उसने कहा..
मैं थक गया हूँ..थोड़ी छावं चाहिए..
मैंने कहा..
आपने पेड़ ही कंहा लगाए..
जिसके छावं मैं बैठ सको...।
वो असहाय होकर आसमां निघारने लगा..
मालूम नही क्या जादू किया उसने..
देखते ही देखते..
पूरा आसमाँ काला होने लगा..
मानों बादलों का झुंड हमारे ही और आ रहा हो..।
ये क्या..
ये तो धुंए का अंबार था..।
शायद कंही दूर जंगलों में आग लगी है..
या फिर कंक्रीट के जंगलों के लिए..
जंगल मे आग लगाई गई है..??

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