रविवार, 25 मई 2025

गमले का फूल..

मैं जैसा हूँ..
मुझे वैसा ही रहने दो..
मुझे मत छेड़ो..
तुम्हें लग रहा होगा कि,तुम मेरी मदद कर रहे हो..
मगर वास्तविकता तो ये है कि..
तुम मुझे कमजोर कर रहे हो..।
मैं जैसे खिल रहा हूँ,
मुझे वैसे ही खिलने दो..।।


तुम मुझे सींचो..
तुम मेरे आसपास से खरपतवार हटाओ..।
बस यही करो..
मगर जब तुम नही रहोगे...
तब क्या होगा..??
कौन सींचेगा..कौन खरपतवार हटाएगा..??

अगर जब तुम मुझे छोड़ के जाओगे..
तब तुम मेरे साथ क्या करोगे..।
किसी और के भरोसे छोड़ के जाओगे..
या फिर किसी को गोद दे के चले जाओगे..
या फिर अपने हाथों से दरिया या फिर मिट्टी में दफन कर जाओगे..
या फिर यू ही कड़कती धूप में तिल-तिल के मरने को छोड़ जाओगे..।।

जब कभी भी ग़र छोड़ के जाना हो..
तो मुझे मानसून की बूंदा-बांदी में छोड़ के जाना..
ये बारिश की बूंद जब मेरे पत्तियों और फूलों पे गिरेंगे..
तो मैं उत्साहित होऊंगा..
और मैं तुम्हें भूल जाऊंगा..।।
फिर जब कुछ महीनों बाद जब बारिश खत्म होगी और कड़कती धूप निकलेगी..
तो मुझे पानी की जरूरत होगी..
और मैं तुम्हें याद करूँगा..
और मुझे,मेरी गलतियों का अहसास होगा..
और मैं मुस्कुराउंगा और तुम्हें दुआएं दूंगा..।।

मैं जैसा हूँ..
मुझे वैसा ही रहने दो..
मुझे मत छेड़ो..
तुम्हें लग रहा होगा कि,तुम मेरी मदद कर रहे हो..
मगर वास्तविकता तो ये है कि..
तुम मुझे कमजोर कर रहे हो..।
मैं जैसे खिल रहा हूँ,
मुझे वैसे ही खिलने दो..।।

बुधवार, 21 मई 2025

अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस...

क्या आपको पहली चाय की चुस्की☕ याद है..??

आज "अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस"☕(21 मई) है..।



पहली बार चाय दिवस मनाने का पहल भारत मे "विश्व सामाजिक मंच" के द्वारा 2004 में किया गया और घोषणा किया गया कि हरेक साल 15 दिसंबर को चाय दिवस के रूप में मनाया जाय..इस पहल के बाद अन्य चाय उत्पादक देश भी संगठित होकर 15 दिसंबर को मनाना शुरू किये..

आगे चलकर 2019 से U.N.O(यूनाइटेड नेशन) के द्वारा FAO(फ़ूड एंड एग्रीकल्चर आर्गेनाईजेशन) के कहने से 21 मई को "चाय दिवस" के रूप में मनाया जाने लगा....
इस बार की थीम "बेहतर जीवन के लिए चाय☕"


क्या आपको पता है चाय उत्पादन से 13 मिलियन से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलता है..।
मगर इनकी स्थिति दयनीय है(जो प्रत्यक्ष रूप से उत्पादन में जुड़े है)..एक तरह से इनकी स्थिति बंधुआ मजदूर की तरह है..।।

चाय☕ दुनिया में सबसे ज्यादा पिये जाने वाले पेय पदार्थ में दूसरे नंबर पर है..तो पहले नंबर पर कौन है🤔..??



क्या आपको चाय के इतिहास के बारे में जानकारी है..
इसका इतिहास कितना पुराना होगा..??
500 साल,1000साल,3000साल,5000साल..
कितना पुराना..??

इसका इतिहास लगभग 5000साल पुराना है..पहली बार चीनी सम्राट शेन नुंग ने इसका इस्तेमाल गलती से किया था..
क्या आपको पता है..
चाय का उत्पादन सर्वाधिक कंहा होता है..??


भारत अपने उत्पादन का 80% उपभोग कर लेता है..
भारत मे सर्वाधिक चाय का उत्पादन असम में होता है लगभग कुल उत्पादन का 52%..।।

क्या आपको चाय☕ की पहली चुस्की याद है..??
आपने चाय के टपरी पे सबसे ज्यादा किसके साथ चाय पिया☕ है..??(मैं एक का नाम लेना चाहूंगा जिसने चाय की टपरी की आदत लगाई..उस प्यारे दोस्त का नाम तरुण है..)
अगर आपको मौका मिले तो आप किसके साथ चाय☕ पीना चाहेंगे..??

चलिए चाय के चुस्कियों के साथ उन सुनहरे दिन को याद कीजिये ..
जिसने आपको सुनहरें यादें दिए है..।।
☕☕☕



मंगलवार, 20 मई 2025

क्या भगवान है...??जरा सोचियेगा..

भारत ही एक ऐसी भूमि है,जंहा इंसान भगवान बन सकता है..
अपने कर्मों के द्वारा..।।
जब हम अपने आदर्शो के आचरणों को अनुसरण नही कर पाते, तो उन्हें भगवान मान लेते है या फिर भगवान का अंश मान लेते है..।



शायद ही भारत का कोई ऐसा कोना हो..जंहा कोई भगवान न हो..भले ही उस कोने में इंसान न मिले मगर भगवान जरूर मिल जायेंगें..।
शायद ही ऐसा कोई जगह हो..जंहा भगवान का भग्नावशेष न हो..भले ही वंहा कोई जीवाश्म मिले या न मिले मगर भगवान का अवशेष जरूर मिल जाएगा..।।

मगर क्या सच में भगवान है..??
जरा सोचियेगा.. 
अच्छा ये बाद में सोचियेगा..।

कुछ सवाल से रूबरू होते है..
हम अपने भगवान को क्या-क्या उपमा देते है..सोचिये
करुणानिधि,दया के सागर,दुखभंजन,परमपिता न जाने और क्या-क्या..
क्या जब आप अपने भगवान को याद करते है तो वो किसी तरह का जबाब या सिग्नल देते है..??
शायद नही..अगर हां, तो आपमें सही बोलने की हिम्मत नही है,क्योंकि आप अभी भी डर रहे है..कंही बुरा न हो जाये..।।
अक्सरहाँ हमारा जबाब होता है हम में वो भाव नही है..इसीलिए शायद हमारी आवाज उन तक नही पहुंचती..।।
अच्छा...ये बात है..।

आप अपने माँ को किसी तरह से भी आवाज दीजिये..
गुस्सा होकर के,प्रेम से,दुखी से,हंस कर के..
हमें 99% उम्मीद है कि हम माँ को किसी तरह से आवाज दे वो जरूर जबाब देती है,चाहे वो कितना भी व्यस्त हो..।।
और आपका भगवान..??

आपको लग रहा है कि मैं पगला गया हूँ..और आपको भी मैं, पगला रहा हूँ..तो आप गलत है..।।

दरसल हम-आप भारत के वास्तविक अध्यात्मिक ज्ञान से रूबरू नही हुए है,या फिर बताया नही गया है..।।
हम वेदांत पढ़ते है,न ही उपनिषद पढ़ते है..
क्योंकि जब हम इसे पढ़ना शुरू करते है तो ये हमारे पुराने अवधारणाओं को चोट पहुँचाता है..और आज मनुष्य इतना सक्षम नही है कि इस चोट को सह पाए..।
हम जिस भगवान को आज पूजते है..उनका जिक्र न वेद में है,न ही उपनिषद में..उनका जिक्र स्मृति ग्रंथों में है,जो सबसे बाद में लिखा गया..ज्यादातर स्मृति ग्रंथ गुप्तकाल में ही लिखा गया..।।

कभी-कभी यूट्यूब और गूगल पर उपनिषद के श्लोक को भी देख और पढ़ लिया कीजिये....क्या पता कब आप मे बदलाव आ जाये और आपके अंदर "अहं ब्रह्मास्मि" का भाव जग जाए..।।

सच में आप ही ब्रह्मा है,आप से ही ये ब्रह्मांड है,बिना आपके इस ब्रह्मांड का कोई अस्तित्व नही है..।
आपको क्या लगता है..सही या गलत..।
आपको अगर गलत लगता है, तो आप गलत है..।।
क्योंकि आपके लिए ये ब्रह्मांड तबतक ही अस्तित्व में है जबतक आप अस्तित्व में है..आप खत्म,आपके लिए ये ब्रह्मांड खत्म..।।

उपनिषदों में बड़ी गूढ़ बातें कही गई है..
ये बातें अगर आप करना शुरू करें, तो आप विक्षिप्त और न जाने क्या-क्या समाज और परिवार ही कहना शुरू कर दे..।।

वो लोग पागल नही थे जिन्होंने महात्मा बुद्ध, महावीर, सुकरात ,मोहमद पैगम्बर,यीशु के ऊपर पत्थर फेंके और यातना दिया..
दरसल उनलोगों को इनकी बात समझ में नही आई..
वास्तविकता ये है कि अभी भी किसी को इनकी बात समझ मे नही आई है..
अगर समझ में आ गया होता तो हम-आप अभी भी उनके झंडे नही ढो रहे होते..
महात्मा बुद्ध ने कहा था-"अप्प दीपो भवः" कितने हुए..।।

वर्तमान में इन अवधारणाओं को तोड़ा भी नही जा सकता क्योंकि इसके ऊपर पूंजीवाद हावी हो चुका है..
भले ही आपको ये मालूम न हो कि दीवाली क्यों मनाया जाता है.. मगर हम मना रहे है..
भले ही हमें मालूम न हो कि क्रिसमस क्यों मनाते है..मगर हम मना रहे है..
भले ही हमें मालूम न हो कि ईद क्यों मनाते है..मगर हम मना रहे है..।।
क्योंकि पूँजीपति ताकतें आपको अब भूलने नही देगी...।।

तो क्या सोचा..
भगवान है...??

ऋग्वेद के 10वे मंडल में ब्रह्मांड की उत्पत्ति और भगवान के बारे में कुछ कहा गया है..

"को अद्धा वेद क इह प्र वोचत्कुत आजाता कुत इयं विसृष्टिः । अर्वाग्देवा अस्य विसर्जनेनाथा को वेद यत आबभूव ॥६॥"

आख़िर कौन जानता है,और कौन कह सकता है, यह सब कहाँ से आया और सृष्टि कैसे उत्पन्न हुई?
देवता स्वयं सृष्टि के बाद जन्मे हैं, तो कौन जानता है कि यह वास्तव में कहाँ से उत्पन्न हुआ है। (ऋग्वेद 10,129,6)

"इयं विसृष्टिर्यत आबभूव यदि वा दधे यदि वा न । यो अस्याध्यक्षः परमे व्योमन्त्सो अङ्ग वेद यदि वा न वेद ॥७॥"

कहाँ से सारी सृष्टि की उत्पत्ति हुई, कौन था निर्माता, क्या पता उसने इसे बनाया हो,या उसने इसे न बनाया हो। 
निर्माता, जो उच्चतम स्वर्ग से इसका सर्वेक्षण करते है, शायद वह जानते हो, या शायद वह भी नहीं जानते हो (ऋग्वेद, 10,129,7)

ऋग्वेद ने उस भगवान पे भी सवाल उठाया है..
जिस भगवान के बारे में हमारी धारणा है कि इसने ब्रह्मांड को बनाया है..।।
मगर ऋग्वेद के अनुसार इस भगवान की उत्पत्ति भी इस ब्रह्मण्ड की उतपति के बाद हुई है..।।

तो अब आप क्या सोचते है..
भगवान है..??
अगर नही भी है,तो आस्था रखें.. 
क्योंकि भगवान के प्रति आस्था,आपको विपरीत परिस्थितियों से उबरने में मदद करेगा..।।
आस्था और विश्वास ही वो शक्ति है,
जो इंसान को भगवान की और अग्रसर करता है..।
आस्था दिव्य शक्ति के प्रति..विश्वास स्वयं के प्रति..।।








सोमवार, 19 मई 2025

मौन...

मौन सभी समस्याओं का समाधान है..
जितनी बड़ी समस्या हो,उतना लंबा मौन धारण कीजिये...।
और चुप रहना कुछ समस्याओं का हल है,
हरेक समस्याओं का नही..।।



सवाल ये है कि..
आखिर मौन होता क्या है,
क्या चुप रहना मौन है..??
बिल्कुल नही..
तो फिर..??
मौन होके देखिए जबाब मिल जायेंगें..।
2मिनट ही सही,रखके तो देखिए..हां अभी..

हेलो..क्या हुआ..??
क्या आप मौन रह पाए..
अगर हां, तो आप झूठ बोल रहे है..
बुरा मत मानियेगे..क्योंकि आप जब मौन थे, 
तब भी आपके अंदर ढेर सारे विचार चल रहे थे..।।
तो आप ही बताइए..
क्या आप मौन थे..??

तो आखिर मौन कैसे धारण करें..??
आंख बंद करें और बैठ जाये..
तबतक जबतक कोई विचार मन मे न आयें..।
विचारशून्य होना ही मौन है..
मन का शांत होना ही मौन है..
मन से ही मौन की उत्पत्ति हुई है..।
जबतक मन वस में नही होगा तबतक हम मौन नही धारण कर सकते..।।
मन को कैसे वस में करें..??
शुरुआत आंख बंद करके सांस को देखें..।
अगर जाप(मंत्र,नाम) करते है,तो उसे काल्पनिक रूप से अपने भृकुटि पे आंख बंद करके लिखे..।
इससे मन नियंत्रित हो जाएगा..।।

जब मन नियंत्रित हो जाएगा तो खुद-व-खुद मौन धारण हो जाएगा..।।



रविवार, 27 अप्रैल 2025

वीर कुंवर सिंह...1857 के क्रांति के नायक

अगर आपका उम्र 80 साल है,और आपसे आपका सारा जायदाद(संपत्ति) छीन लिया जाय तो आप क्या करेंगे..??

आज की ज़ेनरशन वो सबकुछ जानती है जो उसके लिए उपयोगी नही है..।।
मगर क्या आज का जेनरेशन "वीर कुंवर सिंह" को जानता है..??
आज हमारे प्रधानमंत्री जी ने अपने "मन की बात"में वीर कुंवर सिंह का चर्चा किया..कुछ ने गूगल पे सर्च किया होगा..शायद नही किया होगा..क्योंकि मन की बात आज की जेनरेशन सुनती कंहा है...😊।।



चलिए कोई नही..
मैं आपको ले चलता हूँ 1857 के उस समर में..
जिस समर में अंग्रेज सभी को एक तरफा धूल चटा रहा था..
मानो भारतीयों की जान की कोई कीमत ही नही है..
गाँव के गाँव और बस्तियों के बस्तियां जला दी गई..जिन्होंने भी क्रांतिकारियों का मदद किया, उसे अंग्रेजो ने खुलेआम चौराहे पे फांसी पे लटकाया या तोप में बांधकर उड़ा दिया..
इससे भी मन नही भरा तो हमारी माताओं और बहनों को स्तनों को काट लिया गया..वो दानव यहीं तक नही रुके उन्होंने जननांगों में मिर्ची के पॉवडर डालकर तड़पने के लिए छोड़ देते थे..।।
ये अंग्रेज इतने असभ्य थे इतने कुकर्मी थे कि जब आप इतिहास पलटोगे तो आपको घिन्न आएगी..
मगर अफसोस हम इतिहास पढ़ते ही नही..
इसीलिए तो हम आज भी मानसिक रूप से गुलाम है..।।

1857 के क्रांति में अंग्रेज ने अपने हरेक विरोधियों को कुचल दिया..मगर एक ऐसा विरोधी था, जिसे अंग्रेज हरा नही पाया..
वो थे..80 साल के "वीर कुंवर सिंह"..
डलहौजी ने नया फरमान लाया जिसका कोई संतान नही है, उसका जमींदारी और क्षेत्र ब्रिटिश सरकार का हो जायेगा..।
मगर वो अपना जमींदारी अपने भाई अमर सिंह को देना  चाहते थे..।

इसी बीच मंगल पांडेय को फांसी पे चढ़ाते ही,सैनिकों में विद्रोह भड़क उठा, और सैनिकों का आक्रोश पटना तक पहुंच गया..दानापुर छावनी के 7वी,8वी और 40वी रेजिमेंट के सिपाही वंहा से हथियार लेकर जगदीशपुर पहुंच गए और कुँवर सिंह से कहें कि आप हमारा नेतृत्व करें..
कुँवर सिंह इन सैनिकों को लेकर आरा के जेल पर चढ़ाई कर दिये और वंहा से सभी कैदियों को रिहा कर दिए..और अपने सैनिकों में शामिल कर लिए..।

इस विद्रोह को दबाने के लिए डगलस आया..जो कुँवर सिंह के हाथों युद्ध मे मारा गया..।
फिर विंसेट आयर आया इसने आरा शहर पे कब्जा तो कर लिया मगर कुँवर सिंह को नही पकड़ पाया..।

कुँवर सिंह अपने सैनिकों को लेकर बलिया,गोरखपुर, मिर्जापुर,बनारस,कानपुर,प्रयागराज,बांदा ,रीवा एवं अन्य क्षेत्र तक गए और अंग्रेज से लड़ने के लिए इनसे सहयोग मांगा..
इनके इस उम्र में इतना हौंसला देखकर सब लोगों ने इन्हें अपना-अपना सहयोग देने का वादा किया..मगर..
इसमे से रीवा के राजा अंग्रेज से मिले थे इन्होंने कुँवर सिंह को कैद करने का सोचा मगर रीवा के सिपाहियों के मदद से वंहा से वो निकल गए..।

जब कुँवर सिंह अवध(सबसे धनाढ्य प्रदेश) पहुंचे तो उनका स्वागत अवध की रानी "बेगम हजरत महल" ने शानदार तरीके से किया..उन्होंने आजमगढ़ की जमींदारी वीर कुंवर सिंह को दे दिया..।
जब अंग्रेज को ये बात पता चला तो वो घबरा गया और आजमगढ़ में ही कुँवर सिंह को घेरने का योजना बनाया..
डनबर ने आजमगढ़ को चारों और से घेर लिया..
और यंहा "अतरौलिया का युद्ध" शुरू हुआ..
जिसमें कुँवर सिंह के हाथों डनबर की मृत्यु हुई..।।

ये खबर हवा की तरह कलकत्ता तक पहुंच गया..
जब ये खबर गवर्नर जेनरल "लार्ड केनिंग" को पता चला तो वो चिंतित हो गया...
उसने कुँवर सिंह के ऊपर 20 हज़ार का इनाम की राशि घोषित किया..(वर्तमान में अगर आकलन करें तो 2 करोड़ से ज्यादा) 
कुँवर सिंह को घेरने के लिए चारो और से सेना आजमगढ़ भेजा गया..
जब कुँवर सिंह को ये बात पता चला तो उन्होंने अपने सैनिकों को दो भागों में बांट लिया..एक को युद्ध मोर्चा पे लड़ने के लिए भेजे और एक के साथ जगदीशपुर के लिए निकल गये..।
अंग्रेज को लगा कि वो जीत रहे है,मगर कुँवर सिंह तो उनके हाथों से निकल रहे थे..।
जब ये बात अंग्रेज को पता चला तो उनके जनरल पागल हाथी की तरह बेकाबू हो गए..आजमगढ़ की जनता पर बेरहम अत्यचार किये..जो भी आया सबको मौत के घाट उतार दिया गया..।
कुँवर सिंह को पकड़ने के लिए ली ग्रांड के नेतृत्व में एक टुकड़ी भेजा गया..।

22 अप्रैल 1858 को गंगा नदी को पार करते वक़्त ली ग्रांड की सेना ने अंधाधुंध गोलियां चलाना शुरू किया..एक गोली कुँवर सिंह के बांह में आकर लग गई..उन्होंने तुरंत तलवार निकाला और उस हाथ को दूसरे हाथ से काटकर गंगा में बहा दिया...जिससे गोली की जहर पूरे शरीर मे ना फैल जाए..।।
ली ग्रांड की सेना ने जब इन्हें चारों और से घेर लिया तो इस अवस्था मे भी वो साहस से लड़ें और ली ग्रांड की सेना को हरा कर जगदीशपुर पहुंचे..।।

खून बहुत बह जाने के कारण इनकी तबियत खराब होने लगी और 26 अप्रैल 1858 को इस महान योद्धा ने अपना शरीर त्याग दिया..
जब इनकी मृत्यु हुई तो इनके किला पे यूनियन जैक का झंडा नही बल्कि जगदीशपुर का झंडा फहरा रहा था..।

1857 के क्रांति के इकलौते नायक जिसे अंग्रेज जीते जी नही हरा पाया...

1857 के क्रांति के इकलौता नायक जिसके ऊपर अंग्रेज को 20 हजार का इनामी राशि रखना पड़ा..

1857 के क्रांति के इकलौता नायक जो सिर्फ अपने क्षेत्र तक ही नही बल्कि पूरे उत्तर भारत से लेकर मध्य भारत तक अंग्रेजो से लड़ा..

1857 के क्रांति के इकलौते नायक जो सिर्फ क्षेत्रीय स्तर पर नही बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर उभरे..।।

अंग्रेज इतिहासकार ने इनके बारे में कहा-
"भाग्य मनाओ की ये बूढा है,अगर जवान होता तो क्या होता"

V. D सावरकर ने अपने किताब "1857 प्रथम स्वंतंत्रता संग्राम" में 7 क्रांतिकारियों की चर्चा की है जिसमे से वीर कुंवर सिंह एक है..।।

अब जरा आप सोचिये..
एक 80 साल का बूढा जिसने अंग्रेज हुकूमत को नाक में दम कर दिया..अंग्रेज उनसे जीते जी नही जीत पाया..हर बार मुँह की खानी पड़ी...।।
मगर आज की युवाओं की दशा क्या है..??
दशा इसलिए है क्योंकि कोई दिशा नही है..।।

आप तो युवा है..
और स्वतंत्र है..
तो फिर ये दशा क्यों है..??
जिस बुराइयों के बेड़ियो से बंधे है..
उन्हें तोड़ दे..।
जिस मोह में फंसे है..
उसे मरोर दे..।
अब नही तो और कब..।
80 साल का बूढा कुँवर सिंह अंग्रेज सामज्र्य को अपने अंगुलियों पे नचाया..
आप तो युवा है...
और स्वतंत्र है..
तो फिर ये दशा क्यों है..??


गुरुवार, 24 अप्रैल 2025

पापा से शिकायत है..

पापा से शिकायत है..
अगर हां,
तो खुद को पापा के जगह पर रख के देखो..।
पापा आपसे नाराज है..
आखिर क्यों..??
पापा कभी नाराज नही होते,
बल्कि वो अपने संतति को हारते हुए और किसी तरह की कालिख लगते हुए नही देखना चाहते है..।

पापा को हर रोज उनका सामना करना होता है,
जिनसे आप नजरें तक मिलाना नही चाहते..।।
पापा को हर रोज उनका सामना करना होता है,
जो उन्हें हारता देखना चाहते है..
वो जब उनसे नही जीत पाते है, 
तो वो उम्मीद अपने संतति से लगाते है..
मगर जब संतति भी उस पे खरा नही उतरता है..
तब सोचो..
उनपे क्या बीतती होगी..।।

अब वो फिर उनसे कैसे नजरें मिलाते होंगे..
उनपे कैसे कटाक्ष का वार होता होगा..।

इस जंहा में सिर्फ पापा ही है,
जो आपको आगे..और आगे..बढ़ते देखना चाहते है..।।

पापा से शिकायत है...??
क्यों..??
पापा की मजबूरियों को समझों..
समाज और परिवार से बंधी बेड़ियों को देखों..
उनपे दायित्व निर्वहन के बोझ को देखों..
इस सारी विपरित परिस्थितियों के बावजूद वो तुम्हारे सुनहरे भविष्य के लिए सपने संजो रहे है...
क्या ये मामूली बात है..।

पापा से शिकायत है..।।
अगर हां...
तो खुद को पापा के स्थान पर रखकर देखों..।।



बुधवार, 23 अप्रैल 2025

विश्व पुस्तक दिवस..

चलिए आज विश्व पुस्तक दिवस पर कुछ किताब और कहानियों को याद करते है...।



आपको पहली पुस्तक याद है..जिसे आपने खुद से पढ़ा था..??
क्या आपको उसकी सुंगंध याद है..??
और क्या-क्या याद है..।।


मुझे वो पुस्तक आज भी याद है..
जिसे मैंने कई बार पलटा और उसके इंक के सुंगंध को कई बार सुंघा..
उस पुस्तक का नाम "बाल भारती" था वो दूसरी क्लास की पुस्तक थी..
इस पुस्तक को देखते ही कई कहानियां याद आ गई..।।
अब आप याद कीजिये..
आपके द्वारा पढ़ी जाने वाली पहली पुस्तक कौन सी थी..??

पुस्तक पढ़ने के कई फायदे है..
मगर अफसोस किताबों से दूरियां बढ़ती जा रही है..और pdf का अंबार इतना लग गया है कि हमें मालूम ही नही की कौन सा pdf किस चीज का है..??

शायद आपके द्वारा पढ़ा गया पहला पुस्तक का नाम याद आ गया होगा...अगर नही तो छोड़िए..
आपने आखरी पुस्तक कौन सी पढ़ी थी या पढ़ रहे है..??

मैं तो गौहर रज़ा का "मिथकों से विज्ञान तक"को पढ़ कर खत्म करने वाला हूँ.. 


अच्छा आखरी सवाल...
आपको सबसे ज्यादा कौन सी बुक ने प्रभावित किया..जिसे आप फिर से पढ़कर बौर नही होंगे..??

मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित ब्रायन ट्रेसी की "लक्ष्य"(Goal) ने प्रभावित किया..और रामधारी सिंह दिनकर की "रशिमरथी" ने..मैं जब भी उदास होता हूँ तो रशिमरथी को पलटता हूँ और ऊर्जा प्राप्त करता हूँ..।।

बस ये आख़री है..
आपको वो पहली कहानी याद है जो आपके मन-मस्तिष्क में अभी तक छपा हुआ है..??
हां मेरे मन मस्तिष्क में छपा हुआ है, 9th क्लास में प्रेमचंद्र की कहानी "ईदगाह"पढ़ी थी..उसका पात्र हामिद आज भी याद है..।।

आज अपनी मनपसंद की किताब और पत्रिका पढ़ना बहुत आसान है..क्योंकि एक क्लिक में वो हार्डकॉपी और सॉफ्टकॉपी में उपलब्ध हो सकता है..
मगर अफसोस हममें पढ़ने की लालसा ही खत्म होती जा रही है...आखिर क्यों..??
खुद सोचियेगा...।।

किताब पढ़ने के अनेक फायदे है...

यूनिवर्सिटी ऑफ सक्सेस के एक अध्ययन में पाया गया कि सिर्फ 6 मिनेट पढ़ने से 68% तक तनाव कम होता है..यह योग या टहलने से भी ज्यादा असरदार है..
"पढ़ने से दिमाग काल्पनिक दुनिया मे चला जाता है, जो जीवन की चिंताओं से ध्यान हटाता है,और रक्तचाप कम करता है"

• अगर रोज 20 मिनट पढ़े तो साल के अंत तक 18 लाख शब्दों के संपर्क में आ जाएंगे।जिससे भाषा शैली में सुधार होता है।
एक अध्ययन में पाया गया कि-"किताब पढ़ने से हमदर्दी की भावना जागृत होती है"।

एक रिसर्च बताती है कि जो लोग किताब पढ़ते है, उनके जिंदगी से तनाव घटता है,नींद बेहतर आता है और भावनात्मक सेहत सुधरता है..यही नही किताब पढ़ने वाले कि उम्र आम लोगों के अपेक्षा 20% ज्यादा होता है..।

2013 में न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन के अनुसार,नियमित पढ़ने वालों की यादाश्त बेहतर होती है साथ ही अल्जाइमर का खतरा  20% तक कम हो जाता है..।।

क्या सोच रहे है..
आज आपके हाथ मे सिर्फ मोबाइल ही नही बल्कि विश्व की सबसे बड़ी लाइब्रेरी पड़ी हुई है..सिर्फ सर्च करने तक कि देरी है...।।मगर जो मजा कागजों को पलटते हुए,इंक की सुंगध लेते हुए पढ़ने में जो मजा है,वो किंडल और pdf पढ़ने में नही..।।