बुधवार, 3 सितंबर 2025

क्या हुआ जो फिर गिर गए..

क्या हुआ,जो फिर गिर गए....

होंसला रख, चल खड़ा हो

और चल अपनी मंज़िल की और..।

वो तुम्ही हो,जो गिर के चलना सीखा है..                          

एक बार नही कई दफा गिर के चलना सीखा है..              

अगर तुम डर जाते,तो क्या तुम फिर चल पाते..??

क्या हुआ जो..फिर गए..।

वो तुम्ही तो थे..

जिसे अंधेरों से कभी डर लगता था..

अब अंधेरा अच्छा लगता है..।

वो तुम्ही तो थे..

जो काम ठान लिया उसे मुकाम तक पहुचाते थे..।

वो तुम्ही तो थे..

जो हार कर फिर से एक बार जीतने को खेलते थे..

मगर फिर हार जाते थे..

मगर फिर भी खेलना नही छोड़ते थे..

क्योंकि तुमने खेला था जी जान से..।।

क्या हुआ,जो फिर गिर गए..??

गिरना तो लाज़मी है, सफर में,

क्योंकि वो सफर..

सफर ही क्या..

जिस सफर में थोड़ा ग़म और खुशियां ना हो..।

क्या हुआ,जो फिर गिर गए..??

उठ खड़ा हो..

इस विराट आसमां को देख..

और अपने हौंसले को देख..

अपने हौंसले को विराट कर, 

अपने असफलता को परास्त कर..।।

क्या हुआ, जो फिर गिर गए..??

गिरना तो नियति है..

अगर गिर कर उठ ना सके तो फिर सोच ले..

क्या होगा..??

उठ खड़ा हो..

और अपने नियति से मिल..

तबतक आगे चलता चल,

जब तक अपने मुकाम को ना पा ले..।।

क्या हुआ,जो फिर गिर गए..??




अवसर कभी खत्म नही होता..

आप कभी हाईवे पे सफर किये है..??
किया ही होगा..
हाईवे और जिंदगी में कई समानता है..
जिंदगी भी तो एक हाईवे की तरह ही है..
ये भी कंही खत्म होती है, या फिर किसी मे मिल जाती है..
(इसपे कभी और बात करेंगे)

हाईवे और गाँव-घर के सड़कों में क्या अंतर है..??
ढेर सारे अंतर आपको नजर आ गया होगा..
मगर सबसे बड़ा अंतर ये है कि आप..हाईवे पे U-टर्न से ही गाड़ी को घुमा सकते है..मगर अन्य सड़को पर आप कंही से भी गाड़ी को घुमा सकते है..।।

माना कि आप.. हाईवे पे सफर कर रहें है और आगे से आपको U-टर्न लेना है..मगर आपका ध्यान कंही और चला जाता है और टर्निंग पीछे छूट जाता है..अब आप क्या करेंगे..??


क्योंकि आप गाड़ी को पीछे कर नही सकते क्योंकि पीछे से आ रही गाड़ी आपको ठोक देगा..क्या करेंगे आप..??
सोच रहे होंगे.. इसमें करना क्या है,आगे वाले टर्निंग से U-टर्न ले लेंगे..।
कितना आसान है..थोड़ा समय लगेगा मगर मंजिल तक तो जरूर पहुंच जाएंगे..।।

यही तो..जिंदगी के साथ होता है..
जिंदगी भी एक हाईवे की तरह है...
हममें से कई लोग असफल होने पर टूट जाते है,उन्हें लगता है जिंदगी खत्म हो गई..।
जो कि गलत है..इन हाईवे के तरह,आगे एक और U-टर्न पॉइंट है..
जो आपको मंजिल तक पहुंचा सकता है..अगर वो भी टर्निंग छूट गया तो क्या हुआ ,आगे फिर एक U-टर्न है..
आप भले ही लक्ष्य से दूर हो रहे है..मगर जब तक आपके अंदर लक्ष्य को पाने की लालसा है तबतक आपके लिए अवसर का द्वार खुला हुआ है..।।
जब आप अपने लक्ष्य को ही भूल जाएंगे...तो अवसर को कैसे पहचानेंगे..।।
इसीलिए चाहे कितनी बार भी असफल क्यों ना हो..
अपने लक्ष्य को ना भूले..
जब तक आपके अंदर लक्ष्य को पाने की लालसा है,तबतक आपको सफल होने से कोई नही रोक सकता..।।

सोमवार, 1 सितंबर 2025

दाग धुलते है..

आपने कभी गंदे कपड़े धोये है..??
अगर हां,तो धोने के बाद आपको क्या बदलाव नजर आता है..??
गंदगी हट जाती है,पहले से ज्यादा साफ नजर आती है..।
है ना..मजेदार बात..।।
आप कहेंगे, इसमें मजेदार क्या है..??


मजेदार बात ये है कि,जब थोड़ी मेहनत करने से कपड़े के दाग धूल सकते है..तो खुद पर मेहनत करने से खुद को क्यों नही संवार सकते है..??
जिंदगी संवारने में जो सबसे बड़ी दुविधा ये है कि हम,अपने  जिंदगी के किस क्षेत्र में काम करें जो संवर जाएं..
क्योंकि कपड़े के दाग दिखते है,तो हम उस जगह को साफ कर देते है..
मगर हममें जो कई दाग है,वो सिर्फ हमें ही दिखते है..इसलिये उसे दूर करने की कोशिस नही करते..
काश वो दाग सिर्फ हमें ही दिख रहे है,वो कई और को दिखता तो हम जरूर उसपे काम करते..क्योंकि कई लोग टोकते,तो कई लोग सलाह देते की ऐसे करने से ये सही हो जाएगा..।।
मगर अफसोस जो दाग सिर्फ हमे ही दिख रहे है वो दिन-प्रतिदिन इतना गहरा होता जाता है कि उसे धुलना नामुमकिन लगता है..कई बार प्रयास करने से भी असफलता हाथ लगती है..और फिर हम उस दाग को और गहरा होने देते है..।।

क्या ये दाग नही हट सकता..??

जरूर एक दृढ़ प्रतिज्ञा और सही दिशा में कार्य करने से ये दाग जरूर हटेंगे..।
सबसे पहले अपने दाग को पहचाने..
ये कब लगते है,और क्यों लगते है..
क्या करें कि ये ना लगे..
इस सब पर अभी कार्य करें.. 
एक नोट बनाये..।
हां अभी..बनाये..
क्या आपने बनाया..
अगर नही,तो प्लीज अभी किसी पेज पे लिखें..
क्या लिखा आपने..
अगर हां..
तो आपके समस्या का समाधान मिल गया होगा..😊।।

हरेक दाग धुलते है..कोई जल्दी,तो कोई देर से..
अगर दाग ना धुले तो..??
निरंतर प्रयास से दाग जरूर धूल जाते है...
पहले जैसा ना सही..
मगर वर्तमान से बेहतर हो जाता है..।

रविवार, 31 अगस्त 2025

प्यार की पांति..इक तुम्ही थी..

इक तुम्हीं थी..
जिसे देख के दिल धड़कता था..
जबकि,तुमसे कई हसीं चेहरे देखे है मैंने..
मगर किसी के लिए कभी दिल नही धड़का..
इक तुम्हीं थी..।।

शनिवार, 30 अगस्त 2025

प्यार की पांति..तुम्हारा अक्स..

तुम्हारा अक्स जब भी नजर आ जाता है,
मेरे चेहरे पे मुस्कान बिखर जाता है..
मानों रेत में, बारिश की फुहार हो रही हो..
अमावश की रातों में चाँद नजर आ रही हो..
कुछ ऐसा ही, हो जाता है कुछ पल के लिए..।।
तुम्हारा अक्स जब भी नजर आ जाता है..

अब ना ही तुमसे मिलने की हसरत है..
ना ही तुमसे कुछ कहने को दास्तां है..।
बस अगर कुछ है...
तो तुम्हारा अक्स है..
जो कभी-कभी मेरे चेहरे पे खुशियां बिखेर जाती है..।।
तुम्हार अक्स जब भी...



बुधवार, 27 अगस्त 2025

गणेश जी क्यों पूजनीय है..??

वक्र तुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ:।

निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभ कार्येषु सर्वदा ॥

ये मंत्र आपने जरूर कभी-न-कभी सुना होगा,क्या आपने कभी इस मंत्र का मतलब जानने का कोशिस किया है..??

"हाथी जैसे विशालकाय जिनका तेज सूर्य के सहस्त्र किरणों के समान है।आप हमेशा मेरे कार्य को बिना विघ्न के पूरा करें,एवं सदा ही मेरे शुभ की कामना करें..।"

उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार गणपति शब्द का उपयोग  ऋग्वेद(2.23.1) में मिलता है। वहीं "अमरकोश" में गणपति के आठ पर्यायवाची नाम मिलते है। विनायक, विघ्नराज,द्वेमातुर, गणाधिप, एकदंत,हेरम्बा, लंबोदर एवं गजानन..।



विनायक नाम का उल्लेख अनेक पुराणों एवं बौद्ध पुस्तको में मिलता है..

तमिल भाषा मे गणेश जी को पिल्लई या पिल्लैयार नाम से जाना जाता है।

वही बर्मा मे गणेश जी को "महा पेइने" और थाईलैंड में "खानेट" नाम से जाना जाता है..

गणेश जी सिर्फ भारत मे ही नही बल्कि अफगानिस्तान से लेकर पूरे दक्षिण पूर्व एशिया में पूजे जाते थे..उनकी अनेक छवियां चीन में भी मिले है..।।

6ठी शताब्दी से गणेश जी की मूर्ति भारत के कई क्षेत्र में बनने लगे और ये धीरे-धीरे अनेक क्षेत्र में बनता गया..।।


क्या आपने कभी गौर से गणेश जी को देखा है..??
शायद नही ही देखा होगा..

जरा गौर से फिर से देखिए..
और सोचिये...🤔
मन में क्या-क्या विचार आ रहा है..??

क्या आपने सोचा..??
अगर हां, तो क्या-क्या विचार आया...।।
उनका छवि कितना बेढोल है..
उनका मुख.. उनका पेट..उनका भीमकाय शरीर..
और ऊपर से उनका सवारी..मूषक..।।

इतना सब होते हुए भी वो सबसे पहले पूजे जाते है..
आखिर क्यों..??

वो उन सभी दिव्यांगों का प्रतिनिधित्व करते है..जिसे हम अलग नजर से देखते है..।ये उस समय से प्रतिनिधित्व करते आ रहे है जब दिव्यांग होना अभिशाप माना जाता था,वो आज भी माना जाता है..।
पुराणों उपनिषदों या पूरे विश्व के सभी ग्रंथों में ये एकलौते दिव्यांग अभिव्यक्ति है..जो सिर्फ पूजनीय ही नही बल्कि प्रथम पूजनीय है...बिना इनके पूजा के किसी का पूजा नही होता..।।

हो सकता है आप मेरे बारे में गलत सोच रहे हो..
सोच रहें ही होंगे,क्योंकि मैं कुछ भी बोल और लिख रहा हूँ..।
दरसल इसमें आपका या हमारा कोई गलती नही है..क्योंकि पुराण और उपनिषद कहानी के रूप में लिखा गया है..इसे खुद से ही मंथन करके उसमें से निचोड़ निकालना होगा..।।

आप अपने सभी देवी देवता को देखें..और उनके सवारी और उनके आसन को देखें...क्या उन जीवों को सवारी बनाना आसान है..?

अब गणेश जी को देखें...और उनके सवारी को देखें..दरसल गणेश जी ने मूषक को चुना नही बल्कि मूषक ने गणेश जी को चुना..।।
गणेश जी के आसन(बैठने वाला जगह) को देखें एक साधारण सा तख्त और अन्य देवताओं का आसन देखें..।।

इतने सब होने के बाद भी गणेश जी प्रथम पूजनीय क्यों है..??
हम आपने एक पौराणिक कहानी सुना है,
कहानी का सारांश ये है कि- "गणेश जी पार्वती के बेटे है और वो पार्वती के द्वारपाल बने है जो अंदर किसी को न आने देने की आज्ञा का पालन कर रहे है..शिव जी आते है वो जाना चाहते है मगर गणेश जी जाने नही देते है,शिवजी को गुस्सा आता है और वो उनका वध कर देते है ये देखकर पार्वती जी को गुस्सा आता है,शिवजी गुस्सा देखकर उनको फिर से जीवित कर देते है..।।"

अब इस कहानी को दूसरे नजरिये से देखिए-
गणेश जी जब पैदा हुए तो इनके शरीर को देख कर इनके माता-पिता ने इन्हें छोड़ दिया होगा(जो आज भी होता है)और ये माता पार्वती को मिलते है,और ये इनका लालन-पालन करते है..हो सकता है शिवजी वर्षों बाद अपने घर आये हो..और गणेश जी को देखकर अचंभित हुए हो..और गणेश जी को लेकर माता पार्वती और शिवजी में खूब गहमा-गहमी हुआ हो...।
फिर शिवजी गणेश जी को स्वीकार करने के लिए तैयार हो गए हो..
और गणेश जी का अच्छा परवरिश और उस समय के हरेक ज्ञान से उन्हें अवगत करा दिया हो..और वो उस समय के सबसे बड़े विद्वान बन गए हो..और सभी देवी-देवता को उनके विद्यता के सामने नतमस्तक होना पड़ा हो..।।
शायद यही वहज हो..जिस कारण वो प्रथम पूजनीय भगवान बने..
और गणेश जी अंत में इन सबका श्रेय अपने माता-पिता को देते है..।।

इससे हमें क्या सीख मिलता है..??

अगर हम एक मनुष्य है तो हमें गणेश जी से सीखना चाहिए कि..शरीर का सरंचना हमारे व्यक्तित्व में बाधा नही बन सकता..हम उस ऊंचाइयों तक पहुंच सकते है जंहा कोई नही पहुंच सकता..।
अपने माता-पिता के प्रति श्रद्धा(हमेशा रखना चाहिए) उस समय भी रखना चाहिए जिस समय आप जिंदगी के सर्वोच्च शिखर पर हों..क्योंकि अगर वो नही होते तो आप नही होते..।।
अगर हम माता-पिता है तो..हम अपने परवरिश से अपने संतान को जीवन के किसी भी ऊंचाइयों पे पहुंचा सकते है...।।(मगर अफसोस आज हम अपने बच्चों की परवरिश सही से नही कर रहे है,WHO के अनुसार,हरेक 10 में से 6 बच्चों(2-14 वर्ष) के साथ माता-पिता या उनके जानने वाले उन्हें शारीरिक दंड देते है)

गणेश जी सिर्फ विद्वता,और अच्छे संतान का ही प्रतिनिधित्व नही करते बल्कि वो उन करोडों लोगों का प्रतिनिधित्व करते है,जो समाज के हाशिये पे नही बल्कि समाज का हिस्सा तक नही है..।।

ऐसे प्रतिनिधित्वकर्ता को बारंबार प्रणाम..
ऐसे संघर्षकर्ता को बारंबार प्रणाम..
सभी विद्या के विद्वेता को बारंबार प्रणाम..
उनके माता पिता को बारंबार प्रणाम..।।






मंगलवार, 26 अगस्त 2025

आखिर जीत कुत्ते की हुई..

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR से आवारा कुत्ते को हटाने का आदेश दिया था मगर कुछ कुत्ते प्रेमी और NGO सड़क पे उतर आए..खूब कोहराम मचा..अंत में मुख्य न्यायाधीश को हस्तक्षेप करना पड़ा और उन्होंने 3 जजों की स्पेशल बेंच का गठन किया...

3 जजों ने निर्णय दिया कि किसी कुत्ते को  दिल्ली-NCR से हटाया नही जाएगा,बल्कि सबों का नसबंदी करके उसी जगह पर छोड़ दिया जाएगा..।।


क्या कुत्ता इतना बड़ा समस्या बन गया कि,हमारे सुप्रीम कोर्ट को दखलंदाजी करना पड़ा..??

PIB(press information bureau) के अनुसार 2022 में 21.89 लाख कुत्ते के काटने का मामला आया था जबकि 2024 में 37.15 लाख..

WHO के अनुसार हरेक साल 55 हजार से ज्यादा मौत रेबीज़ से होता है,इसमें से मरने वाला हरेक तीसरा भारतीय होता है..।।

क्या आपको पता है..??

सबसे पहला पालतू पशु कौन था..??

सबसे पहला जीव जो पृथ्वी के ऑर्बिट में गया..??

इंसानो और कुत्तों के बीच मे दोस्ती का सिलसिला लगभग 20-40 हज़ार के आसपास से है..।

जब मानव अपने बदलाव के चरण में थे उसी समय कुछ भेड़ियों में भी हार्मोनल बदलाव आना शुरू हुआ..।जिस कारण ये मानव के करीब आये..और मनुष्य ने शायद अपना बचा हुआ मांस का टुकड़ा इन्हें दिया होगा और ये तब से इनके आसपास रहना शुरू कर दिए होंगे...और बदले में ये शिकार में मदद करते होंगे..।

जेनेटिक टेस्टिंग से पता चला है कि 90% कुत्ते सिर्फ 3 मादा भेड़िये से विकसित हुये..🤔

मानव और कुत्ते के बीच मे संबंध का एक बड़ा कारण हार्मोनल है..जब इंसान या कुत्ते एक दूसरे के आंख में देखते है तो ऑक्सीटोसिन हॉर्मोन का स्त्राव होता है..जो एक दूसरे के लगाव को बढ़ाता है..।।

सिंधु सभ्यता से लेकर मेसोपोटामिया के कब्र से अनेक साक्ष्य मिले है जंहा इंसान के साथ कुत्तों को दफनाया गया है..।।

ये इतने सालों से हमारे साथ रह रहे है कि ये हमारे समाज ही नही बल्कि हमारे सुख-दुःख का भी हिस्सा बन चुके है..।।

शायद इसलिय जब सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा कदम उठाया तो लोग विरोध पर उतर आया..मगर ये भी हमें देखना होगा कि,कुत्ते के काटने की घटना दिनप्रतिदिन बढ़ती जा रही है..।।

इससे निदान के अनेक उपाय है...

•अगर सच मे आप कुत्ता प्रेमी है तो आप देसी नस्ल का कुत्ता पालिये..।

•सड़क चौराहे पे खिलाने के जगह उसे अपने घर या दरवाजे के सामने खिलाये..।

•इन्हें नियमित टीकाकरण करवाये..।।

मगर ये आसान नही तो मुश्किल भी नही है...

मगर इन आवारा कुत्ते से अनेक देश ने निजात पाई है भारत भी अगर चाहे तो निजात पा सकता है..इन कुत्तों का नसबंदी करके..सिंगापुर, स्वीडन,भूटान ने कर दिखाया है..।।

अब सुप्रीम कोर्ट के दखलंदाजी से जरूर कुछ बदलाव आएगा..।।

"कुत्ते समस्या नही है,बल्कि हम ही समस्या है...हम इतने बड़े समस्या है कि,आज प्रकृति कराह रही है..मालूम नही प्रकृति हम मानवों के साथ क्या करेगी..।"








Yoga for digestive system