मगर क्या होता है..??
अक्सरहाँ सांत्वना के सिवा और कुछ नही मिलता..मगर ऐसे समय मे सांत्वना भी बड़ा काम आता है..।
हम अक्सरहाँ अपने समस्या का निराकरण के लिए इधर-उधर भटकते है.मगर इसका निराकरण हमारे स्वयं के अंदर ही है..।।
हम अक्सरहाँ जब सब जगह से हार जाते है,तब स्वयं के करीब आते है..और स्वयं से सवाल करते है..तब जादू होता है..क्योंकि स्वयं से सवाल करने पर स्वयं से जबाब मिलता है..।
आपने आखरी बार स्वयं को कब देखा था..या खुद के साथ कब समय बिताया था..
शायद याद नही होगा..या फिर जेहन में सवाल आया होगा कि ये क्या होता है..
सबसे पहले ये क्या होता है..इसका जबाब दे देता हूँ..स्वयं के साथ समय बिताने का मतलब स्वयं का अवलोकन करना
आप एक दिन,एक सप्ताह,एक महीना ,एक साल या फिर अबतक के पूरे जीवन का अवलोकन कर सकते है..
आपने क्या पाया,क्या खोया..आपमें किस तरह की कमियां और खूबियां है..इस तरह से स्वयं का अवलोकन कर सकते है..।
इसे करने से क्या होगा..??
साधारण शब्दों में कहू तो,हमें हमारे परेशानियों से छुटकारा या फिर रास्ता मिलेगा..या फिर भविष्य में होने वाली गलतियों से बच सके..अतीत में जो गलतियां हो चुका है,उस अपराधबोध से छुटकारा मिलेगा..
और जीवन जीने का अलग नजरिया मिलेगा..।।
स्वयं को कैसे देखे..??
बड़ा ही आसान है..
यंहा में 2 तरीका बताता हूँ..
1st:- आयने के सामने चुपचाप खड़े हो/बैठ जाये कम से कम 5-10 मिनट और सिर्फ स्वयं को देखते रहे..
ढेर सारे सवाल जेहन में आएंगे उसे आने देंगे..तबतक जबतक आना ना बंद हो जाये..
2nd :- रात में सोते वक्त अपने पूरे दिन के क्रियाकलाप का अवलोकन करें, आपने क्या अच्छा किया,कंहा गलती की..
आप इस तरह से 1 महीने,1साल या फिर अबतक के अपने पूरे जीवन का अवलोकन करें..
ये एक दिन नही रोज करें..
अगर रोज नही तो कम से कम सप्ताह में 1 दिन तो जरूर करें..
देखिए जिंदगी में किस तरह से बदलाव आता है..
वो भी सिर्फ स्वयं को देखने से...😊

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