रविवार, 12 जनवरी 2025

स्वामी विवेकानंद: संघर्ष से विवेकानंद की यात्रा..

अगर मैं पुछु..50,100,1000 साल पहले के लोग के नाम बताए..
तो आप किन-किन लोगों के नाम बता पाएंगे..।।



अच्छा जिन लोगों के नाम आपके जेहन में आ रहे है...
आखिर उनका ही नाम क्यों आ रहा है..??

"जिसका संघर्ष जितना बड़ा होता है,
 वो उतने ही लंबे समय तक याद किये जाते है ।"

आपके जेहन मैं जिनका-जिनका नाम आया है उन सबों ने संघर्ष करके ही अपनी छाप छोड़ी है..।
हम जब उस स्तर के संघर्ष नही कर पाते,तो उनके संघर्ष को कम दिखाने के लिए उन्हें देवत्व स्वरूप मानने लगते है, उनके महानता के अनेक मनगढंत कहानियां रचने लगते है..।।

आज उस संघर्षरत संन्यासी का जन्मदिन है,वो हट्टा-कट्टा इंसान थे,जो कम-से-कम 80 साल तो अवश्य जीते,मगर उनकी मृत्यु 39 साल की उम्र में हो गई।
और हमने क्या किया जब तक जिंदा रहे तबतक तो उनकी मदद नही की और हमने उनके मरने के बाद उन्हें महान बना दिया..।।
आज उसी संन्यासी का जन्मदिन है जिनके नाम पर हम
"युवा दिवस"मनाते है,उनका नाम "स्वामी विवेकानंद" था।।

स्वामी विवेकानंद से क्या सीखे...??
उनसे नही उनके संघर्ष से हमें सीखनी चाहिए,जो हमें बताया नही जाता..।।
आखिर वो शिकागो कैसे गए..??
वो वंहा समय से पहले पहुंच गए थे वो समय उन्होंने कैसे गुजारा..।।
जब वो उपनिषद के विचारों को पश्चिम में फैला रहे थे,तो भारतीय ही उनके कार्यो में रोड़ा डाल रहे थे,यंहा तक कि उन्हें दुराचारी और ठगी कह कर बदनाम किया जा रहा था..।।
 "बिहारीदास देसाई"को 20 जून 1894 में लिखित पत्रों में उन्होंने अनेक बातों का जिक्र किया है,जो ज़्यादती भारतीय ही उनके साथ कर रहे थे..
यंहा तक कि भारत के अखबारों में उनके चरित्र पर प्रश्न उठाये गए..तो इनके बारे में जब उन्हें गुरुभाई ने बताया तो उन्होंने आक्रोशित होकर कहा -"ये गुलाम मानसिकता के लोग मेरे बारे में क्या कहेंगे,जब हमें गुलामी की मानसिकता जकड़ लेती है तो हमारे अंदर ईष्या पैदा हो ही जाती है"।

उन्होंने अपने पत्रों में लिखा कि भारतीय लोग मेरे कार्यों के लिए  1 पैसे तक कि मदद नही कर रहें है,और जो पश्चिम में करना चाहते है,उन्हें भी करने से रोक रहे है..।।

अपने मिशन को साकार करने के लिए जितने संसाधन की जरूरत थी,वो उनके जीवनकाल में कभी उपलब्ध नही हुए ।
वे सालों-साल प्रतिदिन भाषण देते, पदयात्रा करते,विदेश जाते और जनसाधारण तक वेदांत और सनातन धर्म की शिक्षा देते..।

स्वामीजी ने बहन निवेदिता के लिखे पत्रों में कहा कि,आजकल मेरी तबियत ठीक नही रहती,शायद देर रात तक रोज भाषण देने के कारण,और एक-एक पाइ का हिसाब रखने के कारण..।

जबतक स्वामी विवेकानंद जिंदा रहे तबतक उन्हें वो सम्मान हमनें नही दिया..यंहा तक कि उन्होंने अपने माँ के घर के लिए अग्रिम पैसा बेचने वालों को दिया था,वो पैसा भी इसने ये सोच के घपला कर लिया कि ये संन्यासी है,तो कोर्ट नही जाएगा...।।
हमने सिर्फ उन्हें यातना ही दिया है..

उन्होंने अंतिम समय मे "रामकृष्ण मिशन" की स्थापना की..
विवेकानंद लिखते है कि इस मिशन के बारे में इतना दुष्प्रचार किया जा रहा था कि हम गुरुभाइयों के लिए चावल तो बन जाता था,मगर नमक के अभाव में सिर्फ चावल ही खाना पड़ता था..।।मगर वो शुकुन के क्षण थे..क्योंकि मैंने अपना कार्य कर चुका था..।।

बंगाल के लेखक "मणिशंकर मुखर्जी"लिखते है कि स्वामी विवेकानंद को अभास था कि अगर हम अपने स्वास्थ्य की परवाह किया तो मैं अपने कार्यो को नही कर पाऊंगा..
जब उनकी मृत्यु हुई तो उनके अनेक पत्र-आलेखों से पता चलता है कि उन्हें 31 प्रकार की बीमारी थी..।।
और ये बीमारी उनके निरंतर अपने लक्ष्य प्राप्ति की और अग्रसर होने के कारण हुआ..।।
आज वो हमारे बीच नही है, मगर उनके द्वारा किया गया संघर्ष आज भी पूरे विश्व को, रामकृष्ण मिशन के रूप में सिंचित कर रहा है..
आज विश्व के लगभग हरेक देश मे रामकृष्ण मिशन की शाखा है,और इनका धेय्य "मानव सेवा ही भगवान की सेवा के रूप मे है"।।

स्वमी विवेकानंद से हम बहुत कुछ सीख सकते है-
मगर वर्तमान में सबसे ज्यादा अगर उनसे सीख सकते है तो उनसे यही सीख सकते है कि- 
"संघर्ष चाहे कितना भी बड़ा क्यों ना हो,
परिस्थितियां भले ही कितना भी, विपरीत क्यों न हो,
अपने लक्ष्य से कभी नही हटना है,
चाहे इसके लिए सरस्व क्यों ना दांव पे लगाना पड़े"

मगर आज के युवा क्या कर रहे है...
थोड़ी सी ही परेशानियां में हताश और निराश ही नही बल्कि मौत को गले लगा लेते है..
जो बिल्कुल गलत है..।।

स्वामी जी को भविष्य की पीढ़ियों से बहुत आस थी..
मगर आज की पीढ़ी को अगर वो कंही से देख रहे होंगे तो बहुत निराश होंगे..
क्योंकि स्वामी जी अपने गुरु भाई से कहा करते थे कि हमें मध्यम वर्ग के युवाओं से सबसे ज्यादा उम्मीद है..क्योंकि ये ही क्रांति के वाहक है,ये ही बदलाव के वाहक है..
मगर आज के मध्यम वर्ग के कुछ युवा तो नेटफ्लिक्स,ऐमज़ॉन प्राइम वीडियो,इत्यादि पे विन्ज़ो वाच करके रात गुजारते है,जिन युवाओं को मैदान में होना चाहिए और शरीर को हष्ट-पुष्ट बनाना चाहिए वो युवा आज स्मार्टफोन पे अपने शरीर को नष्ट कर रहे है..।।
स्वामी विवेकानंद को जिन लोगो से डर था,उनका डर सही था क्योंकि आज भी भारत मे कुछ चंद लोगी का ही वर्चस्व है,जो आज भी बदलाव को पाँव से कुचल रहे है,और अपने अनुसार देश की दशा और दिशा तय कर रहे है..।।

मगर कभी-न-कभी तो विवेकानंद का स्वप्न जरूर पूरा होगा-
         "उठो,जागो और अपने लक्ष्य की प्राप्ति करो।"

https://mnkjha.blogspot.com/2023/01/blog-post_12.html

शुक्रवार, 10 जनवरी 2025

अच्छे और बुरे इंसान कौन होते है..??

सबसे बुरे इंसान कौन होते है..??

वैसे कोई बुरा नही होता,हरेक इंसान में अच्छाइयां होती ही है..

वैसे कबीर दास जी कहते है-

"बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोई,जो दिल खोजा आपना मुझसे बुरा न कोई।"

मगर ऐसे इंसान से हमेशा दूरियां बनाके रखें,

जो दूसरों की निंदा पीठ-पीछे करता है,

जो दूसरों का मजाक पीठ-पीछे उड़ाता है,

ऐसे इंसान में चाहे कितनी भी अच्छाईयां क्यों न हो..

उनसे दूरियां बनाके रखें..

ऐसे इंसान किसी के नहीं होते..

और इनसे बुरा कोई नही होता..क्योंकि ये आपके साथ तबतक ही होते है,जबतक इनका स्वार्थ आपसे सधता है।।


सबसे अच्छे इंसान कौन होते है ...😊??

जो किसी भी परिस्थितियों में, दुश्मन तक कि निंदा नही,बल्कि प्रसंशा करते है,वो सबसे अच्छे इंसान है..🙂

ये अगर आपकी निंदा आपके सामने करते है,तो आप अपनी खुशनसीबी समझें..।

कबीरदास जी कहते है-

"निंदक नियरे राखिये,आंगन कुटी छवाय,बिन पानी,साबुन बिना,निर्मल करे सुभाय।"

क्योंकि आजकल जो आपके हितैषी है,(माँ-बाप,भाई-बहन,शिक्षक,मित्र इत्यादि) वो भी आपकी निंदा आपके सामने करने से बचते है,क्योंकी आजकल हमें इनकी बात भी बुरी लगने लगी है...।।

पहले ऐसा नही था..मगर अब ये चलन बढ़ता जा रहा है..।

क्योंकि हमारी शिक्षा आधुनिक जो होती जा रही है..

ये हमें पैसा कमाना तो सिखा रहा है,

मगर परिस्थितियों से सामना करना नही है।।





बुधवार, 8 जनवरी 2025

महिलाएं सबसे ज्यादा असुरक्षित कंहा है..

एक बात पूछता हूँ...
महिलाएं या लड़कियां सबसे ज्यादा सुरक्षित कंहा है..??


शायद आप जो जबाब सोच रहे है... वो गलत हो....


हाल ही में UN(यूनाइटेड नेशंस) द्वारा जारी घरेलू हिंसा रिपोर्ट में बताया गया है कि-
" महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित स्थान घर है ।"
जबकि सुरक्षित स्थान घर के बाहर सार्वजनिक स्थान और कार्यस्थल है..।

2023 में 85 हज़ार महिलाओं एवं बालिकाओं की हत्या जानबूझकर किया गया, (ये आंकड़े ज्यादा भी हो सकते है)
इसमें 60% हत्याएं किसी साथी या परिवार के द्वारा किया गया..प्रतिदिन 140 महिलाओं एवं बालिकाओं की हत्या उनके अंतरंग साथी या परिवार के सदस्य द्वारा कर दी जाती है..।।
(यानी जबतक आप इसे पढ़ के खत्म करेंगे तबतक किसी पारिवारिक सदस्य के द्वारा ही किसी महिला की हत्या कर दिया गया होगा)

आपको जानकर हैरानी होगी कि,इस तरह की हत्या सर्वाधिक अफ्रीका में किया जा रहा है..
वंही घरेलू हिंसा सर्वाधिक अमेरिका में किया जा रहा है,UN के अनुसार 1 लाख महिलाओं पर 1.6 महिलाओं पे किया जाता है..।।
•वंही यूरोप(1लाख/0.6) और एशिया(1लाख/0.8) में ये दर कम है..।

हो सकता है वास्तविकता इससे और भयावह हो..क्योंकि कुछ मामलों को दबा दिया जाता है..

•वंही UN रिपोर्ट के अनुसार पुरषों की अधिकांश हत्या घर के बाहर होता है,80% वंही महिला की 20% होती है..।।

महिलाओं के लिए घर सुरक्षित नही है, वंही पुरुष घर के बाहर सुरक्षित नही है..।।

जरा सोचियेगा..
आखिर क्यों महिलाओं के लिए घर सुरक्षित नही है...
क्या आप उनमें से तो नहीं,जिसके कारण कोई महिला या बालिकाएं या फिर गर्भ में पल रही बची असुरक्षित महसूस कर रही है..।।

आखिर क्यों कोई ऐसा करता है...??
"की महिला घर में ही असुरक्षित महसूस करती है"....

मंगलवार, 7 जनवरी 2025

हम मनुष्यों ने कई कीर्तिमान रचें..

इस अथाह समुन्द्र की कोई थाह नही है..(अब है)
इस खुले आसमां का कोई किनारा नही है..
इसी तरह मनुष्य की जिजीविषा का कोई अंत नही है..।
मनुष्य आज कंहा नही है..
अगर जंहा नही है..
वंहा का इसे पता नही है..
अन्यथा ये हर जगह है,
जंहा नही है,
वंहा जाने का प्रयत्न कर रहा है..।।



हम मनुष्यों ने कई कीर्तिमान रचें..
हमने अपने स्वार्थ के लिए,
अपनों का भी बलिदान दिया..
हम यू ही आज सभ्य नही कहलाते..
हमने कई सभ्यताओं का नाश कर,
आज सभ्य हुए है..
हम मनुष्यों ने कई कीर्तिमान रचे है..।

जितनी परतें खोलते जाऊंगा..
हमारी असभ्यता का परत-दर-परत खुलता जाएगा..
हम मनुष्यों ने कई कीर्तिमान रचें है..
हमारे कारण आज प्रकृति के कई जीव-जंतु और पेड़-पौधे
विलुप्त हो गए..
कितने आज विलुप्ति के कगार पे है..
आज हम मनुष्यों के कारण ऐसा कोई जगह नही जो सुरक्षित है..
हम मनुष्यों ने कई कीर्तिमान रचें है..
विकास के नाम पर हम खुद को नाश करने के कगार पे ले जा रहे है..।।
शायद ही पृथ्वी का कोई कोना हो,जो आज शांत हो..
हम मनुष्यों ने अपनी आहटों से सबकी शांति भंग कर दी है..।


हम मनुष्यों ने कई कीर्तिमान रचें..
हमने अपने स्वार्थ के लिए,
अपनों का भी बलिदान दिया..
हम यू ही आज सभ्य नही कहलाते..
हमने कई सभ्यताओं का नाश कर,
आज सभ्य हुए है..
हम मनुष्यों ने कई कीर्तिमान रचे है..।।

सोमवार, 6 जनवरी 2025

एलिफेंटा की यात्रा

"यात्रा हमेशा आपके जीवन में बदलाव लाता है..
अगर यात्रा आपके जीवन में बदलाव नही लाता तो वो यात्रा व्यर्थ है..।।"

मैं सोचता हूँ, आज हम कितना विकसित हो गए है..
मगर जब एलिफेंटा जैसी गुफाओं में खुदी आकृति,कलाकृति को देखता हूँ ,तो आश्चर्यचकित होता हूँ..
आज हमारे अंदर धैर्य की बिल्कुल ही कमी है..
मगर इन कलाकृतियों,आकृतियों को तराशने में कितना धैर्य रखना पड़ा होगा ये हम सोच के ही घबराते है..।।

वो क्या कलाकार रहें होगा..
वो कैसा हथौड़ी-छैनी रहा होगा..
जिसने पहाड़ में छुपी शिव की प्रतिमा को सबके सामने ला दिया..
जो आज भी जीवंत दिखलाय दे रहा है..
जिसे देखकर आप भाव-विभोर हो जाओगे..
आप उस तेजोमयी आभा से सरोबोर हो जाओगो..।





https://en.m.wikipedia.org/wiki/Elephanta_Caves


मंगलवार, 31 दिसंबर 2024

नव वर्ष मंगलमय हो..😊

कल भी आज की तरह ही सूरज उगेगा..
चिड़िया आज की तरह ही चहचहाएँगी,
नदिया आज की तरह ही बहेंगी..
प्रकृति में कुछ बदलाव नही होगा..
बदलेगा तो सिर्फ हमारा कैलेंडर और हमारा उत्साह..।।

मगर हम इस उत्साह को कब तक बरकरार रख सकते है..??

मगर क्या हम खुद को कैलेंडर की तरह बदल पाएंगे..??

थोड़ी देर रुकिए..और सोचिए..
2024 शुरू होने से पहले आपने खुद के अंदर परिवर्तन लाने के बारे में क्या सोचा था..और उसपे आपने कितना अमल किया..और आज आप कंहा है..।।

छोड़िए ये सब..
2025 का प्लान बनाइये..
इस वर्ष आप क्या पाना चाहते है,और क्या छोड़ना चाहते है..
इसे लिखिए और प्लानिंग बनाइये..
क्योंकि बिना रोडमैप के आप कंही नही पहुंच पाएंगे..
आप चलना शुरू तो करेंगे..
मगर ज्यादा दूर तक नही चल पायेंगे.. अगर चलेंगे भी तो भटक जाएंगे..
इसलिये थोड़ा रुकिए और 2025 में क्या पाना चाहते है और क्या छोड़ना चाहते है,उसके बारे में रोडमैप तैयार कीजिये..।।

और इस नव वर्ष को नए जीवन के रूप में परिवर्तित कीजिये..
नव वर्ष मंगलमय हो



मैंने मुस्कुराना सीख लिया है..😊

मैंने मुस्कुराना सीख लिया है..
जब भी खुद को आयने में देखता हूँ तो मुस्कुराता हूं,
जब भी पंछियो को पंख फैला कर उड़ते देखता हूँ तो मुस्कुराता हूँ..
जब भी सूर्य की लालिमा को देखता हूँ तो मुस्कुराता हूँ..
जब भी प्रकृति की लीला देखता हूँ तो मुस्कुराता हूँ
मैंने मुस्कुराना सीख लिया है..।।



अब मैं दुःखी नही होता..
क्योंकि दुःख तो जीवन का हिस्सा है..
इसे आने से कोई नही रोक सकता..
मगर ये मेरे ऊपर कितने समय तक हावी रहे,
इसका निर्णय मेरे हाथ मैं है..
इसीलिए मैं अब इसे ज्यादा देर तक अपने ऊपर हावी नही होने देता..
मैंने मुस्कुराना सीख लिया है..।।

हमारी  मुस्कान सबसे बड़ा गहना है,
जो प्रकृति से उपहार मैं मिला है..
हम जब भी मुस्कुराते है..
प्रकृति भी मुस्कुराती है..।।

Yoga for digestive system