उसके बाद क्या होता है..??
हम उनके बारे में भला-बुरा कहने और सोचने लगते है..।
आखिर ऐसा क्यों होता है..??
शायद हमारी अज्ञानता के कारण..।
एक तो हमें तकलीफ पहुँचाने वाले अपने अपराध से अनभिज्ञ है..
ऊपर से हम भी,उन्हें अपराधी बना के अपराध कर बैठते है..।
बल्कि होना ये चाहिए कि,उनके प्रति हमारे अंदर करुणा का भाव होना चाहिए..और उनके हित के लिए कामना करना चाहिए..।।
जरा सोचियेगा..
क्या आपने कभी जानबूझकर गलती किया है..??
जब आप जानबुझकर गलती नही कर सकते तब दूसरा कोई कैसे जानबूझकर गलती कर सकता है..।।
जब हमारे अंदर करुणा का भाव जाग्रत होता है,तब हमें अपराध तो दिखता है,मगर अपराधी नही..।।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें