गुरुवार, 11 जनवरी 2024

प्यार की पांति..

अच्छा हुआ कि उन्हें मुझसे प्यार न हुआ..
अगर होता तो क्या होता..??


अगर उन्हें मुझसे प्यार होता तो..
मैं उन्हें वो खुशियां नही दे पाता,
जिसका वो हक़दार होती..
उनके अनगिनत सपने यू ही टूट जाते..
उनके अनेक ख्वाहिशे यू ही धूमिल हो जाते..
उनकी छोटी सी मुस्कान...
मेरे संगत में आते ही धूमिल हो जाती..

अच्छा ही हुआ कि उन्हें मुझसे प्यार न हुआ..
नही तो मेरे अतरंगे परिवार में कई दफा आंसू बहाना पड़ता..
खुद को कोसती और कहती कंहा आकर फंस गया..

अच्छा ही हुआ कि उन्हें मुझसे प्यार न हुआ..
मगर मुझे तो हुआ..
शायद उन्हें भी होता...
तो जिंदगी ऐसी नही, जैसा मैं सोचता हूँ,
इससे बेहतर भी हो सकता था..।।

अच्छा ही हुआ कि उन्हें मुझसे प्यार न हुआ..



रविवार, 7 जनवरी 2024

प्रकृति का नियम है..

प्रकृति का नियम है..
हल्की चीज हमेशा ऊपर उठती है..
और भारी चीज नीचे गिरती है..

इसी तरह आप सफल तब तक नही होंगे..
जब तक आप हल्के न हो जाओ..
उन सारे बेवजह बोझों को उतार फेकना होगा..
जिसे लादे फिर रहे है...
जो आपके जीवन में सहायक नही,
 बाधक का काम कर रहे है..।।



बाइबिल में कहा गया है-
जिसकी जितनी बड़ी झोलियां होगी,उसे उतना मिलेगा..।।

मगर निर्णय तो हमें ही करना होगा कि हमें झोलियां में भरना क्या है..।।
आज हम क्या कर रहे है...??
जो मिल रहा है उसे अपने दिमाग रूपी झोली में भरते जा रहे है..
ये न जानते हुए की ये हमारे लिए उपयोगी है भी की नही..।
यही कारण है कि हम अनेक समस्याओं का सामना कर रहे है..

समय आ गया है..
खुद को फॉरमेट तो नही, रीस्टार्ट तो कर ही सकते है..
उन फाइलों को डिलीट करें जो न ही आपके लिए..
और ना ही आपके चाहने वालो की लिए जरूरी है..।।
खाली बचे जगहों में उन चीजों को शामिल करें..
जो आपके जिंदगी के लिए जरूरी है...।।

जेनुअरी का पहला ही संडे है..
पूरा साल बाकी है..
क्या हुआ 1 जेनुअरी का खुद से किया हुआ वादा टूट गया तो..
अभी 51 सप्ताह बाकी है..😊

आज से अभी से एक छोटा कदम उठाते है..
खुद को खाली करने के लिए..
ऊपर उठने के लिए..
और फिर जंहा से उठे है..
वंही बारिश की बूंदों की तरह गिर जाने के लिए..।।

शनिवार, 6 जनवरी 2024

मैं हर रात..

मैं हर रात यही सोच के सोता हूँ..
कल से, फिर नई शुरुआत करूंगा..
मगर कई कल बीत गए..
मगर वो कल नही आया..
जिस कल से नई शुरुआत करूं मैं...।।



मैं हर रात यही सोच के सोता हूँ..
कल से फिर नई शुरुआत करूंगा..।।

थका तो नही हूँ मैं..
ना ही, हार के हारा हूं..
न जाने फिर क्यों..
मैं हार सा ही गया हूँ..??

न हार का गम है..
ना ही जीत के लिए जुनून है..
तो फिर इस जीवन का मतलब ही क्या है..??

मैं हर रात यही सोच के सोता हूँ..
कल से फिर नई शुरुआत करूंगा..।।

कब तक यू ही रेंगता रहूंगा..
कब तक यू ही दूसरे को कोसता रहूंगा..
कब तक, हां कब तक..
आइने में देख कर मुस्कुराता रहूंगा..

कभी तो हिम्मत जुटानी होगी..
अपनी खामियों को मिटानी होगी..
जिंदगी जो बेपटरी हुई है..
उसे पटरी पर तो लानी होगी..।।

मैं हर रात यही सोच के सोता हूँ..
कल से फिर नई शुरुआत करूंगा..।।
ना जाने वो कल कब आएगा..
या फिर..
ना जाने वो कल कब लाऊंगा..
कुछ चीजें हमारे हाथों में है..
जो हमारे हाथों में है,
उसे कैसे जाया जाने दुं में..।।

मैं हर रात यही सोच के सोता हूँ..
कल से फिर नई शुरुआत करूंगा..
मगर कई कल बीत गए..
मगर वो कल नही आया..
जिस कल से नई शुरुआत करूं मैं..।।



बुधवार, 3 जनवरी 2024

हारता तो वो है..

हारता तो वो है..
जो मर चुका है..


जबतल्क सांस है..
तबतल्क कोई कैसे हार सकता है..
सांसे जबतल्क चल रही हो..
मैदान छोड़ मत भागो तुम...
क्या पता नियति ने..
हार के पहाड़ पे ही..
जीत का यशगान लिखा हो..।।

जबतल्क सांस है..
तबतल्क लड़ते रहो अपने अंतर्द्वंद से...
पढ़ते रहो उनसबको..
जो तुम्हारे हार का उत्सव मना रहे है..


जबतल्क सांस है,
तबतल्क चलते रहो,बढ़ते रहो, सही राह पर..
मंजिलें मिल ही जाएगी..

क्या पता किस मोर पर सफलता का सोपान हो..
अगर तुम हार कर रुक गए...
तो उस मोड़ का क्या होगा..??
जिस मोड़ पे सफलता राह जोह रही है..।।

हारना और जितना प्रकृति का नियति है..
मगर प्रकृति का असली नियति है..
खिलना..
तो फिर भला हार कर...
कैसे कोई प्रकृति की नियति को साकार कर सकता है..

हारता तो वो है..
जो मर चुका है...।

जबतल्क सांस है..
तबतल्क कोई कैसे हार सकता है..
सांसे जबतल्क चल रही हो..
मैदान छोड़ मत भागो तुम...
क्या पता नियति ने..
हार के पहाड़ पे ही..
जीत का यशगान लिखा हो..।।



रविवार, 31 दिसंबर 2023

क्या हम अव्यवहारिक और चरित्रहीन होते जा रहे है..

सबसे पहले तो हमें व्यवहार और चरित्र में क्या अंतर है वो जान लेना जरूरी है...
क्योंकि हम अक्सरहाँ दोनों को समानार्थी ही समझ लेते है..
इसमें उतना ही अंतर है जितना नदी और समुन्द्र में..
हमारा व्यवहार अगर नदी है,तो हमारा चरित्र समुन्द्र है..।।



व्यवहार वो है जो हम दूसरों के साथ करते है..
और चरित्र वो है जो हम अकेले में खुद के साथ करते है..।।

वर्तमान समय मे दोनों का ही पतन होते जा रहा है..
क्यों🤔..??
कारण पता है आपको..?? अगर हां तो बताइएगा..🙂

वर्तमान में सबसे बड़ा कारण जो है...
वोआपके हाथ में है..😊
आप अपने समार्टफोन पे क्या देखते है,क्या सुनते है उसका प्रभाव आपके व्यवहार और चरित्र पर गहरा असर पड़ रहा है..
इतना कि लोग अपने रिस्तेदार की हत्या तक करने में नही सकुचाते..।।

इसका ये मतलब नही की आप स्मार्टफोन इस्तेमाल करना छोड़ दे..
आज स्मार्टफोन रोजमर्रा की जरूरत हो गई है..।।
तो क्या करें..??
बस आप स्मार्टफोन का इस्तेमाल करें,
न कि स्मार्टफोन आपका इस्तेमाल करें..।

स्मार्टफोन पे समय बिताने से पहले खुद से पूछे..
इससे हमें क्या मिलेगा..??

हां तो हम कंहा थे...😀
व्यवहार और चरित्र की बात कर रहें थे..
मूलतः ये हमारे व्यक्तिगत,सामाजिक और पर्यावरणीय परिवेश पे भी निर्भर करता है..।।

व्यक्तिगत स्तर पर आप क्या करते है,क्या पढ़ते है,क्या देखते है..ये सब आते है...ये सब आपके हाथ मे है,आप इसमें सुधार कर सकते है..।।

सामाजिक स्तर पर आपके मित्र कैसे है,आप कैसे समूह में रहते है,किस तरह के काम करते है..ये सभी हमारे चरित्र और व्यवहार को प्रभावित करते है..।।
इसमें भी सुधार की गुंजाइश है..।।

पर्यावरण का भी हमारे चरित्र और व्यवहार पर प्रभाव पड़ता है..इसिलिय आपको जितने भी आक्रामक जनजातियां मिलेगी वो सभी विषुवत, मकर या कर्क रेखा के आसपास मिलेंगे..
इसिलिय आप देखेंगे कि जो धुरवीय(polar)प्रदेश है वो बहुत शांत है..।।
- अगर आप इसिहास पलटेंगे तो देखेंगे कि जितने भी विद्वान और महानतम व्यक्तित्व हुए उनके जीवन मे पर्यावरण का महत्वपूर्ण योगदान रहा..
-आज भी अगर गौर करें तो आपको पता चल जाएगा कि नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले कौन लोग है..??
 ये लोग किस तरह के माहौल में पले-बढ़े..।।

मगर अपवाद हरेक जगह होता है..मगर जंहा भी अपवाद होता है,वंहा पर्यावरण उनके अनुकूल होता है..।।

हम अपने चरित्र और व्यवहार को अच्छा कैसे करें...??
ये अच्छा अवसर है क्योंकि कल कैलन्डर भी बदलेगा..
और एक नया अवसर होगा..
अपने जिंदगी में बदलाव लाने का..
1. सबसे पहले अपने मोबाइल से उन सभी app को डिलीट करें जो आपका समय नही आपका व्यक्तित्व खा रहा है..।।

2. उन सभी लोगों से दूरियां बनाये जो आपके समय के साथ आपके चरित्र और व्यक्तित्व को मलिन करने में सहयोग कर रहे है..।।(ऐसे लोगों की पहचान कैसे करें..??साधारण है अगर वो दूसरों की शिकायत और आपकी प्रसंशा कर रहे है तो सावधान हो जाये)

3. अगर आपका परिवेश खराब है तो उसे बदलने की कोशिश करें या फिर उस परिवेश में अपने लिए एक दीवार बना ले..।।

4. अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण ये है कि आध्यात्मिक (spiritual) बनें.. सारे समस्याओं का हल हो जाएगा।।
  अध्यात्म है क्या..??
आत्मा का अध्ययन ही अध्यात्म है..
 अकेले बैठे जाए शांत चिंत..काफी है।।

तो क्या आप तैयार है,नव-वर्ष में अपने व्यवहार और चरित्र को सुदृढ़ बनाने के लिए..??

नव वर्ष की ढेर सारी शुभकामनाएं..💐💐
हम सब स्वस्थ💪 और खुश😀 रहें..।।

मंगलवार, 26 दिसंबर 2023

उधम सिंह..नाम तो सुना ही होगा...

आखिर वो क्या चीज थी..जिसने हमारे क्रांतिकारियों को अपने प्राण न्योछावर करने के लिए प्रेरित किया होगा..??
ऐसे अनगिनित देशप्रेमी हुए जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति खुशी-खुशी देश के नाम कर दिया..।।
उन्हीं में से एक का,आज जन्मदिन है..
उनका नाम शेर सिंह/उदय सिंह/उधम सिंह/राम मोहम्मद सिंह आजाद था..न जाने और कई नाम थे इनके..।
मगर दुनिया इन्हें उधम सिंह के नाम से जानती है..।।



आपके लक्ष्य प्राप्ति में आपके सिवा और कोई अवरोधक नही है..।।

उधम सिंह का जन्म 26 दिसंबर 1899 में हुआ..
- 3 वर्ष की उम्र में माँ की मृत्यु हो गई...
- 5 वर्ष की उम्र में पिता की मृत्यु हो गई..
- उसके बाद अनाथालय चले गए..
- 13 साल की उम्र में बड़े भाई की निमोनिया से मृत्यु हो गई..
- 17 वर्ष की उम्र में आर्मी की ट्रेनिंग लेना शुरू किया..
जब आर्मी की ट्रेनिंग लेकर वापस आये तो कुछ दिनों बाद जालिवाला हत्याकांड हो गया..


जब इन्हें इस घटना का पता चला तो वंहा पहुंच कर घायलों को पानी और अस्पताल पहुँचाने में सारी रात गुजार दी..।।
अपने सामने मरते हुए लोगों को देखकर इनका मन विचलित हो गया..।।
और इन्होंने अगले ही दिन स्वर्ण मंदिर में स्नान किया और प्रण किया कि इसका बदला में जरूर लूंगा..।।

सचिन सान्याल ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि..
इस घटना का समर्थन पंजाब के सिखों ने भी किया,यंही तक नही बल्कि अकाल तख्त में "माइकल ओ डायर" को सम्मानित भी किया गया..।।

             लक्ष्य प्राप्ति का पहला शर्त है -धैर्य

अपने प्रतिशोध का बदला लेने के लिए इन्होंने 2 दशक इंतजार किया..।।
इनके बचपन का नाम शेर सिंह था,अनाथलय में इनका नाम उदय सिंह हो गया..।।
इन्होंने विदेश जाने के लिए डुप्लीकेट पासपोर्ट बनाया जिसपर अपना नाम उधम सिंह रखा..।
ये सबसे पहले भारत से युगांडा गए वंहा कुछ दिनों तक कारपेंटर की नॉकरी की..इसके बाद ब्राजील,मेक्सिको होते हुए अमेरिका पहुंचे वंहा उन्होंने 2 रिवॉल्वर और 1 ऑटोमैटिक पिस्टल खरीदी और भारत लेकर आ गए..
जब वो इंडिया पहुंचे तो यंहा आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार करके सश्रम 5 वर्ष की जेल हुई..

जब जेल में ही थे तब इन्हें अपने आदर्श की मौत की खबर लगी जिनसे इन्होंने लाहौर विश्वविद्यालय में मुलाकात की थी..वो भगत सिंह थे..इस घटना ने उन्हें और व्यथित किया..इनके दूसरे आदर्श लाला लाजपत राय थे..।।

जेल से छूटने के बाद इन्होंने यूरोप की यात्रा की.. और 1934 में लंदन पहुंचे और शुरुआत में शेफर्ड बुश गुरुद्वारा में रहना शुरू किया जंहा उनकी मुलाकात ग़दर आंदोलन के नेता 'राजा महेंद्र प्रताप' से मुलाकात हुई..


इनके क्रांतिकारी विचारों के कारण ब्रिटिश समर्थक गुरुद्वारा प्रबंधक इनसे खफा होने लगे जिसकारण उन्होंने गुरुद्वारा छोड़ दिया..।।

इन्होंने लंदन पहुंचकर रेगनॉल x डायर को ढूंढना शुरू किया पता चला कि इसकी मृत्यु हो गई..
फिर उन्होंने माइकल O डायर के बारे में पता लगाया जो रिटायरमेंट की जिंदगी जी रहा था..इन्होंने इसकी रेकी की ये आसान से इसे इसके घर पर मार सकते थे...
मगर इन्होंने 13 मार्च 1940 का दिन चुना, जिस रोज ये केस्टन हॉल में द्वितीय विश्वयुद्ध में मुस्लिमों का अंग्रेज के समर्थन के बारे में बोल रहा था..।।
ये भी वंहा व्यापारी के भेष में पहुंचे और भाषण के दौरान ही अपने रिवॉल्वर से 2 गोलियां माइकल O डायर पे चलाई और उसकी मृत्यु उसी क्षण हो गई और 2 गोलियां जेट लेंड(1919 में भारत का सचिव) के ऊपर मगर भाग्यवश कुर्सी से नीचे गिरने के कारण बच गया,एक गोलियां एक व्यकि के बांह पर तो एक गोलियां एक व्यक्ति के जांघ पर लगी..।।
इनके पास और गोलियां थी मगर तबतक इन्हें पकड़ लिया गया..।।
जब इन्हें पुलिस गिरफ्तार करके ले जा रहा था तो लोगो का कहना है कि वो मुश्कुरा रहे थे..
आखिर क्यों नही मुश्कुराये.. जिस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए दो दशक इंतजार किया वो आज पूरा हो रहा था..।।



स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस ने जब इनसे नाम पूछा तो अपना नाम "राम मोहम्मद सिंह आजाद" बताया क्यों..??
क्योंकि उस समय भारत मे पाकिस्तान की मांग जोड़ों पे थी..उनकी सहादत शायद हिन्दू-मुस्लिम खाइयों को पाटने में कुछ मदद करती..।।
31 जून 1940 को इन्हें फांसी दे दी गई..।।
और वो खुशी-खुशी अपने मौत का आलीगं करके पूरे भारतभूमि को अपना ऋणी बना गए..।।

भारत सरकार द्वारा इनके अस्थियों को 1974 में लंदन से भारत लाया गया और जालिवाला बाग में इनके अस्थियों को रखा गया ये सोचकर कि वे अब शांति से सो सके...।।


       लक्ष्य अगर पवित्र हो तो प्राप्ति होती ही है..



सोमवार, 25 दिसंबर 2023

हम क्रिसमस क्यों मनाते है..??

बचपन में मेरे लिए 25 दिसंबर का मतलब छुट्टी होता था..और इसे बड़ा दिन कहा जाता था..क्यों..??
 ढेर सारे सवाल थे..
•25 दिसंबर को छूट्टी क्यों होती थी..??
•इसे बड़ा दिन क्यों कहते थे..??
•🌲क्रिसमस ट्री क्या है..??
•सांता क्लॉज कौन है..??
ढेर सारे सवाल थे..
क्योंकि में जिस समाज में रहता था वंहा ईसाई नही रहते थे इसिलिय जानकारी का अभाव था..

मगर आज पढ़ने,लिखने और एक बड़ा समाज को देखने के बाद इन सारे सवालों के जबाब मिल गए..।।

25 दिसंबर को छुट्टी इसिलिय होती थी कि इस रोज ईसाई धर्म के प्रेणता का जन्म हुआ... जिन्हें भगवान यीशु के नाम से जाना गया..।।


यीशु ने अपने विचार से दुनिया को बदल दिया,और अपने विचार पे अडिग रहे..जिस कारण उन्हें शूली चढ़नी पड़ी..
शायद वो शूली नही चढ़ते तो..दुनिया आज उन्हें नही पूजती..
यीशु अपने मृत्यु से यही संदेश देते है-  आपके विचार,आदर्श,लक्ष्य हमेशा मृत्यु से बड़ी होनी चाहिए.. इन्हें पाने के लिए जीवन भी तुच्छ लगने लगे..।।

मगर वर्तमान समय मे हमारा लक्ष्य,आदर्श, विचार सबकुछ संकुचित हो गया है..वो हमतक या फिर परिवार तक ही सिमट कर रह गया है..क्यों..??

-अपने विचारों पे अडिग रहने के कारण ही इन्हें शूली पे चढ़ा दिया गया..इसिलिय आज के दिन को बड़ा दिन कहते है..।।

मगर वास्तिविकता ये है कि उन रूढ़िवादियों को इनके विचार से कोई परेशानी नही थी..
बल्कि यीशु के विचारों से प्रभावित जो भीड़ थी उससे सबको डर लग रहा था....।।
आज भी भीड़ बड़े-बडे शक्तिशाली शासकों को नीचे झुका देती है,जबकि आज आधुनिक हथियार है,मगर तब भी भीड़ से सब सहमे हुए है...।

- क्रिसमस ट्री आखिर होता क्या है...??


सबसे पहली बात की इसका संबंध यीशु से बिल्कुल नही है..
इसकी सर्वप्रथम शुरूआत 16वी शताब्दी में ईसाई धर्मसुधारक मार्टिन लूथर के द्वारा शुरू हुई..24 दिसंबर को रास्ते से गुजर रहे थे तो उन्हें firs tree/क्रिसमस ट्री/ सनोबर(जोकि pine/चीर प्रजाति) का पौधा मिला जो पतियों पे बर्फ गिरने के कारण चमक रहा था ..जिसने मार्टिन लूथर को आकर्षित किया और उन्होंने घर ले आया और अगले दिन 25 दिसंबर को इस वृक्ष को सजाया उसके बाद ये पूरे विश्व मे इसे सजाने का प्रचलन फैल गया..।।

- सांता क्लॉज कौन है..??


इनका भी संबंध यीशु से नही है.. सांता क्लॉज का असली नाम सांता निकोलस था जिनका जन्म तुर्किस्तान के मायरा में हुआ,चपन मे ही माता-पिता के देहांत के बाद कम उम्र में ये पादरी बन गए व्यवहार से दयालु थे इसलिए बच्चों को स्नेह और टॉफियां बाटते थे,खासकर क्रिसमस के अर्धरात्रि को अपने पूरे कस्बे में..और ये धीरे-धीरे बाते फैलती गई और ढेर सारे दयालु व्यक्ति जुड़ते गए और सांता क्लॉज की संख्या बढ़ती गई..।।

ईसाइयत ने दुनिया को बहुत कुछ दिया..
दया,करुणा और सेवा भाव इनका मूल उद्देश्य है..
आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देने में ईसाइयत का अहम योगदान है,जिसकारण ही पृथ्वी विशालकाय होने के बावजूद मोबाइल में समा गई है..
हरेक चीज के दो पहलू होते है..और ईसाइयत का दूसरा पहलू खून से सना है..मगर ऐसे सना है जिससे बू नही आती..मगर ये बहुत डरावना है..।।

हमें यीशु के उन आदर्शों विचारों को फिर से सीखने की जरूरत है जिसने उन्हें अमर कर दिया..
"तुम एक दूसरे से प्रेम करो; मैंने तुमसे जैसे प्रेम किया है, उसी तरह तुम भी एक दूसरे से प्रेम करो।" - यूहन्ना 13:34

"न्याय का मार्ग चुनो, दया के साथ चलो और अपने परमेश्वर के साथ बस तुम रहो।" - मिखा 6:8


Yoga for digestive system