रविवार, 3 सितंबर 2023

स्त्रियां समाज की धुरी है..



स्त्री का सम्मान करो,क्योंकि उसके सम्मान में ही आपका सम्मान है..

अगर वो चाहे तो आपको भगवान बना देगी..।

कैसे..??

जो आदर-भाव आप भगवान के प्रति रखते है,वही भाव रखना होगा..।

उसने राम और कृष्ण को ही नही बल्कि कइयों को वो उच्चतम स्थान दिलाया जो पूजनीय हो गए..।।


सुधा मूर्ति को शायद आप जानते होंगे..



नही जानते है तो आपका दुर्भाग्य है,

क्योंकि वर्तमान समय में वो महिलाओं के शीर्षतम स्थल पर है..

जो स्थान हमारे समाज ने सीता,राधा,मीरा,लक्ष्मीबाई को दिया..

वही स्थान आज सुधा मूर्ति का है..


मगर सुधा मूर्ति को मूर्त रूप देने में उनके पिता का अहम योगदान था,और नारायण मूर्ति को मूर्त रूप देने में सुधा मूर्ति का अहम योगदान था..।।


सुधा मूर्ति की पसंद नारायण मूर्ति थे,जब शादी होने वाला था तब नारायण मूर्ति बेरोजगार थे..

सुधा से जब उनके पिता ने पूछा कि लोग पूछेंगे की लड़का क्या करता है,तो हम क्या जबाब देंगे.. उन्होंने जबाब दिया कह दीजिएगा सुधा का पति है..।।

आज इंफोसिस को कौन नही जानता..??

अगर सुधा मूर्ति का विश्वाश नारायण मूर्ति पे नही होता तो आज इंफोसिस नही होता..।।

सच कहूं तो वर्तमान में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कौन होता..ये भी सोचने वाली बात होती...😊


मगर वर्तमान स्थिति बहुत दयनीय है...

क्यों..??

क्योंकि हमारा आर्थिक स्थिति दयनीय है..।।


जब कोख में बच्चा आता है तब से ही हम बेटे के लिए मंन्नते मांगने लगते है,क्यों..??

क्योंकि बेटी होगी तो शादी का खर्च बढ़ जाएगा..

अगर दुर्भाग्य से किसी गरीब और निम्न मध्यम आय वाले के यंहा बेटी ने जन्म ले लिया तो परिवार वाले सबसे पहले उसके शादी के लिए पैसा जमा करना शुरू कर देंगे..।।


मगर वो भूल जाते है,आज उनका अस्तित्व किसी के बेटियां के कारण ही है..

बेटियां अगर सुदृढ होगी तो हमारी आनेवाली पीढियां भी सुदृढ़ होगी..।।

अपनी बेटियों को सिर्फ पढ़ाये ही नही बल्कि गुनवक़्तापूर्ण शिक्षा दे,क्योंकि यही शिक्षा सिर्फ आपका ही नही, बल्कि देश और समाज को बदलने की मद्दा रखता है..।।


बेटियां सुदृढ होगी तब ही समाज सुदृढ होगा..

जब समाज सुदृढ होगा तब ही देश सुदृढ होगा..।


सिर्फ बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ से नही होगा..

क्यों बचाये,और क्यों पढ़ाये इसका भी जबाब देना होगा...


अनेक सरकार बेटियों के शादी के लिए अनेक योजना चलाती है..मगर उसके लिए गुनवक़्तापूर्ण शिक्षा/स्वास्थ्य/सुरक्षा के लिए प्रावधान नही करती..।।

जबकि इनके द्वारा वो अपने GDP को दुगुनी कर सकती है..।।


स्त्रियां समाज की धुरी है..

इसे सुदृढ़ करना जरूरी है..

अगर ये न सुदृढ हो,

तो समाज कैसे सुदृढ हो..।

क्योंकि सबसे पहले यही तो हाथों में पेन और पेंसिल थमाती है,

अगर पेन और पेंसिल की जगह छुरियां थमाए तो क्या हो..??

जरा सोचो..

कितना अपमान करोगे,

कब सम्मान करोगे..??

जब विनाश के मुहाने पे होगे..

तो यही हाथ थामकर विनाश से बचाएगी..।।

क्योंकि किसी ओर में वो अदम्य साहस नही..

जो साहस स्त्रियां में है..।।

स्त्रियां समाज की धुरी है,

उसे सुदृढ़ करना जरूरी है..।।


मैं कंहा ढूंढू तुम्हें..



मैं कंहा ढूंढू तुम्हें..

अब तुम्हीं बताओ..

FB पे ढूंढा, इंस्टा पे ढूंढा..कंहा-कंहा नही ढूंढा,

कंही नही मिली तुम..

जिंदगी यू-ही बद-से-बद्तर होती गई मेरी..

काश तुम्हें ढूंढने से अच्छा,

खुद को निखारा होता..

FB पे होता,इंस्टा पे होता..

गूगल पे लोग मुझे भी ढूंढ रहे होते..

शायद तुम भी मुझे ढूंढ रही होती..।।

न ही मैं उस काबिल हो सका,

न ही मैं अब तेरे काबिल हो सका..।।

जिंदगी के कुछ लम्हें अब भी बचे है,

काश उसे सवार लूं, तो जिंदगी यू ही सवर जाएगी..।।

जब जिंदगी सवर जाएगी..

तब तुम भी मुझे,और मैं भी तुझे किसी राह पे यू ही मिल जाएंगे..।।

मैं कंहा ढूंढू तुम्हें..??

गुरुवार, 31 अगस्त 2023

मेरी पहचान क्या है...

 मेरी पहचान क्या है,वो ढूंढने चला हूँ,

मेरी राह क्या है,उसे ढूंढने चला हूं,

भला कोई बताए,क्या ढूंढने से वो मिला है..जो है ही नही..

न मेरी पहचान है,न ही मेरी राहें है..।।

तो फिर मैं करू क्या..??

जो है नही उसे बनाने का प्रयत्न करें..

चाहे पहचान हो,या फिर राहें हो..

कब तक यू ही दूसरों के पहचान से जाना जाऊ,

कब तक यू ही दूसरे के बनाये राहें पे चलता जाऊ..।।

क्या मेरी जमीर मर चुकी है.. या फिर हमने ही मार दिया है..

इसिलिय तो खामोश दुसरो के पहचान को ओढ़े हुए दूसरों के बनाये राहों पे चला जा रहा हूँ...

बहन..



माँ के बाद सारी दुनिया से अगर कोई लड़ सकती है, तो वो बहन ही है..

माँ के बाद खुद भूखे रहकर पहले मुझे खिला दे वो बहन ही है..

माँ के बाद बिना शर्त स्नेह उड़ेल दे वो बहन ही है..

माँ के बाद अगर कोई माँ का स्थान ले सके, तो वो बहन ही है..

अपना सबकुछ त्यागकर ,पराए घर चली जाए वो बहन ही है...उसके बाद भी स्नेह का न्यौछावर करें वो बहन ही है..।।


भावनाएं शब्दों पे हावी है..

सच कहूं तो मेरी बहना.. 

मैं तुमसब से उतना स्नेह नही करता.. जितना तुमसब करती हो..।

अगर करता तो मेरी भावनाएं इन शब्दों को उल्लिखित ही नही होने देती..

जितने शब्द लिखने छूट गए,मैं उतना ही तुमसब से स्नेह करता हूँ...।।


शनिवार, 26 अगस्त 2023

इक खालीपन सा है..



इक खालीपन सा है,

उसे भरना है...

कैसे..??

मालूम नही,मगर भरना है...।।

किस चीज से भरना है...मालूम नही..।

मगर उस चीज की तलाश है..

क्योंकि जिस-जिस से भरना चाहा.. उससे तो खालीपन बढ़ता ही गया..।।

खालीपन इतना है,जैसे शांत समुन्द्र..

मगर वास्तिवकता ये है कि ये उतना ही खाली है,

जितना रेगिस्तान में मृग-मारीचिका के कारण पानी की धार..।।

इक खालीपन सा है...जो वास्तविकता में है ही नही..वो भरा हुआ है,जिसे हम खालीपन समझ बैठे है..।।

इक खालीपन सा नही,इक भरापन सा है..

जिसे खाली करना है..

और फिर खालीपन का अहसास करना है...।

एक खालीपन सा है..।


रविवार, 20 अगस्त 2023

बुरा जो देखन में चला...

हम सब की अपनी एक विचारधारा होती है,और हम अपने विचारधारा के अनुरूप सही और गलत का निर्णय लेते है... मगर हमारा निर्णय सही ही हो,जरूरी नही..



कभी-कभी हम जो देखते है...हो सकता है, वो सत्य का सिर्फ एक ही पहलू हो..।।

चलिए एक वाकया सुनाता हूँ...

आज सुबह में जेटी(नाव) पे चढ़ा ही था तो एक व्यक्ति को देखा जो अपने मे मस्त था और वो एक व्यक्ति को झिड़क रहा था चल साइड में खड़ा हो..जिसे वो झिड़क रहा था वो शारीरिक दृष्टिकोण से उतना मजबूत नही था..

ये दृश्य देख, अंदर से मुझे गुस्सा आया.. मुझे लगा शायद पिये हुआ है..।।

जेटी किनारे लगा और में इस वाकया को भूल गया..

आते वक़्त देखता हूँ कि किसीने सड़क पर एक छोटा सा बैरियर लगा कर अकेले ही पत्थरो से,सड़क का गड्ढा भर रहा है जो बारिश के कारण कुछ सप्ताहों से था..।।

जब मेरी नजर उस व्यक्ति पे पड़ता है,तो मेरी सोच बदल जाती है,क्योंकि वो व्यक्ति वही था जिसे मैंने सुबह में एक व्यक्ति से बदतमीजी करते हुए देखा था..।।

उसने मुझे सोचने पे विवश किया....

मैं किसी को पूर्णतया जाने हुए किसी के बारे मैं कैसे अपनी विचारधारा बना सकता हूं...??हो सकता था वो जिस से बदतमीजी कर रहा हो,वो उसका मित्र रहा हो..क्योंकि वो किसी और के साथ तो इस तरह की हरकत नही की..।।

हरेक इंसान का दो पहलू होता है,हम जिस इंसान से,जिस पहलू से भिज्ञ होते है,हम उसी अनुसार उसे देखते है, की वो अच्छा है या बुरा है...।।

-अगर आप एक पहलू ही देखकर निर्णय लेते है ,तो सबसे बुरे इंसान तो आप ही है..।। तो फिर निर्णय कैसे ले..??

-पहले इंसान के दोनों पहलुओं को देखे किसका पलड़ा भारी है किसका हल्का है..उसके अनुसार निर्णय करें..।।

-मगर ये भी कोई जरूरी नही है कि, जिसे आप जैसे देख रहे है वो वैसा ही रहे..परिस्थितियों के अनुसार वो बदल सकता है..।।

आप अपने समाज में देखते होंगे बचपन/युवावस्था मे कोई व्यक्ति बहुत बुरा/अच्छा था, अब बिल्कुल ही बदल गया..क्योंकि इंसान को अच्छे और बुरे बनने के लिए कुछ हद तक परिस्थितियां भी जिम्मेदार होती है..।।

इसिलिय हम कौन होते है सही और बुरे का निर्णय लेने वाले...बिना परिस्थितियों को जाने हुए??

हमें बस इतना अधिकार है कि हम अपनी कमियों को जाने और उसे दूर करें..

कबीरदास कहते है-

"बुरा जो देखन में चला बुरा न मिलिया कोई,

 जब दिल झांका आपना मुझसे बुरा न कोई"..।।


शनिवार, 19 अगस्त 2023

शब्दों का प्रभाव...

शब्दों का महत्व हमारे जीवन मे महत्वपूर्ण स्थान रखता है,कुछ शब्द आपको सम्मानित कर सकते है,तो कुछ शब्दों का चयन आपको अपमानित कर सकता है..।।



शब्दों का प्रभाव हमारे जिंदगी पर इतना है कि आपके शब्दों का सही चयन आपके रिश्ते को प्रगाढ़ या फिर कमजोर कर सकता है...।।

इस विषय में सोचिए...।।

इसके ढेर सारे उदाहरण आपके आसपास में मिल जाएंगे..

आप प्रधानमंत्री मोदीजी को ही लीजिए..उनके लोकप्रियता का सबसे बड़े कारणों में उनके शब्दों का चयन का भी है..जब वो कहते है मेरे प्यारे भाई-बहनों.. तो इसका एक अलग ही प्रभाव पड़ता है,भले ही आप उनके नीतियों से सहमत नही है,मगर दुबे जुवां आप भी उनके प्रशंसा करेंगे...।।

इसी तरह महेंद्र सिंह धोनी को लीजिए हाल ही में हुए IPL मैच में उनके बैटिंग करते उतरते ही JIO की विएवरशिप अचानक दोगुनी हो जाती थी..आखिर क्यों..??

क्योंकि उनके शब्दों में नम्रता है,वो हरेक परिस्थितियों में शांत और सौम्य रहना जानते है..।।

इसी तरह आप APJ abdul kalam को लीजिए..अगर आप इंग्लिश नही भी जानते है तो भी आप उनके भाषणों को सुनिए आपको समझ मे आएगी,क्योंकि वो अपने शब्दों के साथ अपने भावनाओं को प्रकट कर रहे होते थे..इसीलिए वो बहुत लोकप्रिय हुए और उन्हें जनता का राष्ट्रपति कहा गया..।।

कितने उदाहरण है...आपको हरेक क्षेत्र में इस तरह का व्यक्तित्व मिल जाएगा..।।

इसीलिए आप अपने शब्दों के चयन पे काम कीजिये..क्योंकि आपके एक गलत शब्द आपके जिंदगी को गर्त में डाल सकता है,और एक सही शब्द का चयन सही वक्त पे आपको आसमां के उचाईयों पे पहुंचा सकता है...।

इसकी शुरुआत आप मौन रहने से कर सकते है..।