बुधवार, 29 अप्रैल 2026

"माँ"..

बेइंतिहा प्यार करो उन्हें..
जो बिना शर्त आपसे प्यार करते है..।

इस जंहा में एक ही तो है..
जो बेइंतिहा और बिना शर्त..
आपसे प्यार करती है..
और वो.. 
"माँ" है..।

मगर इसका अहसास ही नही होता..
क्योंकि "माँ"..
बिना शर्त जो प्यार करती है..।
बाकी और कोई नही है..
इस जंहा में..
जो बिना शर्त प्यार करती हो..

शंकराचार्य कहते है..
"कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता  भवति..।"






यू ही भटक रहा हूँ..

यू ही जाहिलों की तरह भटक रहा हूँ..
जाहिलों के आंगन में..
कब मुक्ति मिलेगी..
इन जाहिलों और इस जाहिलों के आंगन से..।।

जिन्हें में जाहिल कह रहा हूँ..
वो तो जाहिल है ही नही..
मैं ही जाहिल हूँ..
जो सबको जाहिल समझ रहा हूँ..।





उसने कहा..

उसने कहा..
मैं थक गया हूँ..
थोड़ी छावं चाहिए..

मैंने कहा..
आपने पेड़ ही कंहा लगाए..
जिसके छावं मैं बैठ सको...।

वो असहाय होकर आसमां निघारने लगा..
मालूम नही क्या जादू किया उसने..
देखते ही देखते..
पूरा आसमाँ काला होने लगा..
मानों बादलों का झुंड हमारे ही और आ रहा हो..।



ये क्या..
ये तो धुंए का अंबार था..।

शायद कंही दूर जंगलों में आग लगी है..
या फिर कंक्रीट के जंगलों के लिए..
जंगल मे आग लगाई गई है..??

सोमवार, 27 अप्रैल 2026

हम असफल क्यों होते है..

आपने कभी सोचा है..
कुछ लोग सफल और असंख्य लोग असफल क्यों होते है..??
आपको जानकर हैरानी होगी कि कुछ लोग जो सफल हुए है..उन्हें भी सफलता की उम्मीद नही थी..
मगर वो सफल हो गए..
आखिर कैसे..??
क्योंकि उन्हें पता था कि,जाना कंहा है..।


सफलता के कई कारण हो सकते है..
मगर असफलता के कुछ मूलभूत कारण ही होते है..।
अगर हम उन कारणों को ढूंढ ले तो हम असफलता से छुटकारा पा सकते है..।
मगर क्या ये आसान है..
बिल्कुल नही,क्योंकि हम वो कारण सदियों से जानते है..
मगर उसपे कुछ ही लोग अमल कर पाते है..
और जो अमल कर पाते है,वो नया कीर्तिमान रच जाते है..।।

असफलता के कुछ मूलभत कारण है..

अपने लक्ष्य का पता ना होना..

लक्ष्य का पता होने के बाबजूद उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वो सब नही करना जो करना अतिआवश्यक है..(बाकी सबकुछ करते है,कुछ नही छोड़ते)

अपने लक्ष्य को पाने के बारे में न सोचना..(बाकी सबकुछ सोचते है,लक्ष्य प्राप्त न हुआ तो क्या होगा,लक्ष्य प्राप्ति के बाद क्या-क्या होगा..न जाने और क्या-क्या)

अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए सर्वस्व त्याग के लिए, तैयार न होना..(हम सिर्फ क्षणभंगुर सुख को पाना चाहते है,भले ही उसके लिए अपने लक्ष्य से समझौता ही क्यों न करना पड़े)


अगर सच कहूं तो हमसब जानबूझकर असफल होते है..क्योंकि ये मूलभूत बातें हमें सदियों से पता है,और बचपन से इसके बारे में सिखाया जाता है..
मगर हम इसपर अमल नही कर पाते..और हम इन असफलता का दोष दूसरों पे मढ़ते है..हममें इतनी भी हिम्मत नही होती कि हम अपनी असफलता को स्वीकार करें..।
 जब हम अपनी असफलता को स्वीकारते है,तब अपने लिए सफलता का नया द्वार खोलते है..।।
क्योंकि हम स्वयं ही अपने असफलता के लिए जिम्मेदार है..।

शनिवार, 25 अप्रैल 2026

खुद को बदलने के लिए..

खुद को बदलने के लिए..
खुद को बदलना होता है..।
खुद से लड़ने के लिए..
सबसे पहले..
खुद से लड़ना होता है..।
दुनिया से..
नजर मिलाने से पहले..
खुद से नजर मिलाना होता है..।
काबिल बनने से पहले..
खुद के नजर में पहले..
काबिल बनना होता है..।।

ये इतना..
आसना नही है..
खुद को बदलना..।
जिसने भी खुद को बदला..
खुदा का ही नही..
सारे जंहा का प्यारा हो गया..।
जिस-जिस के लिए..
इज्जत है तेरी नजर में..।
उन सबने पहले..
खुद से नजर मिलाना सीखा..।
क्या तुम हो.. 
उस काबिल..
जो खुद से नजर मिला सको..
अगर हां..
तो तैयार हो जाओ..
दुनिया कब से बांहे पसारे..
तुम्हारा इंतजार कर रही है..।।


खुद को बदलने के लिए..
खुद को बदलना होता है..।






बुधवार, 22 अप्रैल 2026

दायित्व का बोझ

बचपन से लेकर मृत्यु तक हम किसी न किसी बोझ को लेकर जीते ही है..
चाहे वो बोझ शिक्षा का हो,रोजगार का हो,रिश्ते-नाते का हो,परिवार का हो,समाज का हो,आदतों का हो या फिर वर्तमान में सोशल मीडिया का हो..।



हम किसी न किसी बोझ में जी रहे होते है..।।
इसमें से कई बोझ तो हम निरर्थक का ढो रहे होते है..
अगर समय रहते निरर्थक बोझ को नही हटाया तो वो आजीवन आपके जिंदगी का हिस्सा बन जायेगा..।
उस बोझ के कारण न आप खुश रहेंगे और न ही आपके ऊपर वो बोझ लादने वाला..
इसीलिए शुरुआत में ही अगर वो बोझ निरर्थक लगे तो उसे उतार फेंकिये..बिना किसी के फिक्र किये हुए..क्योंकि वो आपको बोझ उठाने में सहयोग तो करेंगे..मगर उसे ढोना आपको ही पड़ेगा..।।

आप किस तरह के निरर्थक बोझ को ढो रहे है..??
या फिर आपको आभास ही नही है,की आप बोझ ढो रहे है..??

बोझ उतार फेंकने का ये मतलब नही की आप अपने दायित्वों से भागे..बल्कि उसी दायित्व का निर्वहन करें जिसे करने में आप सक्षम हो..अन्यथा जिंदगी तकलीफ देह हो जाती है,अगर दायित्व का निर्वहन सही से न हो तो..।

इसका मतलब ये नही की आप दायित्व न ले..दायित्व ले मगर अपने क्षमता और परिस्थितियों को देखते हुए..।।
ये जिंदगी के हरेक क्षेत्र पर लागू होता है.।

सोमवार, 20 अप्रैल 2026

पुस्तक : जीवन के अदभुत रहस्य

कल रात मैंने "गौर गोपाल दास" जी की पुस्तक "जीवन के अद्भुत रहस्य" पढ़ा..


ये पुस्तक सालों से मेरे पास था..मेरी नजर कई दफा इस पुस्तक पे पड़ता था,और में इससे मुँह मोड़ लेता था..मगर पिछले सप्ताह इसे पढ़ना शुरू किया..और कल रात पढ़ के खत्म किया..शायद इसे मैं आज पढ़ के खत्म करता मगर कल रात एक वाकया हुआ..जो में आपको बताता हूँ-
दिन में जब इस पुस्तक को पढ़ रहा था,तो सोचा इसे आज पढ़ के खत्म कर दूंगा..रात में मैंने इसे पढ़ना शुरू किया..न जाने कब 11:30 बज गए पता नही चला..
मैंने खुद से कहा कल सुबह उठना है,बाकी कल पढ़ लूंगा..।
अंदर से एक आवाज आई..
क्या तुम्हें मालूम है कि तुम कल सुबह उठोगे..??
ये सवाल मन मे उठते ही..
मैं जो खड़ा था,वो बैठ गया..।
और पुस्तक को पढ़ना शुरू किया..और पुस्तक को पढ़ कर खत्म कर दिया..।

अक्सरहाँ हम आज का काम कल पे टालते है..
जबकि हमें कल का पता नही होता..
कोशिश करें आज का काम आज ही निपटा ले..
क्योंकि कल का किसे पता है..।।

ये पुस्तक आप पढ़ सकते है..ज्यों-ज्यों आप आगे बढ़ेंगे आपको पुस्तक में रुचि आने लगेगा..।।
मैं ये नही कह सकता कि ये पुस्तक आपके जिंदगी में बदलाव ला सकता है..
मगर ये जरूर कह सकता हूँ कि, पुस्तक में कई पंक्तिया ऐसी है,अगर वो आपके अंदर घऱ कर गई, तो आपका जिंदगी बदल सकता है..।
ये पुस्तक पाठक के आगे कई मोतियां बिखेरता है..
अगर आप सक्षम है तो उन मोतियों को चुन कर अपने जिंदगी को नया आयाम दे सकते है..।।

इस पुस्तक की कुछ झलकियां दिखाता हूँ-