सोमवार, 18 सितंबर 2023
तिलक और गणपति उत्सव
रविवार, 17 सितंबर 2023
तुम जिंदा हो
तुम जिंदा हो,
तुम्हारा शौभाग्य है,
यंहा हर रोज लोग मर रहे है,
कोई अपनी मौत,तो कोई बेमौत मर रहे है..।।
तुम जिंदा हो,तुम्हारा शौभाग्य है..
क्यों आये,और क्या कर रहे हो..??
पूछो खुद से,झकझोरो खुद को..
कब आंख लग जाये,और लगा ही रह जाये..
न तुम जानते हो,और न कोई और जानता है..।।
कुछ कार्य गर बचे हुए है,
तो जल्द-से-जल्द निपटा लो..
कब मौत की घड़ी आ जायेगी,
ये कोई नही जानता..।
तुम जिंदा हो,
तुम्हारा शौभाग्य है,
यंहा हर रोज लोग मर रहे है..
कोई अपनी मौत तो कोई बेमौत मर रहे है..।।
रविवार, 3 सितंबर 2023
स्त्रियां समाज की धुरी है..
स्त्री का सम्मान करो,क्योंकि उसके सम्मान में ही आपका सम्मान है..
अगर वो चाहे तो आपको भगवान बना देगी..।
कैसे..??
जो आदर-भाव आप भगवान के प्रति रखते है,वही भाव रखना होगा..।
उसने राम और कृष्ण को ही नही बल्कि कइयों को वो उच्चतम स्थान दिलाया जो पूजनीय हो गए..।।
सुधा मूर्ति को शायद आप जानते होंगे..
नही जानते है तो आपका दुर्भाग्य है,
क्योंकि वर्तमान समय में वो महिलाओं के शीर्षतम स्थल पर है..
जो स्थान हमारे समाज ने सीता,राधा,मीरा,लक्ष्मीबाई को दिया..
वही स्थान आज सुधा मूर्ति का है..
मगर सुधा मूर्ति को मूर्त रूप देने में उनके पिता का अहम योगदान था,और नारायण मूर्ति को मूर्त रूप देने में सुधा मूर्ति का अहम योगदान था..।।
सुधा मूर्ति की पसंद नारायण मूर्ति थे,जब शादी होने वाला था तब नारायण मूर्ति बेरोजगार थे..
सुधा से जब उनके पिता ने पूछा कि लोग पूछेंगे की लड़का क्या करता है,तो हम क्या जबाब देंगे.. उन्होंने जबाब दिया कह दीजिएगा सुधा का पति है..।।
आज इंफोसिस को कौन नही जानता..??
अगर सुधा मूर्ति का विश्वाश नारायण मूर्ति पे नही होता तो आज इंफोसिस नही होता..।।
सच कहूं तो वर्तमान में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कौन होता..ये भी सोचने वाली बात होती...😊
मगर वर्तमान स्थिति बहुत दयनीय है...
क्यों..??
क्योंकि हमारा आर्थिक स्थिति दयनीय है..।।
जब कोख में बच्चा आता है तब से ही हम बेटे के लिए मंन्नते मांगने लगते है,क्यों..??
क्योंकि बेटी होगी तो शादी का खर्च बढ़ जाएगा..
अगर दुर्भाग्य से किसी गरीब और निम्न मध्यम आय वाले के यंहा बेटी ने जन्म ले लिया तो परिवार वाले सबसे पहले उसके शादी के लिए पैसा जमा करना शुरू कर देंगे..।।
मगर वो भूल जाते है,आज उनका अस्तित्व किसी के बेटियां के कारण ही है..
बेटियां अगर सुदृढ होगी तो हमारी आनेवाली पीढियां भी सुदृढ़ होगी..।।
अपनी बेटियों को सिर्फ पढ़ाये ही नही बल्कि गुनवक़्तापूर्ण शिक्षा दे,क्योंकि यही शिक्षा सिर्फ आपका ही नही, बल्कि देश और समाज को बदलने की मद्दा रखता है..।।
बेटियां सुदृढ होगी तब ही समाज सुदृढ होगा..
जब समाज सुदृढ होगा तब ही देश सुदृढ होगा..।
सिर्फ बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ से नही होगा..
क्यों बचाये,और क्यों पढ़ाये इसका भी जबाब देना होगा...
अनेक सरकार बेटियों के शादी के लिए अनेक योजना चलाती है..मगर उसके लिए गुनवक़्तापूर्ण शिक्षा/स्वास्थ्य/सुरक्षा के लिए प्रावधान नही करती..।।
जबकि इनके द्वारा वो अपने GDP को दुगुनी कर सकती है..।।
स्त्रियां समाज की धुरी है..
इसे सुदृढ़ करना जरूरी है..
अगर ये न सुदृढ हो,
तो समाज कैसे सुदृढ हो..।
क्योंकि सबसे पहले यही तो हाथों में पेन और पेंसिल थमाती है,
अगर पेन और पेंसिल की जगह छुरियां थमाए तो क्या हो..??
जरा सोचो..
कितना अपमान करोगे,
कब सम्मान करोगे..??
जब विनाश के मुहाने पे होगे..
तो यही हाथ थामकर विनाश से बचाएगी..।।
क्योंकि किसी ओर में वो अदम्य साहस नही..
जो साहस स्त्रियां में है..।।
स्त्रियां समाज की धुरी है,
उसे सुदृढ़ करना जरूरी है..।।
मैं कंहा ढूंढू तुम्हें..
मैं कंहा ढूंढू तुम्हें..
अब तुम्हीं बताओ..
FB पे ढूंढा, इंस्टा पे ढूंढा..कंहा-कंहा नही ढूंढा,
कंही नही मिली तुम..
जिंदगी यू-ही बद-से-बद्तर होती गई मेरी..
काश तुम्हें ढूंढने से अच्छा,
खुद को निखारा होता..
FB पे होता,इंस्टा पे होता..
गूगल पे लोग मुझे भी ढूंढ रहे होते..
शायद तुम भी मुझे ढूंढ रही होती..।।
न ही मैं उस काबिल हो सका,
न ही मैं अब तेरे काबिल हो सका..।।
जिंदगी के कुछ लम्हें अब भी बचे है,
काश उसे सवार लूं, तो जिंदगी यू ही सवर जाएगी..।।
जब जिंदगी सवर जाएगी..
तब तुम भी मुझे,और मैं भी तुझे किसी राह पे यू ही मिल जाएंगे..।।
मैं कंहा ढूंढू तुम्हें..??
गुरुवार, 31 अगस्त 2023
मेरी पहचान क्या है...
मेरी पहचान क्या है,वो ढूंढने चला हूँ,
मेरी राह क्या है,उसे ढूंढने चला हूं,
भला कोई बताए,क्या ढूंढने से वो मिला है..जो है ही नही..
न मेरी पहचान है,न ही मेरी राहें है..।।
तो फिर मैं करू क्या..??
जो है नही उसे बनाने का प्रयत्न करें..
चाहे पहचान हो,या फिर राहें हो..
कब तक यू ही दूसरों के पहचान से जाना जाऊ,
कब तक यू ही दूसरे के बनाये राहें पे चलता जाऊ..।।
क्या मेरी जमीर मर चुकी है.. या फिर हमने ही मार दिया है..
इसिलिय तो खामोश दुसरो के पहचान को ओढ़े हुए दूसरों के बनाये राहों पे चला जा रहा हूँ...
बहन..
माँ के बाद सारी दुनिया से अगर कोई लड़ सकती है, तो वो बहन ही है..
माँ के बाद खुद भूखे रहकर पहले मुझे खिला दे वो बहन ही है..
माँ के बाद बिना शर्त स्नेह उड़ेल दे वो बहन ही है..
माँ के बाद अगर कोई माँ का स्थान ले सके, तो वो बहन ही है..
अपना सबकुछ त्यागकर ,पराए घर चली जाए वो बहन ही है...उसके बाद भी स्नेह का न्यौछावर करें वो बहन ही है..।।
भावनाएं शब्दों पे हावी है..
सच कहूं तो मेरी बहना..
मैं तुमसब से उतना स्नेह नही करता.. जितना तुमसब करती हो..।
अगर करता तो मेरी भावनाएं इन शब्दों को उल्लिखित ही नही होने देती..
जितने शब्द लिखने छूट गए,मैं उतना ही तुमसब से स्नेह करता हूँ...।।
शनिवार, 26 अगस्त 2023
इक खालीपन सा है..
इक खालीपन सा है,
उसे भरना है...
कैसे..??
मालूम नही,मगर भरना है...।।
किस चीज से भरना है...मालूम नही..।
मगर उस चीज की तलाश है..
क्योंकि जिस-जिस से भरना चाहा.. उससे तो खालीपन बढ़ता ही गया..।।
खालीपन इतना है,जैसे शांत समुन्द्र..
मगर वास्तिवकता ये है कि ये उतना ही खाली है,
जितना रेगिस्तान में मृग-मारीचिका के कारण पानी की धार..।।
इक खालीपन सा है...जो वास्तविकता में है ही नही..वो भरा हुआ है,जिसे हम खालीपन समझ बैठे है..।।
इक खालीपन सा नही,इक भरापन सा है..
जिसे खाली करना है..
और फिर खालीपन का अहसास करना है...।
एक खालीपन सा है..।
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क्या सोच रहे हो तुम..?? यही सोच रहा हूँ कि.. क्या सोच रहा हूँ मैं..। सच कहूं तो.. कुछ तो सोच रहा हूँ मैं... मगर अफसोस क्या सोच रहा हूँ.. यह...
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अतीत से लेकर वर्तमान तक,हम सभी दुःखो से घिरे हुए है.. आखिर क्यों..?? इस क्यों का जबाब हम अतीत से ही ढूंढते आ रहे है..हमारे ऋषियों-मनीषियों न...
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हम सब खास(special) दिखना चाहते है.. मगर सवाल है क्यों..?? इसका सबसे बड़ा कारण है कि हम स्वयं को खास समझते ही नही..। जब हम स्वयं को खास समझने ...


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