बुधवार, 24 जनवरी 2024

मैं नजरें नही मिला पाता हूँ

मैं नजरें नही मिला पाता हूँ..माँ..
जब आपकी छवि देखता हूँ, 
तो रो पड़ता हूँ माँ..।।
आपने जो मेरे लिए किया..
और जो कर रही है..
क्या मैं कर पाऊंगा माँ..??


सबसे बुरा कौन..??

बुरा जो देखन में चला, बुरा न मिलिया कोई...
जब दिल झांका आपना, मुझसे बुरा न कोई..।।



कबीर दास की ये उक्तियां वास्तविक में सबके ऊपर चरितार्थ होता है..।।

आपको क्या लगता है..क्या आप अच्छे है..??
अगर हां, तो कैसे..??
जरा सोचिए🤔..

अगर आपका जबाब हां में है, तो मैं आपको गलत साबित कर सकता हूँ..
सच कहूं,तो यंहा सब बुरे है..
कुछ दुसरो के नजर में,तो कुछ खुद के नजर में..।।

दुसरो के नजर में गलत होना उतना बुरा नही है,जितना खुद के नजर में बुरा होना है..।।

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि 90% से ज्यादा लोग खुद के नजर में बुरे है,और ये जानकर आपको और हैरानी होगी कि इसमें से 85% इस उहापोह में रहते है कि क्या सही में हम गलत है..।।
आपको ये जानकर और हैरानी होगी कि वर्तमान में 90% बीमारी हमारे अंदर के बुराइयों के कारण हो रही है,आप इसमें उन सभी भयावह बीमारी को भी शामिल कर सकते है..।।

बुरा कौन है...??
साधारणतयः हम उसे बुरा कह देते है,जो परिवार,समाज, देश को अपने भावनाओं और आचरण से नुकसान पहुँचाता है..।।

हममें से अक्सरहाँ लोग परिवार,समाज,देश के आदर्शों, नैतिकताओं और कानूनों के कारण गलत आचरण करने से बचते है..।।

अब बात करते है.. सबसे बुरा कौन है..??
सबसे बुरा वो है,जो स्वयं के साथ बुरा करता है..
आज हम सभी किसी-न-किसी तरह से स्वयं के साथ बुराईया कर रहे है..
इसिलए तो आपको सड़को पे लटकते हुए,मायूस चेहरे दिखेंगे..
सोचा है क्यों..??
क्योंकि वो हर रोज खुद को मार रहे है..।।
क्यों..??

दूसरों को मारने पर दंड का प्रावधान है,
मगर स्वयं को मारने पर किसी तरह का प्रतिबंध नही है..

इसिलए तो हम रोज स्वयं को मार रहे है,और किसी को पता भी नही चल रहा है..यंहा तक कि स्वयं को भी नही पता चल रहा है..।।

जरा सोचिए🤔..
आप आखरी बार यू ही कब मुस्कुराये थे..
आप आखरी बार खुद के लिए कब रोये थे..

हम अपने भावनाओं,इच्छाओं,आकांछाओ को भूल कर कोई और कृत्य कर रहे है,
या फिर उस भावनाओं,इच्छाओं,आकांछाओ के जंजीर से जकड़े हुए है..।
दोनों ही परिस्थितियों में हम खुद के साथ ही बुरा कर रहे है..।।

दूसरों के साथ बुरा करना उतना बुरा नही है,
जितना स्वयं के साथ बुरा करना है..
क्योंकि..दुसरो के साथ हम बुरा अज्ञानतावश,क्रोधवश,स्वार्थवश करते है..।

मगर स्वयं के साथ जानते हुए की ये बुरा है तब भी हम स्वयं के साथ बुरा कर रहे होते है..।

इसिलए कबीर दास जी ने कहा है- मुझसे बुरा न कोई..



सोमवार, 22 जनवरी 2024

राम पूजनीय क्यों है..

भारतभूमि ही एक ऐसी भूमि है..
जंहा हरेक कोई भगवता को सिर्फ प्राप्त ही नही,
बल्कि भगवान बन सकता है..।।



यंहा एक नही कई भगवान है..
यंहा तक कि हरेक भारतीय में,
भगवता की लौ जल रही है..
ये अलग बात है कि वो लौ इतना कम है,
कि स्वयं को भी पता नही चल रहा है..।।

आज अच्छा अवसर है..
उस राम को याद करने का जो साधारण से असाधारण बन गए..


आखिर राम पूजनीय क्यों हो गए..??
सिर्फ भारत ही नही बल्कि भारत से बाहर भी राम की कथा होती है..।।
क्यों..??

क्योंकि वो साधारण थे..
हममें से ही एक थे..।
उन्होंने कोई चमत्कारिक कार्य नही किया..
बल्कि उन्होंने अपने कर्तव्य का निष्ठापूर्वक निर्वहन किया..।।

क्या कोई अपने कर्तव्यों का निर्वहन करके भगवान बन सकता है..??

हां.. राम इसके सबसे बड़े आदर्श है..।।

आज अच्छा अवसर है..
श्रीराम के चरित्र को स्मरण करके..
अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का..।।

राम ने हरेक कर्तव्यों का सही से निर्वहन किया..।।
क्या हम अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे है..??
अपने आप से पूछे..
क्या आप अच्छे पुत्र/पुत्री है..??
क्या आप अच्छे भाई/बहन है....??
क्या आप अच्छे पति/पत्नी है..??
क्या आप अच्छे माँ/बाप है..??
क्या आप अच्छे मित्र है..??
क्या आप एक अच्छे नागरिक है..??

अगर हां तो...
मुस्कुराइए😊 आप मैं भी भगवान बनने की संभावना है..।।


गुरुवार, 11 जनवरी 2024

प्यार की पांति..

अच्छा हुआ कि उन्हें मुझसे प्यार न हुआ..
अगर होता तो क्या होता..??


अगर उन्हें मुझसे प्यार होता तो..
मैं उन्हें वो खुशियां नही दे पाता,
जिसका वो हक़दार होती..
उनके अनगिनत सपने यू ही टूट जाते..
उनके अनेक ख्वाहिशे यू ही धूमिल हो जाते..
उनकी छोटी सी मुस्कान...
मेरे संगत में आते ही धूमिल हो जाती..

अच्छा ही हुआ कि उन्हें मुझसे प्यार न हुआ..
नही तो मेरे अतरंगे परिवार में कई दफा आंसू बहाना पड़ता..
खुद को कोसती और कहती कंहा आकर फंस गया..

अच्छा ही हुआ कि उन्हें मुझसे प्यार न हुआ..
मगर मुझे तो हुआ..
शायद उन्हें भी होता...
तो जिंदगी ऐसी नही, जैसा मैं सोचता हूँ,
इससे बेहतर भी हो सकता था..।।

अच्छा ही हुआ कि उन्हें मुझसे प्यार न हुआ..



रविवार, 7 जनवरी 2024

प्रकृति का नियम है..

प्रकृति का नियम है..
हल्की चीज हमेशा ऊपर उठती है..
और भारी चीज नीचे गिरती है..

इसी तरह आप सफल तब तक नही होंगे..
जब तक आप हल्के न हो जाओ..
उन सारे बेवजह बोझों को उतार फेकना होगा..
जिसे लादे फिर रहे है...
जो आपके जीवन में सहायक नही,
 बाधक का काम कर रहे है..।।



बाइबिल में कहा गया है-
जिसकी जितनी बड़ी झोलियां होगी,उसे उतना मिलेगा..।।

मगर निर्णय तो हमें ही करना होगा कि हमें झोलियां में भरना क्या है..।।
आज हम क्या कर रहे है...??
जो मिल रहा है उसे अपने दिमाग रूपी झोली में भरते जा रहे है..
ये न जानते हुए की ये हमारे लिए उपयोगी है भी की नही..।
यही कारण है कि हम अनेक समस्याओं का सामना कर रहे है..

समय आ गया है..
खुद को फॉरमेट तो नही, रीस्टार्ट तो कर ही सकते है..
उन फाइलों को डिलीट करें जो न ही आपके लिए..
और ना ही आपके चाहने वालो की लिए जरूरी है..।।
खाली बचे जगहों में उन चीजों को शामिल करें..
जो आपके जिंदगी के लिए जरूरी है...।।

जेनुअरी का पहला ही संडे है..
पूरा साल बाकी है..
क्या हुआ 1 जेनुअरी का खुद से किया हुआ वादा टूट गया तो..
अभी 51 सप्ताह बाकी है..😊

आज से अभी से एक छोटा कदम उठाते है..
खुद को खाली करने के लिए..
ऊपर उठने के लिए..
और फिर जंहा से उठे है..
वंही बारिश की बूंदों की तरह गिर जाने के लिए..।।

शनिवार, 6 जनवरी 2024

मैं हर रात..

मैं हर रात यही सोच के सोता हूँ..
कल से, फिर नई शुरुआत करूंगा..
मगर कई कल बीत गए..
मगर वो कल नही आया..
जिस कल से नई शुरुआत करूं मैं...।।



मैं हर रात यही सोच के सोता हूँ..
कल से फिर नई शुरुआत करूंगा..।।

थका तो नही हूँ मैं..
ना ही, हार के हारा हूं..
न जाने फिर क्यों..
मैं हार सा ही गया हूँ..??

न हार का गम है..
ना ही जीत के लिए जुनून है..
तो फिर इस जीवन का मतलब ही क्या है..??

मैं हर रात यही सोच के सोता हूँ..
कल से फिर नई शुरुआत करूंगा..।।

कब तक यू ही रेंगता रहूंगा..
कब तक यू ही दूसरे को कोसता रहूंगा..
कब तक, हां कब तक..
आइने में देख कर मुस्कुराता रहूंगा..

कभी तो हिम्मत जुटानी होगी..
अपनी खामियों को मिटानी होगी..
जिंदगी जो बेपटरी हुई है..
उसे पटरी पर तो लानी होगी..।।

मैं हर रात यही सोच के सोता हूँ..
कल से फिर नई शुरुआत करूंगा..।।
ना जाने वो कल कब आएगा..
या फिर..
ना जाने वो कल कब लाऊंगा..
कुछ चीजें हमारे हाथों में है..
जो हमारे हाथों में है,
उसे कैसे जाया जाने दुं में..।।

मैं हर रात यही सोच के सोता हूँ..
कल से फिर नई शुरुआत करूंगा..
मगर कई कल बीत गए..
मगर वो कल नही आया..
जिस कल से नई शुरुआत करूं मैं..।।



बुधवार, 3 जनवरी 2024

हारता तो वो है..

हारता तो वो है..
जो मर चुका है..


जबतल्क सांस है..
तबतल्क कोई कैसे हार सकता है..
सांसे जबतल्क चल रही हो..
मैदान छोड़ मत भागो तुम...
क्या पता नियति ने..
हार के पहाड़ पे ही..
जीत का यशगान लिखा हो..।।

जबतल्क सांस है..
तबतल्क लड़ते रहो अपने अंतर्द्वंद से...
पढ़ते रहो उनसबको..
जो तुम्हारे हार का उत्सव मना रहे है..


जबतल्क सांस है,
तबतल्क चलते रहो,बढ़ते रहो, सही राह पर..
मंजिलें मिल ही जाएगी..

क्या पता किस मोर पर सफलता का सोपान हो..
अगर तुम हार कर रुक गए...
तो उस मोड़ का क्या होगा..??
जिस मोड़ पे सफलता राह जोह रही है..।।

हारना और जितना प्रकृति का नियति है..
मगर प्रकृति का असली नियति है..
खिलना..
तो फिर भला हार कर...
कैसे कोई प्रकृति की नियति को साकार कर सकता है..

हारता तो वो है..
जो मर चुका है...।

जबतल्क सांस है..
तबतल्क कोई कैसे हार सकता है..
सांसे जबतल्क चल रही हो..
मैदान छोड़ मत भागो तुम...
क्या पता नियति ने..
हार के पहाड़ पे ही..
जीत का यशगान लिखा हो..।।



Yoga for digestive system