आप क्यों मिनटों,घंटों सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करते हो..??
शायद नही सोचा होगा..
क्योंकि सोशल मीडिया हमसे सोचने और समझने की शक्ति छीनते जा रहे है..।
• रॉयल मेलबर्न इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी का एक शोध बताता है कि लगातार सोशल मीडिया के इस्तेमाल से हमारा क्रिटिकल थिंकिंग और डेप्थ प्रोसेसिंग की क्षमता घटती जा रही है..
•यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास का "स्मार्टफोन एंड वर्क मेमोरी" शोध बताता है कि केवल पास में रखा फोन(चाहे वो स्विच ऑफ हो) हमारे मानसिक क्षमता को कमजोर कर रहा है..
•हावर्ड यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट "डोपामाइन एंड अटेंशन स्पैन" बताता है कि..सोशल मीडिया के नोटिफिकेशन, 'लाइक' और शॉर्ट्स दिमाग में डोपामाइन (Reward Chemical) रिलीज करते है.. जिससे दिमाग को तुरंत खुशी मिलने की आदत हो जाती है..जिसके कारण जिस काम में तुरंत नतीजा नहीं मिलता (जैसे पढ़ाई करना या कोई गहरी समस्या सुलझाना), उसमें दिमाग जल्दी बोर हो जाता है और ध्यान भटक जाता है..।
मेरा फिर से वही सवाल है..की, हम क्यों घंटों सोशल मीडिया पर समय बिताते हैं..??
इसका एक ही जबाब है..
हम उद्देश्यपूर्ण जिंदगी नही जी रहे है..अगर हमारे पास कोई उद्देश्य होता तो हम अपना समय सोशल मीडिया पर नही जाया करते..।
जरा गौर कीजिए..आप जितने भी लोकप्रिय चेहरे या नाम जानते है..उनके बारे में पता कीजिये..
वो कितना समय सोशल मीडिया पे बिताते हैं..?
आपको जबाब मिल जाएगा..।
(आप उन्हें छोड़ दे जिन्होंने सोशल मीडिया को ही अपना उद्देश्य बना लिया है..)
इसिलिय जिंदगी में कोई उद्देश्य बनाये और उसे पूर्ति करने में समय गवांये न कि सोशल मीडिया पे..
सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना गलत नही है..आज ये आम आदमी का अपना नजरिया,अपना भाव व्यक्त करने का साधन है..।
मगर सतर्क रहने की जरूरत है..
सोशल मीडिया को आप अपना साधन बनाये..ऐसा न हो कि सोशल मीडिया आपको अपना साधन बना ले..जोकि बना चुका है..हम वही देखते है,जो हमें दिखाया जाता है..हम वही सुनते है जो हमें सुनाया जा रहा है..।
आपको याद है,आप लास्ट टाइम कब सर्च करके कुछ देखा या सुना था..??😊

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