जो बिना शर्त आपसे प्यार करते है..।
इस जंहा में एक ही तो है..
जो बेइंतिहा और बिना शर्त..
आपसे प्यार करती है..
और वो..
"माँ" है..।
मगर इसका अहसास ही नही होता..
क्योंकि "माँ"..
बिना शर्त जो प्यार करती है..।
बाकी और कोई नही है..
इस जंहा में..
जो बिना शर्त प्यार करती हो..
शंकराचार्य कहते है..
"कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति..।"

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