिए ..??

क्या भारत मे अखबार बेचने वाला,करोड़पति बन सकता है।

(APJ अब्दुल कलाम के बारे में ख्याल मत लाइयेगा.. क्योंकि उन्हें गुनवक़्तापूर्ण शिक्षा मिल गया था)

जब तक सभी भारतीयों को गुववक़्तापूर्ण शिक्षा नही मिलेगी तबतक भारत कभी भी विश्वगुरु नही बन सकता है।

हम रामराज्य की बात करते है, मगर भूल जाते है कि राम के साथ पढ़ने वाला निषाद राज भी था जो एकसमान ही शिक्षा पा रहा था..

मगर वर्तमान परिदृश्य में राम जैसे धनाढ़्य वर्ग को गुनवक़्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है.. तो

निषाद राज जैसे लोगों को सिर्फ शिक्षा मिल रही है, जो धनाढ़्य वर्ग की सेवा कर सके। और मतदान के समय चुनाव चिन्ह को पहचान करके मत दे सके...।।

हम भारतीय को आज सिर्फ शिक्षा पर नही बल्कि गुववक़्तापूर्ण शिक्षा पर ध्यान देना जरूरी है।।

आज शिक्षा के लिए स्कॉलरशिप और ऋण आम छात्र के लिए इतना ही दुर्लभ है,जितना रेलवे का तत्काल टिकट का कंफर्म होना..।।


कितने लोग तो ये भी नही जानते होंगे कि आखिर गुनवक़्तापूर्ण शिक्षा किसे कहते है..??

जो आपको A फ़ॉर एप्पल ही नही बल्कि एप्पल क्या होता है, और किस तरह की जलवायु में उगता है,और इसका सेवन करने से क्या फायदा होता है..।।और एक apple और है जिसके ceo टिम कुक है, जो अभी भारत मे अपने स्टोर खोलने के लिए आये हुए है..। अगर ये सब बताया जाए तो यही है गुनवक़्तापूर्ण शिक्षा..।

जो हमें सोचने वाला प्राणी बनाये.. अगर न्यूटन ने apple को गिरते हुए देख कर सोचना शुरू न किया होता तो आज फिजिक्स अधूरी रहती..।।

जरा सोचिएगा क्या आपने कभी Apple  के बारे में इस तरह सोचा था..??


गुरुवार, 30 मार्च 2023

आप भी बन सकते है राम..??

आप भी बन सकते है राम...
कैसे..??



राम पूजनीय है...  आखिर क्यों...??                              आपने कभी सोचा... की आखिर राम इतने पूजनीय क्यों है..?  क्योंकि उन्होंने अपने कर्तव्यों का निर्वहन ईमानदारी से किया..  क्या हम कर रहे...??

सिर्फ कुछ गुण जो श्रीराम में था/है, उसे अपना कर आप भी राम बन सकते है...।। 

चलिए खुद को परखते है.. क्या वो गुण है हममें-                               
1. क्या हम अपने माता-पिता का सम्मान करते है..??
          अगर हां, तो ठीक है, अगर न में जबाब है तो सोचिए, क्या आपको राम को पूजने का अधिकार है..??                             हो सकता है कुुुछ लोग का तर्क हो कि पिता भी दशरथ जैसा  होना चाहिए..?? आपके पिता के जीवन मे दशरथ से ज्यादा संघर्ष है..।।

2. क्या हम स्त्रियों का सम्मान करते है..??                        राम ने सिर्फ अपनी पत्नी के लिए ही नही युद्ध लड़े, बल्कि एक स्त्री के सम्मान के लिए भी..।। वो राजकुमार थे,वो चाहते तो अपने पिता की तरह ही दूसरी शादी कर सकते थे। मगर उन्होंने नही किया..।। 

हम आज भी स्त्री को वो अधिकार नही देते, जिसकी वो हक़दार है। 

अगर आप भाई है.. तो क्या आप अपने बहन को वो सब करने देंगे, जो आप कर रहे है..??                                               अगर आप पति है, तो क्या आप अपनी पत्नी को वो सब करने देंगे जो आप कर रहे है..??                                                   अगर आप पिता है, तो क्या आप अपने बेटी को वो सब करने देंगे,जो आप अपने बेटे को करने दे रहे है।      

3. अपने समाज की भलाई के लिए त्याग से पीछे न हटें।      त्याग ही इंसान को महानता की ऊंचाइयों पे पहुँचाता है.. राम को,राम उनका त्याग ने बनाया। उन्होंने अपने समाज को बिखरने से बचाने के लिए अपने पत्नी का त्याग किया..। क्या आपमें और हममें वो साहस है..?? 

4. हरेक परिस्थिति में नम्रता और धैर्य बनाये रखें।                       
5. अपने सफलता का श्रेय सबको दे..।                             राम ने अपने जीत का श्रेय सबको दिया..। हमारे जीवन में भी हमारे सफलता का बहुतों का योगदान होता है। मगर हम भूल जाते है..।। जरा सोचिए..?? अगर आपको अच्छा समाज, अच्छा शिक्षक, अच्छा दोस्त, अच्छा परिवार न मिला होता तो क्या होता..??

6. परिस्थितियां भले ही कितनी विपरीत हो,मगर अपने लक्ष्य से कभी विचलित न हो..।।

क्या रावण से कभी राम युद्ध जीत सकते थे..???               रावण राम से हरेक चीज में अव्वल था, आर्थिक,शारीरिक,सामाजिक,सांस्कृतिक हरेक चीज में, मगर राम इन सबको देखकर घबराए नही, क्योंकि उन्हें अपना लक्ष्य पता था..।।

क्या हमें अपना लक्ष्य पता है..???

अगर हां, तो आप अपने समार्टफोन का अपने लक्ष्य को हासिल करने में कितना सहयोगी मानते है..?? और कितना बाधक..??

राम अपने प्रति ईमानदार थे, क्या आप अपने प्रति ईमानदार है..??

क्या हुआ आपकी आधी उम्र यू ही गुजर गई तो..              आधी तो अभी बांकी है,इसे स्वर्णिम बनाइये..।।          राम भी,श्रीराम अपनी आधी उम्र गुजारने के बाद बने थे..।

इस रामनवमी में सिर्फ राम को पूजे नही , उनसे कुछ सीखे..

कुछ सीखे या न सीखे ... सिर्फ ऊपर की दो बातों को गांठ बांध लें आप भी राम बन जाएंगे..।। अपने माता-पिता का सम्मान करें, और साथ ही स्त्री का भी ..।।


रविवार, 26 मार्च 2023

लोग बैचैन है..क्यों..??

लोग बैचैन है... 

क्यों..???

क्योंकि वो खाली है..।और वो अपने खालीपन को भरने के लिए बेचैन है...



इसीलिए तो वो कभी कुछ,कभी कुछ करने में व्यस्त है, कभी फेसबुक,कभी इंस्टाग्राम,कभी यूट्यूब,कभी हॉटस्टार,कभी नेटफ्लिक्स पे अपना समय जाया कर रहे होते है..।।

हमें लगता है कि वो अपना समय बर्बाद कर रहे है...मगर वास्तिवकता ये है कि, वो अपना खालीपन भरने के लिए बेचैन है..।। कितने लोग तो ताउम्र गुजार लेते है मगर उनका खालीपन कभी भर नही पाता..।।

जब तक आपका खालीपन नही भरेगा तबतक आप बैचैन रहोगे,आप वो सब करोगे जो आप करना नही चाहते,मगर आप मजबूर है क्योंकि आपको अपना खालीपन जो भरना है..।

 कभी आपने लूडो या पजल खेला है...??

आपने देखा होगा कि जबतक सही नंबर नही आता तबतक आपको खेलना होता है.. ज्योही सही नंबर मिल जाये ,आप जीत जाते है,और खेल समाप्त हो जाता है ..।।      

  


 उसी तरह जब आपके जिंदगी में सही नंबर,मतलब सही उद्देश्य का पता चल जाएगा त्योंही आपकी सारी बेचैनियां दूर हो जाएगी.. आप जंहा-तहां जो भटक रहे है, वो भटकन समाप्त हो जाएगी। अपने खालीपन को भरने के लिए अपने उद्देश्य को ढूंढे.. जिस रोज आपका अपना उद्देश्य मिल जाएगा,आप अनेक झंझटों से मुक्त हो जाओगे...।।                                           

अपने उद्देश्य को कैसे जाने..???                                        

आसान नही है... मगर मुश्किल भी नही है..                          

प्रकृति का स्वभाव क्या है..??                                        

प्रकृति का स्वभाव देने का है..            

◆क्या इसमें से कोई लक्षण आपमें है-

सोचे क्या आप जो कर रहे है,उससे आपको संतुष्टि मिल रही. 

●आप जो कर रहे है,क्या वो सही है..?                                

●आप जो कर रहे है,क्या इससे किसी की जिंदगी में बदलाव आ रहा है..या आएगा??                                             

 ●क्या आपके जिंदगी में अभी भी,करुणा,दया का भाव उपस्थित है..।

अगर हां,तो आपका खालीपन भर गया होगा,या भर रहा होगा..और आप अपने उद्देश्य की और अग्रसर हो रहे है..।        

मगर अफसोस कि अक्सरहां का जबाब "ना" में होगा.. इसीलिये आप बैचैन है..।

बदलाव प्रकृति का स्वभाव है,मगर खुद में अच्छा बदलाव लाना महानता का स्वभाव है..।।                                       

अगर आप अपने आप को बदल सकते है,तो आप अपने खालीपन को भी भर सकते है..।।

रविवार, 5 फ़रवरी 2023

सफल होना जरूरी क्यों है..??

सफलता जिंदगी में बहुत मायने रखता है..।



सच कहूं तो आपका अस्तित्व कंही-न-कंही आपके सफलता पे ही टिकी हुई है..।।

आपने बगीचे में देखा होगा..

बच्चों का जमवाड़ा उसी पेड़ के पास होता है,

जिस पेड़ पे फल लदते है..

जिस पे फल नही लदते,उस पेड़ के चारोतारफ सिर्फ और सिर्फ झाड़ियां ही रहता है..।।


सफलता आपको अमूर्त रूप देता है..

सफलता से पहले आप कुछ नही होते,

ज्योहीं सफल होते है,

जिंदगी त्योंही 360° बदल जाती है..।।


सफल होना इसलिय जरूरी है कि,

सफलता आपको अपने अस्तित्व का अहसास दिलाता है..।


बिना सफलता की जिंदगी, उस भेड़ की भीड़ की तरह है..

जिस भीड़ का नेतृत्व करने वालों को, सिर्फ और सिर्फ पेट भरने की फिक्र रहता है..


निर्णय आपको करना है..

खुद के पेट भरने के लिए जीना है,

या फिर इस भीड़ का पेट भरने के लिए जीना है,

या फिर इस भीड़ को पेट भरने के फिक्र से मुक्त करना है.।


सफलता आपको इस काबिल बनाती है..

कि आप अपने पेट के साथ दूसरों का भी पेट भर सकते है,

यंहा तक कि सफलता आपको उस काबिल बनाती है कि आप इस भीड़ को पेट भरने की चिंता से भी मुक्त कर सकते है..।।


सफलता जरूरी है,अपने अस्तित्व का अहसास होने के लिए..।।

सफल होना इस प्रकृति की नियति है,

मगर मनुष्य ही है,जो अपने आप को असफल मान कर नियति को चुनौती देता है..।।


आप प्रकृति को एक बार गौर से देखे तो सही..

चाहे पर्वत हो या पठार हो,उसका सीना चीरकर जब पौधा निकलता है तो प्रकृति मुस्कुराती है..

चाहे चिलचिलाती गर्मी में रेगिस्तान की मिट्टी जल क्यों न रही हो.. जब उसके तपन को सहकर पौधा निकलता है तो उस प्रकृति को कितनी ख़ुशी होती है..।।

चाहे समुन्द्र की गहराइयों में सूर्य की रोशनी न पहुंचती हो, मगर उस अंधेरे में भी, जब पौधा निकलता है,और उस पौधे के झाड़ियों में जब मछली अपना आशियाना बनाती है,तो प्रकृति कितना खुश होती है..।।


एक मानव ही है,

जो हताश है,निराश है,

बेवजह है..

जबकि वो इस धरा पे सबसे लाजबाब है..।

फिर वो क्यों निराश है,हताश है..??

क्योंकि वो प्रकृति से विरक्त है..

इसीलिए तो वो हताश है,निराश है..।।


मंगलवार, 31 जनवरी 2023

शून्यता में ही पूर्णता का अहसास

 हमें लगता है कि हम बहुत कुछ जानते है,

मगर वास्तिवकता ये है कि हम कुछ नही जानते..

हम जितना जानने की कोशिश करते है,उतनी अज्ञानता बढ़ती जाती है..।।


इस ब्रह्मांड का निर्माण लगभग 13.8 अरब साल पहले से शुरू हुआ,और होमोसैपियन का विकास लगभग 3 लाख साल पहले.. इतनी लंबी यात्रा में आप क्या-क्या जान पाओगे..??

इसिलिय शून्यता में ही पूर्णता का अहसास होता है..।।

कंही आप स्मार्टफोन के गुलाम तो नही है..??

 आपको क्या लगता है...

स्मार्टफोन को आप कंट्रोल कर रहे है या

फिर स्मार्टफोन आपको कंट्रोल कर रहा है..???

जरा सोचिए..🤔

आपने आखरी बार गूगल पे काम की चीज कब सर्च किया था.. या फिर यूट्यूब पे ही..।।

अगर आपने बीते हुए 3 दिन के अंदर अपने काम की चीज को सर्च किया है,तो आप कभी भी  स्मार्टफोन की गुलामी की जंजीरों को तोड़ सकते है..।

अगर एक सप्ताह हो गया है,तो थोड़ा मुश्किल है..।

अगर 15 दिन से ज्यादा हो गया है तो आप मान लीजिए कि आप समार्टफोन के गुलाम हो चुके है..।

याद रखियेगा.. आपको अपने काम का ही चीज सर्च करना है,जो आपके रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हो सकता है..।।

 अगर आप रोज सर्च कर पाते है तो समझ लीजिए स्मार्टफोन आपका गुलाम है..

शुक्रवार, 13 जनवरी 2023

नरेंद्र से विवेकानंद बनने की यात्रा..

 आज युवा दिवस है..



और आज के युवा को सोशल मीडिया पर स्क्रोल करते वक़्त ये भी नही मालूम नही होता कि,वो आखिर क्या ढूंढने के लिए स्क्रोल कर रहे है..।। 


आज इस सोशल मीडिया और इंटरनेट के माध्यम से उन्हें जानना बहुत आसान है,जिनके जन्मदिवस पे आज युवा दिवस मनाया जा रहा है..।


मगर हम ये नही जानना चाहते कि नरेंद्र से स्वामी विवेकानंद बनने की यात्रा कैसा था..??

ये हरेक युवा को जानना चाहिए..


नरेंद्र का जन्म 12 जनुअरी 1867 में कोलकाता में हुआ। पिता विश्वनाथ दत्त वकील थे और माता भुवनेश्वरी देवी थी। 

इनके जीवन के ऊपर जितना प्रभाव पिता का पड़ा उतना ही माता का भी..।।

इनके दादाजी दुर्गाचरण दत्त संस्कृत और पारसी के विद्वान थे, साथ ही लॉ की भी पढ़ाई किये थे। 25 वर्ष की उम्र में ही संत बन गये।

जिसका कुछ न कुछ प्रभाव इनके ऊपर भी पड़ा ही होगा।।


1871 में 7 साल के उम्र में मेट्रो पॉलिअन्त स्कूल में नामांकन होता है।

1879 में प्रेसीडेंसी कॉलेज में नामांकन लेते है।

कॉलेज के पढ़ाई के दौरान ही , एक दिन प्रोफेसर विलियम हैस्टिक, विलियम वर्ड्सवर्थ की 'the excursion' चैप्टर पढ़ा रहे थे । उसी में एक शब्द "TRANCE" आता है। नरेंद्र इस शब्द को अच्छी तरह नही समझ पाते है तो प्रोफेसर कहते है इसे अच्छी तरह समझने के लिए रामकृष्ण परमहंस से मिलना होगा।

उन्ही दिनों कोलकाता में रामकृष्ण परमहंस(1881)सुरेंद्र नाथ मित्र के यंहा आये थे। ये बात नरेंद्र को जब पता चलता है तो वो अपने मित्र के साथ पहुंच जाते है। संगीत-गान की भी व्यवस्था किया गया था,मगर कोई आया नही। इसी समय मित्र के कहने पर वो गाते है- "जागो मां कुलकाण्डलिनी" जिसे सुन परमहंस भावविभोर हो जाते है। और उन्हें दक्षिणेस्वर बुलाते है।



जब नरेंद्र दक्षिणेस्वर जाते है तो पहला सवाल वो पूछते है- क्या आपने भगवान को देखा है..??

परमहंस कहते है- हां देखा है, जैसे तुम्हें देख रहा हूँ,वैसे ही देखा हूँ, बल्कि इससे भी अच्छी तरह से देखा हूँ।।


नरेंद्र का जाना-आना लगा रहता है। इसी बीच 1884 में पिता के मृत्यु होते ही मानो पहाड़ टूट पड़ता है। दिन-प्रतिदिन कर्जदार होते गए,ऊपर से रिश्तेदारों ने केस कर दिया। नरेंद्र ने पहली बार जाना कि गरीबी क्या होती है,खाली-पेट नॉकरी के तलाश में एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर का सिलसिला जारी रहता।

इसी बीच रामकृष्ण परमहंस से नजदीकियां और बढ़ गया।

नरेंद्र की व्याकुलता देखकर एकदिन परमहंस ने कहा अगर तुम मेरा काम करोगे, तो तुम्हारे परिवार का दो वक्त के रोटी का में बंदोबस्त कर दूंगा।

विवेकानंद ने हामी भर दी और शिष्यत्व ग्रहण किया। परमहंस ने उन्हें अपना उत्तरदायित्व दे दिया।


1886 में रामकृष्ण परमहंस के मृत्यु के बाद 'बराह मठ' का निर्माण किया और शिष्य भाई को संगठित कर वो लाहौर से कन्याकुमारी की यात्रा पे पैदल चल दिये।


खेतड़ी के राजा अजित सिंह के सहयोग से 11 सेप्टेंबर 1893 को शिकागो धर्म सम्मेलन में भाग लेने के लिए जाते है। और इसी समय खेतड़ी के महाराज द्वारा उन्हें "स्वामी विवेकानंद" नाम दिया जाता है



4 साल तक पकश्चिमी देशों में लगातार व्यख्यान देने का सिलसिला जारी रहता है।

 भारत वापस आने पर 1 मई 1897 को रामकृष्ण मिशन की स्थापना करते है।

इस बीच लगातार रामकृष्ण परमहंस के विचारों के माध्यम से समाज में नई चेतना का विकास करने का कार्य जारी रखते है।।

4 जुलाई 1902 को 39 वर्ष की आयु में बेलूर मठ में अपना प्राण त्याग देते है।


मगर उनके विचार और आदर्श आज भी युवाओं को उद्देलित करता है..।

वो कहते है-

 " सामाजिक परिवर्तन बाहर से नही,अंदर से होता है"

 "हर व्यक्ति को भगवान की तरह देखो,आप किसी की मदद नहीं कर सकते, बस उसकी सेवा कर सकते हैं।

 "शिक्षा का मतलब सूचना एकत्र करना नही बल्कि, जीवन, चरित्र,और व्यक्ति निर्माण पर होना चाहिए।

 "बिना महिला के सशक्त हुए बिना,समाज कभी सशक्त नही होगा।


उनके विचारों ने समाज के हरेक वर्ग को उद्देलित किया..।।

सुभाष चन्द्र बोस ने उन्हें भारत का "आध्यातिमक पिता" कहा..।।


उनके विचार आज भी प्रासंगिक है,मगर अफसोस आज के युवा को उनके विचार को तो छोड़िए,उनका क्या विचार है वो खुद निर्णय नही ले पा रहे है..।।



Yoga for digestive system