शनिवार, 6 सितंबर 2025

बनारस और यादें..

अभी-अभी अचानक बनारस नाम पर नजर पड़ गया..और तुम याद आ गई..।


यू ही बनारस की गलियों में भटकना याद है मुझे,
यू ही BHU के कैंपस में भटकना याद है मुझे..
यू ही गंगा घाट पे भटकना याद है मुझे..
पता है,क्यों..??
शायद तुम्हारा दीदार हो जाये..।

मगर कंहा..??
ऐसी किस्मत पाई थी मैंने.. 
जो तुम्हारा दीदार होता..।।
तुम्हारा दीदार तो ना हुआ..
मगर तुम्हारे कारण कई यादें अबतक जेहन मैं है..।।









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