फिर मैंने सोचा-
"हिन्दू नारी इतनी असहाय होती है,उसे पति से,पुत्र से,सभी से इतना लांक्षन,अपमान और तिरस्कार मिलता है कि पूजा-पाठ न हो तो पशु बन जाये।पूजा पाठ ने ही हिन्दू नारी का चरित्र अभी तक इतना ऊंचा रखा है..।"
क्या आप बता सकते है की ये पंक्तियां किस पुस्तक से लिया गया है..??
मैं भी कमाल करता हूँ,कंहा से बता पाएंगे आप..कल तक तो मैं भी अनजान था इन पंक्तियों और इस रहस्य से..।।
सालों से इच्छा थी ये पुस्तक पढ़ने की मगर पढ़ने का मौका ही नही मिला..अमेज़न,फ्लिपकार्ट पे सर्च करके कार्ट में कई दफा रखा,मगर कितने पुस्तक खरीदे और पढ़ लिया मगर इसे पढ़ने से बार-बार वंचित ही रह जाता था..।
मगर इस बार जब अपने घर से आ रहा था,तो स्टेशन पर ये बुक दिखी..मैंने बुक इसलिय नही खरीदी की मुझे पढ़नी थी,क्योंकि मैंने इसलिए खरीदा,की मेरे खरीदने से, शायद ये बुकस्टाल शायद एक दिन और चल जाये।(स्टेशन से लगभग बुक स्टॉल गायब हो चुके है,आज से 5 साल पहले तक लगभग हरेक स्टेशन पर आपको बुक स्टॉल मिल जाता,मगर आज दुर्लभ होता जा रहा है)
ये पुस्तक 1949 में प्रकाशित हुई थी,मगर आज भी ये हिंदी साहित्य(उपन्यास)में अपना अग्रणी स्थान रखता है..
इस पुस्तक का नाम "गुनाहों का देवता" है,जिसे धर्मवीर भारती ने लिखा है..।
इन्होंने लेखनी के माध्यम से प्रेम की नई ऊंचाइयां दी है...
इन्होंने इस पुस्तक में उन पहलुओं को भी छुआ है जो हमें वर्तमान में देखने को मिल रहा है..
"लिव-इन-रिलेशन"आज नया नाम है,मगर चंदर और पम्मी के बीच मे 1949 में ही था..और धर्मवीर भारती जी ने बखूबी प्रेम और लिव-इन-रिलेशन के बारे में बताया है..
एक आतिम्क है,तो दूसरा शरीरिक..शारीरिक भूख जब एक समय पर भर जाता है,तो दोनों के बीच में दूरियां बढ़ जाती है,जो लिव-इन-रिलेशन टूटने का सबसे बड़ा कारण है..।।
आत्मिक भूख कभी नही मरती..ये तो एक दूसरे की पूर्ति के लिए जान तक न्यौछावर कर देते है..।।
प्रेम का स्थान वासना से ऊपर है..जब हम प्रेम के माध्यम से वासना की पूर्ति करते है,तो प्रेम खत्म हो जाता है..।
इस पुस्तक के मुख्य पात्र- चंदर,सुधा,बिनती,पम्मी,गेसू इत्यादि है..
सबका अपना-अपना व्यक्तित्व है जो हमें कई सीख देता है..
इस पुस्तक के कुछ प्रमुख अंश-
•जीवन मे अलगाव,दूरी,दुख,और पीड़ा आदमी को महान बना सकता है।भावुकता और सुख नही।
•"ये आज फिजा खामोश है क्यों,
हर जर्रे को आखिर होश है क्यों?
या तुम ही किसी के हो न सके,
या कोई तुम्हार हो न सका।"
•कभी-कभी एक व्यक्ति के माध्यम से दूसरे व्यक्ति की भावनाओं की अनुभूति होने लगती है।
• मैं ईसाई हूँ, पर सभी अनुभवों के बाद मुझे पता लगता है कि हिंदुओं के यंहा प्रेम नही वरन धर्म और सामाजिक परिस्थितियों के आधार पर विवाह की रीति बहुत वैज्ञानिक और नारी के लिए सबसे ज्यादा लाभदायक है।उसमें नारी का थोड़ा बंधन चाहे क्यों न हो लेकिन दायित्व रहता है,संतोष रहता है,वह अपने घर की रानी रहती है।
•मनुष्य का एक स्वभाव होता है।जब वह दूसरों पर दया करता है तो वह चाहता है कि याचक पूरी विनम्र होकर उसे स्वीकारे।अगर याचक दान लेने में कंही भी स्वाभिमान दिखलाता है तो आदमी अपनी दानवृति और दयाभाव भूलकर नृशंसता से उसके स्वाभिमान को कुचलने में व्यस्त हो जाता है।
ये पुस्तक हरेक युवा को पढ़नी चाहिए खासकर उन्हें जो प्रेम के दहलीज पर कदम रख रहे है..धर्मवीर भारती ने खुद इसे 23 साल की उम्र में लिख दिया था..मगर इसे पढ़ने और समझने के लिए 25 की उम्र काफी है..।
अगर आप 25 से पहले इसे पढ़ लेते है तो आप अपने प्रेम को नई ऊंचाइयां दे पाएंगे..।
मगर आजकल तो प्रेम...कोपलें फूटने से पहले ही,हो जा रहा है..आज की जेनरेशन 100 सेकंड की वीडियो पूरा नही देख पाता है तो 100-200 पेज की पुस्तक कंहा से पढ़ पाएंगे..।।
मैं कहूंगा आज नही तो कल ये पुस्तक जरूर पढ़ें..
क्योंकि न ही प्रेम की उम्र होती है,और न ही वासना की कोई सीमा..
ये पुस्तक आपको प्रेम और वासना के पराकाष्ठा और अवसान से अवगत कराएगा..।।

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