मंगलवार, 9 सितंबर 2025

नेपाल,सोशल मीडिया और जेन-Z

नेपाल में जो हुआ आप उसे किस नजर से देखते है..??
आपका क्या राय है..??


मैं तो यही सोचता हूँ..जो नेपाल में हुआ वो कंही भी हो सकता है..।।
क्योंकि जो गुलाम है,उससे चलाक मालिक कुछ भी करा सकता है..।।
भले ही हम इसे जेन-Z आंदोलन कहें..



मगर वास्तव में ये हज़ारों किलोमीटर दूर एक हॉल में बैठे कुछ क्रूर और उन्मादी लोगों का हरकत है,जो अपना मनमानी चला रहे है..।।

इसकी शुरुआत कंहा से हुई..??
इसकी शुरुआत नेपाल सरकार के एक फैसले से हुई,जिसमें उन्होंने हरेक सोशल मीडिया के मालिकों से कहा था कि हरेक कंपनी को नेपाल में रेजिस्ट्रेशन,डेटा सेंटर,और कर्मचारी को नियुक्त करने को कहा गया..
मगर इन कंपनी ने कुछ रिप्लाई तक नही किया..जबकि ज्यों-ज्यों समय सीमा नजदीक आ रहा था त्यों-त्यों ये कंपनियां सोशल मीडिया पे राजनेताओं एवं उनसे जुड़े हरेक रिस्तेदारों की रहीश लाइफ स्टाइल की फ़ोटो शेयर इस तरह करने लगे जैसे..कोई युद्ध मे बम के गोले फेकते है..
ये यंही नही रुके..बल्कि ये कंपनियां हरेक प्लेटफार्म पे भ्रस्टाचार से जुड़े मुद्दे की बमबारी करने लगे..

फिर क्या, इन्ही में से किसी एक नेता को चुना जो कल तक पर्यावरण के लिए काम करता(सूदन गुरुंग) था। अचानक इसके पास इतना कुछ कैसे आ गया कि इसने अपनी आवाज जेन-Z तक पहुँचाया..।।



हम आप सोच भी नही सकते..
ये सोशल मीडिया क्या करा सकता है..
नेपाल सिर्फ एक ट्रेलर है..
अगर हम और हमारी सरकार अभी भी सतर्क नही हुए तो ये सोशल मीडिया के आका कंही दूर कोने में बैठकर किसी भी देश को गृह युद्ध या फिर किसी भी युद्ध मे झोंक सकते है और देश की बागडोर अपने हाथ मे ले सकता है(बांग्लादेश,श्रीलंका में भी इसकी परछाई दिखी थी,मगर किसी ने गौर नही किया)..।।

आने वाला कल AI का है..
इसका दूसरा पक्ष इतना भयावह है..की लोग बात तक नही करते..
AI के लिए एक उक्ति है- "अहं ब्रह्मस्मि"

नेपाल में जो हुआ,इस बारे में हरेक लोगों को सोचना चाहिए..
इसमें कई कारण है..
मगर..
"दुनिया पे राज गुलामों के द्वारा ही किया जाता रहा है..
बस हरेक युग मे इसका स्वरूप बदलता रहा है..
इस युग मे हमलोग सोशल मीडिया के गुलाम है.."







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