रविवार, 6 अक्टूबर 2024

हे प्रभु अब हार चुका हूं..

जिंदा हूँ..
सांसे चल रही है..
ये काफी है..
फिर से खड़े होने के लिए..
और कुछ कर गुजरने के लिए..।।

मगर मर चुका हूं..
बस सांसे चल रही है..
और दिन बिताए जा रहा हूं..
सुबह से रात, और रात से सुबह होती जा रही है..
और यू ही जिंदगी जाया किये जा रहा हूँ..।।

मालूम नहीं कब..
जिंदगी के महत्ता का भान होगा..
और खुद पे गुमान होगा..
और उस प्रकृति का मुझपे अहसान होगा..।।

आधा जिंदगी यू ही जाया कर चुका हूं..
बची आधी जिंदगी को भी जाया किये जा रहा हूँ..
मालूम नही कब वास्तविकता का भान होगा..
और स्वयं के अंदर बदलाव होगा..

सच तो ये है कि..
सबकुछ का भान होकर भी अनजान हूँ मैं..
अपने हरेक परिस्थितियों के लिए स्वयं जिम्मेदार हूं मैं..
अपनी कमजोर इच्छाशक्ति और संकल्प शक्ति के कारण बेहाल हूं मैं..
अपने आलस्य और वासनाओं का गुलाम हूं मैं..

मालूम नही कैसे इससे पार पाऊंगा..
अपने आलस्य और वासनाओं को पार कर कैसे स्वयं का जीर्णोद्धार करूँगा..



हे प्रभु अब हार चुका हूं..
अब आपका ही आसरा है..
इस जिंदगी की डोर को
अब आप ही थाम लो..
भटक चुका हूं
इस मायावी दुनिया मे..
धस चुका हूं
कुकर्मो के दलदल में..
खुद से तो बहुत प्रयास किया..
मगर हर बार खड़ा हुआ 
और हर बार गिर गया..
हे प्रभु अब हार चुका हूं..
अब आपका ही आसरा है..
इस जिंदगी की डोर को
अब आप ही थाम लो..


गुरुवार, 3 अक्टूबर 2024

मेरी माँ

क्या खुदा है..??
मालूम नही...
मगर मेरे लिए है..
मैं जितनी दफा याद करता हूँ..
मेरी माँ का फोन आ जाता है..।।
और मेरी खैरियत पूछ कर ..
फिर फोन काट देती है..।।

मैं ही नकारा हूँ..
जो याद करके भी..
फोन नही कर पाता हूँ..।।

शायद उस खुदा के साथ भी यही होता होगा..
उसके चाहने वाले भी..
उसे याद करके उसके पास नही जा पाते होंगे..
उस खुदा का दिल माँ की तरह थोड़े ही होगा..
जो खुद ही हर बार कॉल कर देती है.. ।।




बुधवार, 25 सितंबर 2024

प्यार की पांति..

वो इस कदर खोई मुझसे..
की फिर उसे ढूंढ नही पाया मैं..
न जाने कंहा खो गई..
उसे फिर ढूंढ नही पाया मैं..

मैं ही नाकाबिल था..
जो ढूंढ नही पाया उसे..

उसके दिल के पास न सही..
उसके घर के इतने पास आकर भी..
उससे इतनी दूरियां होगी..
कभी सोचा नही था..

मैं ही नाकाबिल था..
की उसके काबिल न बन सका मैं..।।

शुक्रवार, 20 सितंबर 2024

मैं मर चुका हूं..

मैं मर चुका हूं..
फर्क बस इतना है कि सांसे चल रही है..
सच में, 
मैं मर चुका हूं..
बस ये हांड-मांस का शरीर जिंदा है..
मैं मर चुका हूं..
मैंने स्वयं ही, 
स्वयं को मारा है..
और अब जो ये हांड-मांस बचा हुआ है,
उसे भी खोखला कर रहा हूँ..
मैं मर चुका हूं..
मैं हर रात,अगली सुबह जिंदा होने का सोचता हूँ..
मगर मैं, दिन चढ़ते ही धराशायी हो जाता हूँ..

सच में, मैं मर चुका हूं..
सिर्फ सांसे चल रही है,और ये हांड-मांस काम कर रही है..

इन सांसों में अभी भी ऊर्जा भरी जा सकती है..
इस हांड-मांस को फिर से नए कीर्तिमान रचने के लिए उपयोग किया जा सकता है..
क्योंकि सांसें यू ही नही चल रही है,
और ये हांड-मांस अब तक यू ही साथ नही दे रहा है..
कुछ तो वजह है..
की सांसे अब भी चल रही है..

गुरुवार, 19 सितंबर 2024

प्यार की पांति..

तुम अभी भी मेरी जेहन में हो..
तुम्हारा अक्स सहसा किसी चेहरा में ग़र दिख जाता है..
तो तुम याद आ जाती हो..
तुम सिर्फ याद ही नही बल्कि..
मुझे अपनी असफलताओं को याद दिला के चली जाती हो..

मालूम नही तुम कंहा हो..
आशा करता हूँ..
जंहा भी हो तुम...
खुश रहो..

संघर्ष

अगर आपको लगता है कि आपके जिंदगी में बहुत संघर्ष है..
तो घर से बाहर निकलिये...
आपसे भी ज्यादा संघर्ष औरों के जीवन मे है..
मगर वो संघर्ष से भाग नही रहे है..
बल्कि वो संघर्ष से लड़ रहे है और उस पर विजय पा रहे है..

आपने हाल ही मैं पैराओलंपिक में भारतीयों को पदक लेते हुए देखा होगा(अफसोस भारत की 75% आबादी को पता ही नही है)उन पैराओलंपिक खिलाड़ियों में आधे से ज्यादा के जीवन मे इतना संघर्ष था कि उनके चाहने वालों भी उनके मरने की कामना करते थे..।।

आपके चाहने वाले आपको जीता देखना चाहते है..।।

संघर्ष से घबराए नही..
बल्कि मुस्कुराते हुए सुनहरा भविष्य का स्वागत करने के लिए तैयार हो जाइए..

संघर्ष ही तो मनुष्य को निखारता है..
भला कौन है इस धरा पे जिसे बिना संघर्ष के कामयाबी मिला है..

शनिवार, 14 सितंबर 2024

धैर्य रखिये...समय बदलता है..

बाबर का नाम सुनते ही हमारे मन में क्या आता है..??
मूलतः हम भारतीय उसे आक्रान्ता ही मानते है..

मगर सही मायने में वो एक योद्धा था जो ताउम्र संघर्ष ही करता रहा..(आप इसे हिन्दू मुस्लिम नजरिये से मत देखिएगा..अगर देखना ही है तो इसके जिंदगी के संघर्ष को देखिए..जिसने सबकुछ खो कर सबकुछ पाया,इसने हरेक परिस्थितियों को स्वीकार किया,न कि परिस्थितियों का रोना रोया)



आपको जानकर हैरानी होगी कि वो काबुल में खुश था..
मगर भारत मे रह रहे शासकों ने ही इब्राहिम लोदी के ऊपर आक्रमण करने के लिए उसे न्योता भेजा..
न्योता भेजने वालों ने सोचा की जितने के बाद वो काबुल चला जायेगा जिस तरह उसके वंसज तैमूर लंग चला गया..
मगर बाबर ने आगरा पर साशन करने की सोची..

मगर आज हम बाबर के उन पहलुओं पे बात करेंगे जिन्हें हम नही जानते ....
जिन पहलुओं ने उसे पादशाह/बादशाह बनाया..
वो ताउम्र संघर्ष ही करता रहा..

इसके पिता फरगना के शासक थे,12 साल की उम्र में इसके पिता की मृत्यु हो गई,और ये 12 वर्ष की उम्र में शासक बना,मगर इसके चाचा ने इसके सक्ता को छीन लिया जिस कारण इसे निर्वासन की जिंदगी जीना पड़ा..
इसने फिर कोशिस की उस क्षेत्र को जीतने की जीत मिली भी मगर फिर कुछ दिनों के बाद फिर उस क्षेत्र को हार गया..

इस बार उस क्षेत्र को छोड़कर हिन्दकुश पर्वत पार कर काबुल आ गया और अपनी सैनिक बना कर उस क्षेत्र पर साशन किया..
फिर पंजाब के साशक दिलावर खां ने अपने बेटे और राणा सांगा ने अपना दूत बाबर के पास भेजा भारत पर आक्रमण के लिए..

बाबर के लिए सुनहरा अवसर था,और इसे उसने भुनाया..
इसने वो सबकुछ पाया जिसकी उसने कल्पना नही किया था..।।

बाबर ने कभी नही सोचा था कि वो भारत का साशक बनेगा,उसने अपना धेय्य और धैर्य बनाये रखा..
और उसे वो सबकुछ मिला जिसका उसने कल्पना तक भी नही किया था..

बाबर की जिंदगी से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है..
जिंदगी के संघर्ष से बचे नही बल्कि उससे निपटने की कोशिश करें.. 
क्योंकि संघर्ष से जितना बचने की कोशिस करेंगे संघर्ष का बोझ उतना ही बढ़ता जाएगा,और जिंदगी बोझिल होती जाएगी..।
●हमेशा अवसर की तलाश करते रहें, और उसे भुनाने की कोशिस करें..
●जीत के लिए जो भी दांव पे लगाना हो लगा दे..
●अपने जीत का श्रेय उन सभी को दे जो आपके जीत को संभव बनाये है..
●समय के साथ हो रहे बदलाव को स्वीकारे..

बाबर के जीत के अनेक कारण था मगर सबसे बड़ा कारण उसका धैर्य था..
अगर उसके पास धैर्य न होता तो सबकुछ खोने के बाद भी सबकुछ नही पा सकता था..

धैर्य और धेय्य हमेशा बनाये रखें..
आपको वो सबकुछ मिलेगा जिसके बारे में आप सोच रहे है...


Yoga for digestive system