रविवार, 2 नवंबर 2025
उदास मत हो..
जब उदास हो तो उदास मत हो..
क्योंकि क्या मिलेगा उदास होकर..।
अगर किसी की सहानुभूति मिल भी गई तो उससे क्या होगा..।
ये सहानुभूति भी क्षणभंगुर होगी..
इसलिए जब उदास हो..तो उदास मत हो..।
तुम्हारे उदासी भरे चेहरे से शायद ही कोई करीब आएगा..
अक्सरहाँ लोग सिर्फ दूरियां और बातें बनाएंगे..
और जो तुम्हारा कद है उसे गिराएंगे..
इसीलिए जब उदास हो..तो उदास मत हो..।
इन उदासी भरे चेहरे से नूर नही सिर्फ नून ही टपकेगा..😊
और तुम्हारे आसपास ही नही, बल्कि तुम्हारे जिंदगी को भी तुम्हारी उदासी
नमकीन बना जाएगा..
इसीलिए जब उदास हो..तो उदास मत हो..।
शनिवार, 1 नवंबर 2025
गंगा में नहाने से क्या होता है..
"मल मल धोये शरीर को,धोये न मन के मैल,
नहाए गंगा गोमती,रहे बैल के बैल ।" (कबीर दास)
गंगा नाम लेते ही रोंगटे खड़े हो जाते है..शायद आपके भी होते होंगे,अगर नही होते है,तो आप गंगा की विशालता और महत्वता से अनभिज्ञ है..।
इसकी विशालता और महत्वता के कारण ही हम भारतीय गंगा नदी को, गंगा माँ कहते है।
गंगा कंहा से शुरू होती है,कंहा खत्म होती है,ये हम सब को पता है,मगर कैसे शुरू होती है और कैसे खत्म होती है,इससे बहुत लोग अनभिज्ञ है..।।
क्या आपने सोचा है..अगर गंगा ना होती तो क्या होता..??
भारत के जितने भी प्राचीन और आधुनिक शहर है,सबके सब गंगा के किनारे या फिर उसके सहायक नदी के किनारे बसे हुए है..।गंगा भारत की भौगोलिक, सामाजिक,सांस्कृतिक और आर्थिक रूप रेखा तय करती है..।
गंगा सिर्फ नदी नही,बल्कि भारत की जीवन रेखा है..मगर आज ये जीवनदायिनी नदी खुद कराह रही है..और इसकी आवाज किसी को सुनाई नही दे रही है..अगर किसी को सुनाई दे भी रही है,तो वो चाह कर भी कुछ नही कर पा रहा है..इसके लिए हमसबको एकसाथ प्रयास करना पड़ेगा..।
मगर करेगा कौन..??
क्योंकि सब व्यस्त है अपने आप में.. सब व्यस्त है अपने आप को संवारने में..किस को सुध है उसका,जो भारत को, विष पी कर संवार रहा है..।।
भारत के फैक्टरियों के गंदगियों को अपने मे समाहित कब तक गंगा करती रहेगी..अब ये गंदगियां सिर्फ गंगा में ही नही बल्कि हमारी थाली तक पहुंच चुकी है..😢
आज हमारी औसत आयु भले ही बढ़ती हुई दिखाई दे रहा हो,मगर आप खुद से पूछिए क्या आप अपने बाप-दादा से ज्यादा स्वस्थ है..??
जबाब आएगा नही..सिर्फ शारीरिक रूप से ही नही हम मानसिक रूप से भी पहले से ज्यादा कमजोर हो चुके है..।
भले ही आज हमारे पास IIT,IIM,M.B.B.S etc. जैसे संस्थान है,मगर ये संस्थान मिलकर भी भारत की भौगोलिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संरचना को संवार नही सकता..।
मगर आज भी गंगा हमारे द्वारा फैलाये हुए गंदगियों का विषपान करके भी, भारत की भौगोलिक,सामाजिक,सांस्कृतिक और आर्थिक संरचना को संवार रही है..।
मगर हम गंगा के लिए क्या कर रहे है...??
इसी साल ही गंगा के किनारे महाकुंभ लगा...मीडिया वालों ने चिल्ला-चिल्ला के कहा यंहा इतना करोड़ नहाने के लिए आये,इतने करोड़ की आर्थिक गतिविधियां हुई..
मगर मैं पूछना चाहता हूं,जिसके कारण ये सब हुआ,उसके लिए हम सबने क्या किया..??
सिर्फ गंगा को अपनी गंदगियां भेंट की..
और गंगा चुपचाप उसे स्वीकार कर लिया..।।
आखिर क्यों..??
क्योंकि माँ, होती ही है ऐसी..
कुछ नही बोलती,चुपचाप सहन करती रहती..
मगर जब वो विकराल रूप धारण करती है,
तो उसके सामने कोई नही टिकता..या फिर वो स्वयं नही टिकती..
माँ होती ही है ऐसी..।।
आखिर गंगा में नहाने से होता क्या है..??
सच कहूं तो कुछ नही होता..
हमारे ऋषियों ने नहाने का प्रावधान इसलिए किया..कि हम गंगा के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट कर सके..मगर हमने क्या किया..गंगा को और मैला कर दिया..।
ऐसा नही है कि गंगा में नहाने से कुछ नही होता है..।
हम जब ऑनलाइन आर्डर करते है,तो हमें वही चीज मिलती है,जो हमने आर्डर किया होता है..।
उसी तरह हम जिस भाव से गंगा के तट पर जाते है और डुबकियां लगाते है,हमें उसी भाव का अहसास होता है..।
हम जब सिर्फ फ्लिपकार्ट और अमेज़ॉन पर स्क्रॉल करते रहते है तो क्या होता है..हमें कोई सामान नही मिलता है,जबतक की आर्डर न करें..।
उसी तरह, गंगा में सिर्फ डुबकियां लगाने से कुछ नही होता..
बल्कि आप किस भाव से डुबकियां लगा रहे है,ये मायने रखता है..।।
अगली बार जब गंगा में डुबकियां लगाए, तो कुछ सोच के डुबकियां लगाए, यू ही नही लगाए..
क्योंकि माँ सब जानती है..।।
जय गंगा मैया..।।
क्रमशः...
शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2025
लोग कंहा से कंहा चले गए..
लोग कंहा से कंहा चले गए..
मैं वही का वंही रह गया..।
जो मुझसे आगे थे वो तो आगे है ही,
जो मुझसे पीछे थे,वो भी मुझसे आगे निकल गए..
मैं वंही का वंही रह गया..।
जिंदगी से अबतक क्या हासिल की मैंने...??
कहू तो कुछ भी नही..जो था वो भी बर्बाद ही कि मैंने..
मैं वंही का वंही रह गया..।
मेरे चाहने वाले बस इतने है,जिसे मैं अंगुलियों पे गिन सकता हूँ..
मगर समय-दर-समय उनकी भी तादाद कम होती जा रही है..
कम हो भी क्यों ना..??
क्योंकि असफलता और सफलता दोनों बोझ होती है..
सफलता का बोझ सब बांटना चाहते है,
क्योंकि सफलता से कंही-न-कंही सब का हित जुड़ा होता है,
जिस कारण इस बोझ को सब बांट लेते है..।
वंही हमारी असफलता से,
कंही-न-कंही हमारे चाहने वालों को भी,
शर्मिंदा होना पड़ता है...
इसीलिए वो हमारे असफलता के भागीदार नही बनते..
इसीलिए असफलता का बोझ भारी होता है..।।
लोग कंहा से कंहा चले गए..
मैं वही का वंही रह गया..।
जो मुझसे आगे थे वो तो आगे है ही,
जो मुझसे पीछे थे,वो भी मुझसे आगे निकल गए..
और मैं वंही का वंही रह गया..।
गुरुवार, 30 अक्टूबर 2025
मृत्यु..
मृत्यु यू ही नही स्पर्श करती है..जबतक की जीने की जिजीविषा खत्म न हो जाये..
जब जीने की जिजीविषा खत्म हो जाये,तब लाख प्रयत्न कर ले कोई,तब कोई जी नही सकता..।
अगर जीना है,तो जीने की जिजीविषा बनाये रखना होगा।
आखिर ऐसा क्या होता है,जब जीने की जिजीविषा खत्म हो जाता है..??
शायद मोह माया का अंत हो जाता है,अपनों से स्नेह का डोर टूट जाता है..शायद इसीलिए मृत्यु शरीर को स्पर्श कर पाती है..अन्यथा मृत्यु यू ही स्पर्श नही करती क्योंकि मृत्यु हरेक बंधनों को तोड़कर एक नई दुनिया मे ले जाती है,जंहा कोई बंधन नही है..।
मृत्यु एक नई दुनिया का दरवाजा खोलता है,जंहा किसी तरह का बंधन नही है,वंहा असीम ऊर्जा से संचालित ऊर्जावान शरीर है,जो मृत्यु लोक में जब चाहे तब झांक सकता है..।।
मृत्यु अंत नही बल्कि एक नई शुरुआत है..
मंगलवार, 28 अक्टूबर 2025
परेशानियां
हम सब परेशानियों से घिरे हुए है,शायद ही कोई होगा जिसके जीवन में परेशानी न हो..।
मगर हम में से कई लोग ऐसे होते है,जिसके जिंदगी में हमारे आप से ज्यादा परेशानियां होता है,मगर हमें पता नही चलता..।
आखिर क्यों..??
क्योंकि हममें से कई लोग परेशानियों से निपटना जानते है,और परेशानी को समझते है,इसीलिए किसी को महसूस नही होता की वो परेशानियों से घिरे हुए है..।।
मगर हममें से कई लोग ऐसे होते है जो परेशानियों से निपटना नही जानते,और ना ही परेशानियों को समझने की कोशिस करते है, इसलिए ताउम्र परेशानियों से घिरे होते है..।।
कभी घर से बाहर निकलिये और अपने चारों तरफ देखने की कोशिस कीजिये, तब अहसास होगा कि हमसे भी ज्यादा परेशानियों दूसरों के जिंदगी में है..।।
कभी परेशानियों से घबराए नही बल्कि परेशानियों का सामना करें..क्योंकि परेशानियों ही हमारे जिंदगी में निखार लाता है.।।
सोमवार, 6 अक्टूबर 2025
मेरी दादी माँ..
दुनिया में माँ से भी ज्यादा अगर कोई प्यार करता है तो,वो है दादी माँ..और अगर आप पहले पोते/पोती हो तो मत पूछिए की कितना प्यार मिलेगा..।।
दादी इतना प्यार करती है कि उनके प्यार का अहसास ही नही होता..
उनका प्यार,उनका व्यवहार लगने लगता है,शायद इसीलिए उनके प्यार को हम अहसास नही कर पाते,जब दूर चली जाती है,तब अहसास होता है..।
मेरी दादी माँ..उनके बारे में जितना लिखू उतना कम है..।
मैं बचपन से ही दादी माँ के करीब था शायद इसलिए उनका प्यार ज्यादा पाने का मौका मिला..।
मेरी दादी माँ गलत घर में पैदा हो गई थी..।अगर वो किसी राजनीतिज्ञ के घर मे पैदा हु
हुई होती, तो आज शायद उन्हें सब जानता।अगर वो किसी उद्योगपति के घर पैदा हुई होती, तो बहुत बड़ी उद्योगपति होती..।अगर किसी कलाकार,लेखक के घर पैदा हुई होती तो अच्छा कलाकार/लेखक होती..।मगर प्रकृति को कुछ और ही मंजूर था..।
उनमें जितना करुणा और प्रेम था,उतना ही क्रोध भी..उनमें सब गुण था..।
भगवान ने उन्हें सब सुख दिया..लगभग उनकी सब इच्छायें पूर्ति हो ही गई,अगर कुछ बाकी रह भी गया तो,सब इच्छायें सबकी कंहा पूरी होती है..।।
दादीमाँ के कथनानुसार उन्होंने गरीबी के साथ संघर्ष भी देखा बचपन मे भी और शादी के बाद भी(जब बाबा दुर्घटना में महीनों घायल रहें) मगर भगवान के दया से उन्हें सबसु ख मिला..इसलिए शायद उन्हें भगवान से शिकायत ना के बराबर रही होगी..।
कुछ लिखने का मन नही करता..
शायद अपने साथ दादी माँ अपनी स्मृतियां भी ले गई..।
या फिर लिखने को इतना कुछ है कि कुछ लिख नही पाता..।
हमारा प्रथम प्राथमिकता..
हम सबके जीवन में शुरू से लेकर अंत तक किसी न किसी चीज की प्राथमिकता बनी रहती है..।
किसी के लिए परिवार,किसी के लिए समाज तो किसी के लिए पैसा पहला प्राथमिकता होता है..।हम ता उम्र इसे और बढ़ाने में लगे रहते है।जो कि सही भी है..अगर जिंदगी में हम किसी चीज को प्राथमिकता नही देंगे तो फिर जिंदगी का महत्व ही क्या रह जाएगा..।
मगर एक वक्त ऐसा आता है,जब हमारे पास पैसा,समाज,परिवार सबकुछ होते हुए भी,कोई काम का नही रह जाता आखिर क्यों..??
क्योंकि हमारा स्वास्थ्य हमारा साथ नही दे रहा होता..
आखिर क्यों..??
क्योंकि हमने अपने स्वास्थ्य को,कभी प्राथमिकता नहीं दी।
जबकि हमारा प्रथम प्राथमिकता हमारा स्वास्थ्य होना चाहिए..।
अगर आप स्वस्थ है तो आप सबकुछ पा सकते है..
अगर आप अस्वस्थ है तो सब कुछ होते हुए भी किसी चीज का उपभोग नही कर सकते..।।
हममें से अधिकांश लोग पूरी उम्र पैसा और परिवार के पीछे खर्च कर देते है..मगर अपने ऊपर कुछ वक्त खर्च नही करते...।।मगर जब आप कुछ दिनों के लिए बीमार होते है..तब ये पैसा और परिवार साथ तो होता है,मगर उस असहनीय पीड़ा से खुद ही जूझना पड़ता है..।।
इसीलिए हमारी प्रथम प्राथमिकता हमारा स्वास्थ्य होना चाहिए..
अपने लिए हरेक रोज समय निकालिय और अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखिये...।।
"क्योंकि स्वास्थ्य से बड़ा कोई धन नही है, और न ही कोई मित्र है"।
पुनर्वित्तं पुनर्मित्रं पुनर्भार्या पुनर्मही। एतत्सर्वं पुनर्लभ्यं न शरीरं पुनः पुनः ॥
हरेक चीज को हम दुबारा पा सकते है,मगर अपने स्वास्थ्य को नही,इसलिय अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखिये..।।
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